Delhi Riots: दंगाइयों ने झोंक दिया था आंखों में तेजाब, चली गई दोनों आंखें, अब तीन साल बाद हुई एफआईआर
25 फरवरी 2020 को दंगाइयों ने घर में आग लगाने के अलावा मोहम्मद वकील की दोनों आंखों व बेटी के चेहरे और शरीर पर तेजाब डाल दिया था। हमले के बाद वकील एफआईआर दर्ज कराने के लिए दर-दर की ठोकरें खाते रहे, लेकिन तीन साल एफआईआर नहीं हुई।
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करावल नगर के शिव विहार में रहने वाला मोहम्मद वकील का परिवार आज भी उस रात को याद कर सिहिर उठता है। दंगाइयों ने वकील के घर व दुकान में आग लगाने के अलावा उनके परिवार को खत्म करने की कोशिश की। बलवा कर रहे लोगों ने वकील की आंखों में तेजाब झोंकने के अलावा बेटी को भी तेजाब डालकर जला दिया। रात के अंधरे में किसी तरह परिवार ने भागकर अपनी जान बचाई। हमले में वकील की दोनों आंखें खत्म हो गईं।
एक माह अस्पताल में रहने के बाद वकील ने मामले में एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी। परिवार दर-दर की ठोकरें खाता रहा। आखिर तीन साल बाद अब पुलिस अधिकारियों का दिल पसीजा और मामले में दंगा करने, घर में घुसकर आगजनी करने के अलावा तेजाब डालकर जलाने की अलग एफआईआर की गई है। परिवार को अब इंसाफ की उम्मीद जागी है।
मोहम्मद वकील का परिवार गली नंबर-13 फेस-6, शिव विहार में रहता है। इसके परिवार में पत्नी मुमताज बेगम के अलावा दो बेटी और तीन बेटे हैं। बड़ी बेटी की वकील शादी कर चुके थे। फरवरी 2020 तक वकील अपने घर के नीचे बनी दुकान में परचून की दुकान चलाते थे। वकील ने बताया कि वह इस मकान में करीब पिछले 20 सालों से रह रहे थे। उन्होंने खुद ही मकान को मनवाया था। 25 फरवरी 2020 को वह परिवार के साथ घर पर मौजूद थे। इस बीच दंगाई उनके घर के बाहर इकट्ठा हो गए। वह गंदी-गंदी गालियां देने के अलावा धार्मिक नारेबाजी करने लगे। इसके बाद उन लोगों ने आसपास के कई मकानों में लूटपाट करने के अलावा आग लगा दी। घर के बराबर एक मस्जिद में घुसकर भी इन लोगों ने तोड़फोड़ की। बाद में वहां पर एक एलपीजी सिलिंडर में आग लगाकर उसमें ब्लास्ट करवा दिया। इसके बाद दंगाई हमारे घर में घुसकर लूटपाट करने लगे। वकील परिवार के साथ जान बचाकर छत की ओर भागे।
कुछ लोग वहां पहुंच गए। इन लोगों ने वकील के ऊपर तेजाब की बोतल से हमला कर उनकी आंखों में तेजाब डाल दिया। इसके अलावा 17 वर्षीय बेटी पर भी तेजाब डाल दिया गया। बाद में दंगाइयों ने घर को आग के हवाले कर दिया। परिवार ने किसी तरह छिपकर रात बिताई। इसके बाद तड़के परिवार किसी तरह घर से निकला और चमन पार्क पहुंचा। वहां राहत शिविर में उनकी जान बची। अगले दिन वकील और उसकी बेटी को अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने एक कॉमन एफआईआर में वकील की पत्नी का बयान लेकर घर में आगजनी और दंगे का तो मामला दर्ज कर लिया, लेकिन उसमें पति और बेटी के साथ हुई दरिंदगी का कोई जिक्र नहीं था। वकील और उनकी बेटी एक माह से अधिक समय तक एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती रहे। हमले में उनकी दोनों आंखें खत्म हो गईं।
अब दंगे के मामले में वकील को अपनी एफआईआर दर्ज कराना थी। दृष्टिहीन हो चुके वकील कभी थाने तो कभी डीसीपी ऑफिस तो कभी पुलिस आयुक्त कार्यालय का चक्कर लगाते रहे। दर-दर की ठोकरें खाने के बाद भी उनकी सुनवाई नहीं हुई। अब करीब तीन साल एक महीने बाद पुलिस का दिल पसीजा। पुलिस ने दो अप्रैल को मामले में 147/148/149/ 427/436/326(ए) 34 (दंगा करने, घर में घुसकर आगजनी करने, तेजाब डालने समेत अन्य धाराओं) में मामला दर्ज किया है। परिवार को अब न्याय की उम्मीद जागी है। परिवार का कहना है कि दंगा करने वाले आसपास के एरिया के ही लोग थे। हालांकि कुछ लोगों को वकील ने नामजद भी किया है। अब पुलिस मामले की जांच नए सिरे से करेगी।
सब कुछ गंवाने के डेढ़ साल बाद परिवार अपने मकान में लौटा वापस...
मोहम्मद वकील के बेटे शमीम ने बताया कि दंगे की उस रात को वह कभी नहीं भूल सकता है। उसके पिता और बहन दर्द के मारे तड़प रहे थे। लेकिन चाहकर भी उनके मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी। तड़के तीन से चार बजे के बीच वह अपने जख्मी पिता व बहन के अलावा मां व दो छोटे भाइयों को लेकर छुपता-छुपाता मुस्तफाबाद चमन पार्क की ओर निकला। वहां पर लोगों ने उसकी मदद की। दंगाइयों ने घर में आग लगाने के अलावा एलपीजी सिलिंडर में धमाका करवा दिया था। घर पूरी तरह जल चुका था।
शुरुआत में करीब एक-सवा महीना पिता व बहन के साथ अस्पताल में रहा। इस बीच जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने उनके घर और दुकान को दोबारा से बनवाने की हामी भरी। लेकिन बाद में लॉकडाउन लग गया। परिवार इधर-उधर किराए पर रहता रहा। शमीम मजदूरी कर अपने परिवार को पालता रहा। जमीयत ने लॉकडाउन के बाद उनके जले हुए घर को ठीक कराया। शमीम ने किसी तरह दोबारा से अपनी दुकान को ठीक-ठाक कराकर उसमें सामान रखा और अब वह दुकान से ही घर का खर्चा चला रहा है। शमीम बताता है कि इन लोगों ने इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खाई हैं। अब उनको पुलिस व प्रशासन से उम्मीद है।