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Delhi NCR News: दिल्लीवासी श्वसन संक्रमण और दस्त की बीमारी से सबसे ज्यादा जूझ रहे
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सबसे ज्यादा मौत की वजह बना एंटेरिक फीवर, वार्षिक रिपोर्ट में हुआ खुलासा
ललित कौशिक
नई दिल्ली।
दिल्लीवासी श्वसन संक्रमण, दस्त संबंधी रोग, निमोनिया, टाइफाइड बुखार सहित कई दूसरी बीमारियों से सबसे ज्यादा परेशान है। दिल्ली में सबसे ज्यादा श्वसन संक्रमण होने और दस्त संबंधी बीमारियों के मरीज उपचार के लिए अस्पताल की जनरल ओपीडी, आईपीडी और इमरजेंसी ओपीडी में पहुंचे है। इसमें सबसे ज्यादा मौत एंटेरिक फीवर के चलते हुई है।
इस संबंध में स्वास्थ्य सेवा निदेशालय ने 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट जारी की है। जनवरी 2025 से लेकर दिसंबर 2025 तक आंकड़ों को लेकर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार अलग-अलग बीमारियों के कुल 397864 मरीज रिपोर्ट हुए। इसमें पुरुष मरीजों की संख्या 206883, महिलाओं की 189547 और ट्रांसजेंडर मरीज की संख्या 1434 रही। जबकि 429 मरीजों की मौत हुई। इसमें 229 पुरुष और 200 महिला शामिल थी।
इसमें एक्यूट (तीव्र) दस्त संबंधी रोग, एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम, एक्यूट श्वसन संक्रमण, चिकन पॉक्स, हैजा (प्रयोगशाला द्वारा पुष्ट), डिप्थीरिया,आंत्र ज्वर(एंटेरिक फीवर), खसरा, मेनिनजाइटिस अन्य, मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस, नवजात शिशुओं में टेटनस, निमोनिया, सिफिलिस गोनोकोकल संक्रमण, नवजात शिशुओं के अलावा अन्य टिटनेस, सभी वायरल हेपेटाइटिस और काली खांसी बीमारी के मरीज अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे।
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इस रिपोर्ट के अनुसार सर्वाधिक ढाई लाख से ज्यादा मरीज तीव्र श्वसन संक्रमण को लेकर उपचार के लिए पहुंचे है। इसमें इन्फ्लूएंजा सहित निमोनिया को छोड़कर मरीज शामिल है। इसमें पुरुष मरीजों की संख्या 133964, महिला मरीज 123113 और 905 ट्रांसजेंडर शामिल है। इसमें 50 मरीजों की मौत हुई। जिसमें सबसे ज्यादा संख्या 29 महिला मरीज थी।
श्वसन संक्रमण के बाद सबसे ज्यादा तीव्र दस्त संबंधी रोग के मरीज अस्पतालों की ओपीडी, इमरजेंसी और आईपीडी में रिपोर्ट किए गए। जनवरी से लेकर दिसंबर के बीच में एक लाख से ज्यादा मरीज उपचार के लिए रिपोर्ट किए गए। इसमें पुरुष मरीज 56308, महिला मरीज 51796 और 395 ट्रांसजेंडर शामिल है। दस्त संबंधी रोग के चलते 109 मरीजों को जान गंवानी पड़ी। इसमें सर्वाधिक 68 पुरुष मरीज शामिल थे।
जबकि निमोनिया बीमारी के अस्पतालों में साढ़े 11 हजार से अधिक मरीज सालभर में रिपोर्ट किए गए। जिसमें 5900 से ज्यादा पुरुष, 5600 से अधिक महिला और 62 ट्रांसजेंडर मरीज शामिल थे। निमोनिया की बीमारी के चलते 111 मरीजों की मौत हुई। इसमें 63 पुरुष मरीज शामिल थे। जबकि एंटेरिक फीवर के साढ़े नौ हजार से ज्यादा मरीज पहुंचे। अस्पताल में सबसे ज्यादा मौत एंटेरिक फीवर की रिपोर्ट की गई। जनवरी से लेकर दिसंबर में 136 मौत हुई। इसमें सबसे ज्यादा 70 मरीज महिला थी।
वहीं चिकन पॉक्स के 4800 से ज्यादा मरीज अस्पतालों में रिपोर्ट हुए और किसी मरीज की मौत नहीं हुई। एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (दिमागी बुखार) के 3500 से अधिक मरीज अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंचे और 17 मरीजों की मौत हुई। काली खांसी के 850 से ज्यादा, हैजा के 350 से अधिक, वायरल हेपेटाइटिस के 250 से ज्यादा,नवजात शिशुओं के अलावा अन्य टिटनेस 190 से अधिक मरीज पहुंचे। जबकि मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस से पांच मरीज और मेनिनजाइटिस(अन्य) से एक मरीज की मौत हुई। इसके अलावा राहत की बात यह रही कि काली खांसी, वायरल हेपेटाइटिस, नवजात शिशुओं के अलावा अन्य टिटनेस, सिफिलिस गोनोकोकल संक्रमण, नवजात शिशुओं में टेटनस,खसरा,डिप्थीरिया, हैजा और चिकन पॉक्स के मामलों में किसी मरीज की मौत नहीं हुई।
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ललित कौशिक
नई दिल्ली।
दिल्लीवासी श्वसन संक्रमण, दस्त संबंधी रोग, निमोनिया, टाइफाइड बुखार सहित कई दूसरी बीमारियों से सबसे ज्यादा परेशान है। दिल्ली में सबसे ज्यादा श्वसन संक्रमण होने और दस्त संबंधी बीमारियों के मरीज उपचार के लिए अस्पताल की जनरल ओपीडी, आईपीडी और इमरजेंसी ओपीडी में पहुंचे है। इसमें सबसे ज्यादा मौत एंटेरिक फीवर के चलते हुई है।
इस संबंध में स्वास्थ्य सेवा निदेशालय ने 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट जारी की है। जनवरी 2025 से लेकर दिसंबर 2025 तक आंकड़ों को लेकर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार अलग-अलग बीमारियों के कुल 397864 मरीज रिपोर्ट हुए। इसमें पुरुष मरीजों की संख्या 206883, महिलाओं की 189547 और ट्रांसजेंडर मरीज की संख्या 1434 रही। जबकि 429 मरीजों की मौत हुई। इसमें 229 पुरुष और 200 महिला शामिल थी।
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इसमें एक्यूट (तीव्र) दस्त संबंधी रोग, एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम, एक्यूट श्वसन संक्रमण, चिकन पॉक्स, हैजा (प्रयोगशाला द्वारा पुष्ट), डिप्थीरिया,आंत्र ज्वर(एंटेरिक फीवर), खसरा, मेनिनजाइटिस अन्य, मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस, नवजात शिशुओं में टेटनस, निमोनिया, सिफिलिस गोनोकोकल संक्रमण, नवजात शिशुओं के अलावा अन्य टिटनेस, सभी वायरल हेपेटाइटिस और काली खांसी बीमारी के मरीज अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे।
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इस रिपोर्ट के अनुसार सर्वाधिक ढाई लाख से ज्यादा मरीज तीव्र श्वसन संक्रमण को लेकर उपचार के लिए पहुंचे है। इसमें इन्फ्लूएंजा सहित निमोनिया को छोड़कर मरीज शामिल है। इसमें पुरुष मरीजों की संख्या 133964, महिला मरीज 123113 और 905 ट्रांसजेंडर शामिल है। इसमें 50 मरीजों की मौत हुई। जिसमें सबसे ज्यादा संख्या 29 महिला मरीज थी।
श्वसन संक्रमण के बाद सबसे ज्यादा तीव्र दस्त संबंधी रोग के मरीज अस्पतालों की ओपीडी, इमरजेंसी और आईपीडी में रिपोर्ट किए गए। जनवरी से लेकर दिसंबर के बीच में एक लाख से ज्यादा मरीज उपचार के लिए रिपोर्ट किए गए। इसमें पुरुष मरीज 56308, महिला मरीज 51796 और 395 ट्रांसजेंडर शामिल है। दस्त संबंधी रोग के चलते 109 मरीजों को जान गंवानी पड़ी। इसमें सर्वाधिक 68 पुरुष मरीज शामिल थे।
जबकि निमोनिया बीमारी के अस्पतालों में साढ़े 11 हजार से अधिक मरीज सालभर में रिपोर्ट किए गए। जिसमें 5900 से ज्यादा पुरुष, 5600 से अधिक महिला और 62 ट्रांसजेंडर मरीज शामिल थे। निमोनिया की बीमारी के चलते 111 मरीजों की मौत हुई। इसमें 63 पुरुष मरीज शामिल थे। जबकि एंटेरिक फीवर के साढ़े नौ हजार से ज्यादा मरीज पहुंचे। अस्पताल में सबसे ज्यादा मौत एंटेरिक फीवर की रिपोर्ट की गई। जनवरी से लेकर दिसंबर में 136 मौत हुई। इसमें सबसे ज्यादा 70 मरीज महिला थी।
वहीं चिकन पॉक्स के 4800 से ज्यादा मरीज अस्पतालों में रिपोर्ट हुए और किसी मरीज की मौत नहीं हुई। एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (दिमागी बुखार) के 3500 से अधिक मरीज अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंचे और 17 मरीजों की मौत हुई। काली खांसी के 850 से ज्यादा, हैजा के 350 से अधिक, वायरल हेपेटाइटिस के 250 से ज्यादा,नवजात शिशुओं के अलावा अन्य टिटनेस 190 से अधिक मरीज पहुंचे। जबकि मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस से पांच मरीज और मेनिनजाइटिस(अन्य) से एक मरीज की मौत हुई। इसके अलावा राहत की बात यह रही कि काली खांसी, वायरल हेपेटाइटिस, नवजात शिशुओं के अलावा अन्य टिटनेस, सिफिलिस गोनोकोकल संक्रमण, नवजात शिशुओं में टेटनस,खसरा,डिप्थीरिया, हैजा और चिकन पॉक्स के मामलों में किसी मरीज की मौत नहीं हुई।