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Delhi NCR News: एफआईआर में चौथे नंबर पर, लेकिन आर्थिक अपराध के जोखिम में टॉप पर दिल्ली
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-एनसीआरबी 2024 की रिपोर्ट का खुलासा, मुकदमों की संख्या में मुंबई और हैदराबाद आगे
आबादी के अनुपात में आर्थिक अपराध का शिकार होने का व्यक्तिगत जोखिम राजधानी में देश के सभी महानगरों से ज्यादा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली:
देश की राजधानी में अपराधियों का जाल किस कदर फैला है, इसका खुलासा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट क्राइम इन इंडिया 2024 से हुआ है। यह रिपोर्ट दिल्ली के लिए एक कड़वा सच बयां करती है। आर्थिक अपराध के कुल मुकदमों के मामले में दिल्ली देश के महानगरों में चौथे पायदान पर है, लेकिन जब बात इस अपराध के असली खतरे यानी अपराध दर की आती है, तो दिल्ली देश के सभी 19 प्रमुख महानगरों को पीछे छोड़ते हुए पहले पायदान पर पहुंच गई है।
सरल शब्दों में कहें तो, भले ही मुंबई जैसे शहरों में फाइलों का ढेर दिल्ली से बड़ा हो, लेकिन दिल्ली की गलियों और दफ्तरों में रहने वाले हर नागरिक के लिए आर्थिक अपराध का शिकार होने की संभावना देश के किसी भी अन्य शहर के मुकाबले कहीं ज्यादा है। एनसीआरबी के अनुसार, आर्थिक अपराधों के कुल मुकदमों के मामले में दिल्ली शहर (4,524 मामले) से आगे केवल तीन शहर मुंबई (7,771), हैदराबाद (5,839) और जयपुर (5,471) हैं। लेकिन दिल्ली का असली खौफ इसकी आर्थिक अपराध दर में छिपा है, जिसकी गणना प्रति एक लाख की आबादी पर की जाती है।दिल्ली शहर की आर्थिक अपराध दर 163.1 दर्ज की गई है, जो देश के सभी महानगरों में सबसे अधिक है। इसकी तुलना में सबसे ज्यादा एफआईआर वाले शहर मुंबई में आर्थिक अपराध का व्यक्तिगत जोखिम (दर 42.2) दिल्ली के मुकाबले करीब 4 गुना कम है। यानी दिल्ली में आर्थिक अपराधी अन्य शहरों के मुकाबले कहीं अधिक सक्रिय और शातिर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, धोखाधड़ी और जालसाजी इस श्रेणी के सबसे अधिक 4,237 मामले दर्ज किए गए हैं। लोगों के भरोसे को तोड़ने के 254 मामले सामने आए हैं। वहीं जाली मुद्रा और सिक्कों से जुड़े 33 मामले भी दर्ज हुए हैं।
जांच की सुस्त रफ्तार : भले ही दिल्ली पुलिस ने इन अपराधों के सिलसिले में 2,015 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन न्याय की राह बहुत लंबी है। पुलिस के पास पुराने लंबित मामलों को मिलाकर कुल 21,438 मामले जांच के दायरे में थे, जिनमें से साल के अंत तक 76.9% मामले लंबित रहे। आर्थिक अपराध के मामले में जोखिम का नंबर-1 पायदान इस बात की चेतावनी है कि राजधानी में वित्तीय लेनदेन और कागजी समझौतों के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतना अब दिल्लीवासियों की मजबूरी बन गया है।
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देश के टॉप-5 शहर...
शहर-- कुल मामले-- एफआईआर रैंकिंग-- जोखिम दर (प्रति लाख)
दिल्ली-- 4,524-- -- -- -4 -- 163.1
मुंबई 7,771-- -- -- -- -- 1 -- 42.2
हैदराबाद 5,839-- -- -- -- 2-- 77.5
जयपुर 5,471-- -- -- -- - 3-- 00
बेंगलुरु 3,477-- -- -- -- 5-- 85.0
नोट: दिल्ली की गणना 2011 की वास्तविक जनगणना के आधार पर की गई है, जिससे यहां का आर्थिक अपराध जोखिम स्तर देश में सर्वोच्च है।
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आबादी के अनुपात में आर्थिक अपराध का शिकार होने का व्यक्तिगत जोखिम राजधानी में देश के सभी महानगरों से ज्यादा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली:
देश की राजधानी में अपराधियों का जाल किस कदर फैला है, इसका खुलासा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट क्राइम इन इंडिया 2024 से हुआ है। यह रिपोर्ट दिल्ली के लिए एक कड़वा सच बयां करती है। आर्थिक अपराध के कुल मुकदमों के मामले में दिल्ली देश के महानगरों में चौथे पायदान पर है, लेकिन जब बात इस अपराध के असली खतरे यानी अपराध दर की आती है, तो दिल्ली देश के सभी 19 प्रमुख महानगरों को पीछे छोड़ते हुए पहले पायदान पर पहुंच गई है।
सरल शब्दों में कहें तो, भले ही मुंबई जैसे शहरों में फाइलों का ढेर दिल्ली से बड़ा हो, लेकिन दिल्ली की गलियों और दफ्तरों में रहने वाले हर नागरिक के लिए आर्थिक अपराध का शिकार होने की संभावना देश के किसी भी अन्य शहर के मुकाबले कहीं ज्यादा है। एनसीआरबी के अनुसार, आर्थिक अपराधों के कुल मुकदमों के मामले में दिल्ली शहर (4,524 मामले) से आगे केवल तीन शहर मुंबई (7,771), हैदराबाद (5,839) और जयपुर (5,471) हैं। लेकिन दिल्ली का असली खौफ इसकी आर्थिक अपराध दर में छिपा है, जिसकी गणना प्रति एक लाख की आबादी पर की जाती है।दिल्ली शहर की आर्थिक अपराध दर 163.1 दर्ज की गई है, जो देश के सभी महानगरों में सबसे अधिक है। इसकी तुलना में सबसे ज्यादा एफआईआर वाले शहर मुंबई में आर्थिक अपराध का व्यक्तिगत जोखिम (दर 42.2) दिल्ली के मुकाबले करीब 4 गुना कम है। यानी दिल्ली में आर्थिक अपराधी अन्य शहरों के मुकाबले कहीं अधिक सक्रिय और शातिर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, धोखाधड़ी और जालसाजी इस श्रेणी के सबसे अधिक 4,237 मामले दर्ज किए गए हैं। लोगों के भरोसे को तोड़ने के 254 मामले सामने आए हैं। वहीं जाली मुद्रा और सिक्कों से जुड़े 33 मामले भी दर्ज हुए हैं।
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जांच की सुस्त रफ्तार : भले ही दिल्ली पुलिस ने इन अपराधों के सिलसिले में 2,015 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन न्याय की राह बहुत लंबी है। पुलिस के पास पुराने लंबित मामलों को मिलाकर कुल 21,438 मामले जांच के दायरे में थे, जिनमें से साल के अंत तक 76.9% मामले लंबित रहे। आर्थिक अपराध के मामले में जोखिम का नंबर-1 पायदान इस बात की चेतावनी है कि राजधानी में वित्तीय लेनदेन और कागजी समझौतों के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतना अब दिल्लीवासियों की मजबूरी बन गया है।
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देश के टॉप-5 शहर...
शहर
दिल्ली
मुंबई 7,771
हैदराबाद 5,839
जयपुर 5,471
बेंगलुरु 3,477
नोट: दिल्ली की गणना 2011 की वास्तविक जनगणना के आधार पर की गई है, जिससे यहां का आर्थिक अपराध जोखिम स्तर देश में सर्वोच्च है।