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दिल्ली: पांचवीं बार होगी पुराना किला की खोदाई, उठेगा कई रहस्यों से पर्दा

Tue, 17 Jan 2023 10:02 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 17 Jan 2023 10:02 AM IST
सार

दिल्ली के मथुरा रोड स्थित पुराना किला में सोमवार से पांच साल बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने खोदाई शुरू कर दी है। वरिष्ठ अधिकारी वसंत कुमार स्वर्णकर की अगुवाई में यह तीसरी बार है जब पुराने किला में खोदाई शुरू की है।

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Delhi purana qila archaeological survey fifth time many secrets to reveal
पुराना किला - फोटो : self

विस्तार

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने दिल्ली स्थित पुराना किला की तीसरी बार खोदाई शुरू कर दी है। पांच साल के बाद दोबारा और एएसआई के वरिष्ठ अधिकारी वसंत कुमार स्वर्णकार की अगुवाई में तीसरी बार खोदाई का काम शुरू हुआ है।

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पुरानी मान्यताओं के मुताबिक यमुना नदी के किनारे स्थित पुराना किला पांडवों की राजधानी थी। हालांकि अभी तक की खोदाई में प्रमाण नहीं मिले हैं। लेकिन खोदाई से मिले सामान से निष्कर्ष निकला था कि वर्षों पहले यहां लोग रहते होंगे।

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दिल्ली के मथुरा रोड स्थित पुराना किला में सोमवार से पांच साल बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने खोदाई शुरू कर दी है। वरिष्ठ अधिकारी वसंत कुमार स्वर्णकर की अगुवाई में यह तीसरी बार है जब पुराने किला में खोदाई शुरू की है। इससे पहले वर्ष 1969-73 के बीच में पदमश्री बीबी लाल की अगुवाई में सबसे पहले खोदाई की गई थी। इसके बाद वर्ष 2013-14 के बीच एएसआई के वरिष्ठ अधिकारी वसंत कुमार स्वर्णकर की अगुवाई में खोदाई हुई थी।

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उन्होंने ही वर्ष 2017-18 में भी खोदाई की और अब पांच साल बाद उनकी ही निगरानी में खोदाई शुरू हुई है। कहा जाता है कि यह जगह पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ हो सकती है। दरअसल, जिस जगह पांडवों की राजधानी थी, वह जगह मौजूदा समय में पुराना किला के अंदर टीले पर है। लेकिन अब तक हुई चार बार की खोदाई में अभी तक इसके प्रमाण नहीं मिले।

2017 में चूड़ी, सिक्के, पानी की निकासी के लिए नालियां मिली थी

एएसआई की टीम को वर्ष 2017-18 में खोदाई के दौरान मौर्य काल और इससे पहले की जुड़ी कई चीजें मिली थीं। इसमें चूड़ी, सिक्के, पानी निकासी के लिए नालियां समेत अन्य सामान था, जोकि करीब 2500 साल पुराना था। तब एएसआई ने कहा था कि यहां पर वर्षों पहले लोगों के रहने का प्रमाण मिलता है। हालांकि अभी तक यह प्रमाणित नहीं हो पाया है कि यहां पर ही पांडवों की राजधानी थी।

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