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Delhi: गर्भवती पत्नी ने दहेज की मांग पर आग लगाने वाले पति को किया माफ, दोषसिद्धि बरकरार; सजा में संशोधन

Fri, 08 May 2026 06:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 08 May 2026 06:26 AM IST
सार

उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने यह निर्णय पत्नी के पति को माफ करने और साथ रहने की इच्छा जताने पर सुनाया। न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की एकल पीठ ने चार मई को आदेश पारित किया और राजू, उसकी मां बर्दी देवी और भाई शंभू की दोषसिद्धि बरकरार रखी लेकिन सजा संशोधित कर दी। 

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Delhi: Pregnant wife forgives husband who set her on fire over dowry demands
Delhi High Court - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने दहेज की मांग पर गर्भवती पत्नी को आग लगाने के मामले में दोषी पति की सजा घटा दी है। उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने यह निर्णय पत्नी के पति को माफ करने और साथ रहने की इच्छा जताने पर सुनाया। न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की एकल पीठ ने चार मई को आदेश पारित किया और राजू, उसकी मां बर्दी देवी और भाई शंभू की दोषसिद्धि बरकरार रखी लेकिन सजा संशोधित कर दी। 

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नवंबर 2000 में दिल्ली के राजापुरी इलाके में राजू ने कथित तौर पर अपनी गर्भवती पत्नी सविता को दहेज की मांग पूरी न करने पर आग लगा दी। सास बर्दी देवी और देवर शंभू ने उसके हाथ पकड़ रखे थे। घटना के तुरंत बाद पुलिस को सूचना नहीं दी गई और पीड़िता को अस्पताल भी नहीं ले जाया गया। उसे मायके भेज दिया गया, जहां स्थानीय और आयुर्वेदिक उपचार चला। 
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सविता के बेटी को जन्म देने के करीब 20 दिन बाद अप्रैल 2001 में दाबड़ी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। तीनों आरोपियों पर आईपीसी की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 498A (पत्नी के प्रति क्रूरता) और 342 (गैरकानूनी रोक) के तहत मुकदमा चला। 
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जनवरी 2004 में ट्रायल कोर्ट ने तीनों को दोषी ठहराया और राजू को हत्या के प्रयास के लिए 7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अन्य धाराओं में भी सजा    दी गई। अपील में तीनों ने   दोषसिद्धि को चुनौती नहीं दी केवल सजा पर बहस की। दोषी हाईकोर्ट गए तो सजा पर स्टे लगा दिया गया था। इनके बीच आपसी समझौता हो गया लेकिन मामला कोर्ट में चलता है। इस बीच सविता के अपने पति से तीन और बच्चे पैदा हुए हैं। 


हाल ही में सुनवाई के दौरान सविता अपने पति और देवर के साथ अदालत पहुंची। उसने कोर्ट को बताया कि मामला सुलझ गया है और वह किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं चाहती। उसने हलफनामा भी दाखिल किया कि वह अब राजू के साथ रह रही है। इस पर कोर्ट ने जितने समय ये जेल में रहे उसे ही सजा मान लिया। हालांकि राज्य पक्ष ने सजा कम करने का विरोध किया।

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