फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Delhi Pollution: Strong winds blow away pollutants but no relief

Delhi Pollution: तेज हवाओं से उड़े प्रदूषक तत्व लेकिन राहत नहीं, सोमवार तक बेहद खराब श्रेणी में रहेगी हवा

Fri, 24 Oct 2025 02:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 24 Oct 2025 02:13 AM IST
सार

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का पूर्वानुमान है कि सोमवार तक हवा बेहद खराब श्रेणी में बनी रहेगी। इसके चलते सांस के मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

विज्ञापन
Delhi Pollution: Strong winds blow away pollutants but no relief
दिल्ली प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी में दिवाली के बाद प्रदूषण से परेशान लोगों को बृहस्पतिवार को चली तेज हवा से कुछ राहत मिली। हालांकि यह राहत अस्थायी मानी जा रही है। राजधानी की हवा में प्रदूषण की मात्रा अब भी सामान्य से तीन गुना अधिक है और वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) शाम चार बजे 305 दर्ज किया गया। यह हवा की बेहद खराब स्थिति है। ग्रेटर नोएडा का एक्यूआई 280, गाजियाबाद में 252, गुरुग्राम में 208 और नोएडा में 276 दर्ज किया गया। दिल्ली-एनसीआर में सबसे साफ हवा फरीदाबाद की रही। यहां एक्यूआई 198 दर्ज किया गया, यह हवा की मध्यम श्रेणी है।

विज्ञापन


केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का पूर्वानुमान है कि सोमवार तक हवा बेहद खराब श्रेणी में बनी रहेगी। इसके चलते सांस के मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। लोगों को आंखों में जलन जैसी समस्या भी हो सकती है। बृहस्पतिवार को अनुमानित अधिकतम मिश्रण गहराई 2650 मीटर रही। वेंटिलेशन इंडेक्स 14500 मीटर प्रति वर्ग सेकंड रहा। सीपीसीबी के अनुसार, बीते 24 घंटे में हवा की गति में इजाफा हुआ है। ऐसे में बृहस्पतिवार को हवा उत्तर-पश्चिम दिशा से 10-15 किलोमीटर प्रति घंटा रही। 
विज्ञापन


मानकों के मुताबिक दिल्ली की हवा में पीएम 10 का स्तर 100 और पीएम 2.5 का स्तर 60 से कम होने पर ही उसे स्वास्थ्यकारी माना जाता है। बृहस्पतिवार शाम चार बजे दिल्ली की हवा में पीएम 10 का स्तर 249 और पीएम 2.5 का स्तर 150.9 पर रहा। प्रदूषक कणों का स्तर मानकों से लगभग तीन गुना ज्यादा बना हुआ है। प्रदूषण और नमी के चलते दिल्ली के वायुमंडल में धुंध और धुएं की परत छाई हुई है। दिल्ली के पालम इलाके में सुबह के समय हल्का कोहरा देखने को मिला। सुबह आठ बजे के लगभग कोहरे और धुंध के चलते दृश्यता का स्तर गिरकर 800 मीटर तक पहुंच गया।
विज्ञापन
विज्ञापन





9 दिनों में बिगड़ी दिल्ली की हवा
अच्छे मानसून के चलते इस बार राजधानी की हवा आमतौर पर साफ-सुथरी रही थी लेकिन बीत नौ दिनों में प्रदूषक कणों में तेजी से इजाफा हुआ है। 13 अक्तूबर को एक्यूआई 189 के अंक पर था। इस स्तर की हवा को मध्यम श्रेणी में रखा जाता है और यह सुरक्षित दायरे में है। इसके बाद से वायु गुणवत्ता सूचकांक में तेजी से इजाफा हुआ है और हवा खराब श्रेणी में पहुंच गई। पिछले तीन दिनों से दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 से ऊपर यानी बेहद खराब श्रेणी में बना हुआ है। दिपावली की शाम हुई आतिशबाजी का धुआं अब भी वायुमंडल में बना हुआ है। हवा की रफ्तार कम होने के चलते प्रदूषक कणों के विसर्जन की गति बेहद धीमी है।

आ रहा नया पश्चिमी विक्षोभ
मौसम विभाग की मानें तो 27 अक्तूबर से नया पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। अब दिल्ली-एनसीआर पर इस पश्चिमी विक्षोभ का क्या असर होगा इस बारे में अपडेट नहीं मिल पाया है। हालांकि उससे पहले 26 अक्तूबर को दिल्ली में बेहद हल्के बादलों की मौजूदगी देखी जा सकती है। इस हफ्ते बारिश की संभावना नहीं है। ऐसे में उम्मीद 27 अक्तूबर से आने वाले नए पश्चिमी विक्षोभ से है।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए 2000 से ज्यादा टीमें कर रही काम : सिरसा
राजधानी की हवा में बृहस्पतिवार को सुधार हुआ। इस दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक में करीब 50 अंकों की कमी आई है। दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बृहस्पतिवार को बताया कि दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए लगभग 2000 टीमें दिन-रात मेहनत कर रही हैं। ऐसे में राजधानी की हवा में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।

सिरसा ने जानकारी दी कि दिल्ली में 376 एंटी-स्मॉग गन, 266 वाटर स्प्रिंकलर और 91 मैकेनाइज्ड स्वीपर चलाए जा रहे हैं, जो जीपीएस ट्रैकिंग से जुड़े हैं। ये उपकरण शहर की सड़कों और प्रदूषण के मुख्य स्रोतों की सफाई और नियंत्रण में मदद कर रहे हैं। सरकार ने प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों पर विशेष ध्यान दिया है। करीब 443 टीमें कूड़ा जलाने पर, 578 टीमें वाहनों से निकलने वाले धुएं पर, और 378 टीमें धूल नियंत्रण पर काम कर रही हैं। 

इसके अलावा 505 मोबाइल प्रॉसिक्यूशन टीमें लगातार गश्त कर रही हैं। पर्यावरण मंत्री ने बताया कि दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए विज्ञान और तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही, आईआईटी कानपुर और मौसम विभाग के सहयोग से जल्द ही क्लाउड सीडिंग भी की जाएगी। सिरसा ने यह भी बताया कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर भी प्रदूषण कम करने का काम किया जा रहा है। 
 

दिल्ली की हवा को प्रदूषित करने में पराली की 1.5 फीसदी भागीदारी
राजधानी की फिजा को प्रदूषित करने में वाहनों के अलावा पराली भी अहम भूमिका अदा करती है। बृहस्पतिवार को वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए उत्सर्जन सहायता प्रणाली के अनुसार, हवा को प्रदूषित करने में पराली की 1.521 फीसदी हिस्सेदारी रही। बृहस्पतिवार तक 12,113 घटनाएं पराली जलाने की सामने आई है। ऐसे में हवा की गति कम होती है और दिशा बदलती है, तो दिल्ली का एक्यूआई गंभीर श्रेणी में पहुंच सकता है। हालांकि पिछले साल के मुकाबले पराली जलाने की घटनाओं में 50 फीसदी तक की कमी आई है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के मुताबिक, देश के छह राज्यों में इस बार अभी तक पराली जलाने की लगभग 1700 घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं। जो कि पिछले साल की तुलना में लगभग पचास फीसदी कम है। आईसीएआर की ओर से जारी बुलेटिन के मुताबिक, इस बार 15 सितंबर से लेकर 21 अक्तूबर तक पराली जलाने की कुल मिलाकर 1729 घटनाएं दर्ज की गई हैं। ये घटनाएं पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली में हुई है। इस बार के रिकॉर्ड के मुताबिक, पंजाब से ज्यादा पराली जलाने की घटनाएं उत्तर प्रदेश में देखने को मिली है। इसकी तुलना अगर पिछले साल से करें तो अब तक पराली जलाने की 3651 घटनाएं दर्ज की जा चुकी थी। ज्ञात हो कि पराली जलने के कारण हा वर्ष राजधानी में प्रदूषण बढ़ जाता है।


बिना जरूरत के घर से बाहर न निकलें, लगाएं डबल मास्क
दिल्ली की फिजा जहरीली हो गई है। हवा इतनी दूषित हो चुकी है कि सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक गंभीर श्रेणी पार कर चुका है। घनी धुंध और धुएं के बीच लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश, सीने में दर्द और सांस लेने में दिक्कत की शिकायतें बढ़ गई हैं। अस्पताल में इस समस्या को लेकर मरीजों की कतारें लगी हैं। ऐसे में डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति आंखों, फेफड़ों और दिल के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है। डॉक्टरों की सलाह है कि जब तक वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं हो जाता डबल मास्क पहनें और बिना जरूरत घर से बाहर निकलने से बचें।

त्योहार के बाद सुबह घनी धुंध और पटाखों के धुएं ने वातावरण को और जहरीला बना दिया। सड़कों पर दृश्यता कम होने के साथ-साथ हवा में बारूद की तीखी गंध स्पष्ट महसूस की जा रही है। इस स्थिति को देखते हुए आरएमएल अस्पताल के मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रमेश मीणा ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग अनिवार्य रूप से करें। यह जहरीली हवा बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए विशेष रूप से हानिकारक है। उन्होंने बताया कि लोग अपने घरों में रहें, साफ हवा के लिए पौधे लगाएं और किसी भी स्वास्थ्य समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

प्रदूषण से बचाव के उपाय

  • मास्क का उपयोग: बाहर निकलते समय एन-95 या समकक्ष मास्क जरूर पहनें
  • घर में रहें: गैर-जरूरी काम से बचें, खासकर सुबह और शाम के समय जब प्रदूषण का स्तर अधिक होता है
  • हवा की गुणवत्ता जांचें: एक्यूआई स्तर की जानकारी के लिए नियमित रूप से अपडेट्स देखें
  • स्वास्थ्य देखभाल: सांस लेने में तकलीफ या अन्य लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें
  • वायु शुद्धिकरण: घरों में वायु शुद्धिकरण उपकरणों का उपयोग करें और हवा को साफ रखने के लिए पौधे लगाएं
  • खान-पान: रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के लिए मौसमी फल का सेवन करें और मीठा खाने से बचें
     
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed