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Delhi: पीएम 2.5 स्तर को कम आंक रही दिल्ली की प्रदूषण पूर्वानुमान प्रणाली, शोधकर्ताओं ने आंकड़ों को बताई वजह

Wed, 08 Oct 2025 10:29 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Wed, 08 Oct 2025 10:29 PM IST
सार

Delhi Pollution News: दिल्ली में हवा की गुणवत्ता चेतावनी प्रणाली पीएम2.5 के स्तर को 30 से 35 प्रतिशत तक कम बताती है, क्योंकि यह पुराने उत्सर्जन डेटा पर निर्भर है। शोधकर्ताओं ने यह जानकारी दी है।

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Delhi Pollution PM2-5 estimates still 30-35 per cent low
दिल्ली प्रदूषण - फोटो : पीटीआई

विस्तार

काउंसिल ऑन एनर्जी, एन्वायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) के शोधकर्ताओं का कहना है कि उत्सर्जन के पुराने आंकड़े (इमीशन इन्वेंटरी) के कारण दिल्ली की वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (एक्यूईडब्ल्यूएस) पीएम-2.5 स्तर के आकलन में 30-35 फीसदी तक की त्रुटि दिखाती है। बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने इमीशन इन्वेंटरी को हर दो-तीन वर्ष में अपडेट करने की जरूरत बताई। इसके बावजूद पिछले दो वर्षो के दौरान एक्यूईडब्ल्यूएस 80 फीसदी से ज्यादा सटीकता के साथ बहुत खराब और गंभीर श्रेणी के वायु प्रदूषण (300 से अधिक एक्यूआई) का पूर्वानुमान करने में सफल रही है।

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बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम में शोधकर्ताओं का कहना है कि पुराने उत्सर्जन डेटा के कारण यह प्रणाली पीएम-2.5 के स्तर को 30-35 फीसदी तक कम आंक रही है। उदाहरण के तौर पर, यदि वास्तविक पीएम 2.5 स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है, तो सिस्टम इसे केवल 65 माइक्रोग्राम दर्शाता है। सीईईडब्ल्यू के शोधकर्ता मोहम्मद रफीउद्दीन ने बताया कि दिल्ली के लिए उत्सर्जन डेटा 2021 से अपडेट नहीं हुआ है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 2016 से पुराना है।
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उन्होंने अमेरिका और चीन की तर्ज पर हर दो-तीन साल में उत्सर्जन सूची को अपडेट करने की जरूरत पर जोर दिया। इससे न केवल पूर्वानुमानों की सटीकता बढ़ेगी, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लिए तत्काल एक आधुनिक उत्सर्जन डेटाबेस तैयार किया जाए। यह प्रणाली न केवल भविष्य के प्रदूषण स्तर की भविष्यवाणी करेगी, बल्कि बीते वर्षों की वायु गुणवत्ता का सटीक विश्लेषण भी प्रदान करेगी।

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ग्रीन पटाखों से प्रदूषण नहीं बढ़ेगा : वीरेंद्र सचदेवा
नई दिल्ली। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने बुधवार को आरोप लगाया कि 11 वर्षों में आप सरकार ने दिल्ली में हिंदू समाज के त्योहारों को रोकने व धार्मिक भावनाओं को आहत करने का काम किया। पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर जहां दीपावली की खुशियों को सीमित किया गया।

वहीं, छठ जैसे महापर्व को नदी किनारे मनाने से रोककर लाखों पूर्वांचलवासियों की आस्था का अपमान किया। भाजपा सरकार परंपराओं का सम्मान करते हुए ग्रीन पटाखों के माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। ग्रीन पटाखों से न तो दिल्ली में प्रदूषण बढ़ेगा और न ही धार्मिक भावनाएं आहत होंगी। हमारा लक्ष्य है कि दिल्लीवासी इस बार खुशियों से जगमगाती दीपावली को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में मना सकें।

डीपीसीसी ने लाल श्रेणी के उद्योगों की जांच के लिए उठाया कदम
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले लाल श्रेणी के उद्योगों पर नकेल कसने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। डीपीसीसी ने इन उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियों के मूल्यांकन और प्रमाणन के लिए सरकारी व निजी एजेंसियों से बोलियां मांगी हैं।

चयनित एजेंसियां लाल श्रेणी के उद्योगों का निरीक्षण करेंगी व प्रदूषण नियंत्रण उपायों की पर्याप्तता रिपोर्ट तैयार करेंगी। यह रिपोर्ट सुनिश्चित करेगी कि उद्योगों में अपशिष्ट उपचार संयंत्र, वायु प्रदूषण फिल्टर और अपशिष्ट प्रबंधन प्रक्रियाएं पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप हैं या नहीं। डीपीसीसी के एक अधिकारी ने बताया कि ताप विद्युत संयंत्र, सीमेंट कारखाने और चमड़ा उद्योग अत्यधिक प्रदूषणकारी होते हैं। इनके लिए सख्त निगरानी और नियमन जरूरी है। 

इस प्रक्रिया में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) या एनएबीएल-मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में नमूनों का विश्लेषण शामिल होगा। आवेदन करने वाली एजेंसियों को दिल्ली या एनसीआर में स्थित होना चाहिए। साथ ही, उनके पास कम से कम पांच वर्ष का अनुभव और पांच योग्य वैज्ञानिक या तकनीकी कर्मचारी होने चाहिए। निजी शोध संस्थानों के लिए 10 करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार अनिवार्य है।

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