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Delhi Pollution: सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था दुरुस्त हो तो दिल्लीवालों का नहीं घुटेगा दम, जानें एक्सपर्ट की राय

Fri, 29 Nov 2024 07:40 AM IST
अनुज कुमार आशीष सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशीष सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Fri, 29 Nov 2024 07:40 AM IST
सार

स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी लोगों से खराब हवा के संपर्क में आने से बचने और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने को कहा है। लेकिन, सार्वजनिक परिवहन की स्थिति लचर है। दिल्ली में लगभग 89 लाख वाहन हैं। इनमें 80 फीसदी निजी और 20 प्रतिशत सार्वजनिक वाहन हैं।

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Delhi Pollution If public transport system is in order
वायु प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी में हवा बेहद खराब है। प्रदूषित हवा में लोगों का दम घुट रहा है। इससे स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा भी प्रभावित हो रही है। प्रदूषण को कम करने की जिम्मेदारी जिन विभाग और एजेंसियों के पास है वह बेखबर हैं। हर साल प्रदूषण का मुद्दा आता है और जल्द ही ठंडे बस्ते में चला जाता है। ऐसे में प्रदूषण का अजगर पूरे वर्ष काल बनकर लोगों की सांसों को संकट डाल रहा है।
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विशेषज्ञ कहते हैं कि पूरे वर्ष पराली का धुआं नहीं बल्कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी सबसे अधिक रहती है। ऊर्जा और संसाधन संस्थान (टेरी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, पीएम2.5 उत्सर्जन में परिवहन क्षेत्र का बड़ा हिस्सा है, जो कुल उत्सर्जन का 39 फीसदी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में सुधार कर दिया जाए तो प्रदूषण के चलते सांसों के संकट को कम किया जा सकता है।
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इनके अलावा रोज लगभग पांच लाख से अधिक वाहन अन्य राज्यों से यहां आते हैं। मुख्य रूप से पेट्रोल और सीएनजी पर चलने वाले दोपहिया और तिपहिया वाहन, पार्टिकुलेट मैटर, कार्बन मोनोऑक्साइड और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों को उत्पन्न करते हैं। डीजल से चलने वाले ट्रक और बसें नाइट्रोजन ऑक्साइड के प्राथमिक स्रोत हैं, जबकि सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जन अपेक्षाकृत कम है।
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सार्वजनिक परिवहन को बढ़ाने की जरूरत
परिवहन दिल्ली के प्रमुख प्रदूषणकारी क्षेत्रों में से एक है। हालांकि, दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के लिए कई नीतियां और प्रयास लागू किए गए हैं। मसलन, ई-बसों के बेड़े का विस्तार, एग्रीगेटर नीति आदि। लेकिन, परिवहन क्षेत्र में प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए और अधिक कदम उठाने की आवश्यकता है। सीईईडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार, मैदानी क्षेत्रों में छोटी दूरी के मार्गों पर 12 मीटर और 9 मीटर लंबी गैर-एसी इलेक्ट्रिक बसों का संचालन आर्थिक रूप से व्यवहार्य है। ऐसे विश्लेषणों के आधार पर सार्वजनिक परिवहन मार्गों की लंबाई का अनुकूलन करके शहर परिवहन क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन को प्रभावी रूप से घटाया जा सकता है।-अभिषेक कर, सीनियर प्रोग्राम लीड, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू)

2.70 लाख वाहनों के चालान
ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले 2.70 लाख से ज्यादा वाहनों को इस साल 31 अक्तूबर तक ट्रैफिक चालान जारी किए गए हैं। ये वाहन वैध प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी ) प्रमाणपत्र के बिना राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर चलते पाए गए हैं। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने इस साल बिना वैध पीयूसी सर्टिफिकेट वाले वाहनों के 2.70 लाख चालान काटे हैं, जो पिछले तीन सालों में सबसे ज्यादा है। 2023 में बिना वैध पीयूसी सर्टिफिकेट वाले वाहनों की संख्या 2.32 लाख थी। 2022 में यह संख्या और भी कम यानी 1.64 लाख थी।

15 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वाहन प्रतिबंधित
दिल्ली में वित्तीय वर्ष 2021-22 की तुलना में वाहनों की संख्या में वर्ष 2022-23 में 0.34 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 31 मार्च 2023 तक दिल्ली में कुल वाहनों की संख्या 79.45 लाख थी। दिल्ली सरकार ने 10 वर्ष के डीजल और 15 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वाहनों को प्रतिबंधित कर दिया है। वर्ष 2022-23 तक 62,59,214 वाहनों का पंजीकरण रद्द कर दिया। वहीं, वर्ष 2022-23 के दौरान प्रति 1000 की आबादी पर वाहनों की संख्या 473 रही, जबकि वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा 472 था।


चलेंगी बसें से तो कम होगा प्रदूषण
सीएनजी के बढ़ते उपयोग के बावजूद समस्या बनी हुई है। दिल्ली में 72% बसें सीएनजी पर चलती हैं, 17% कार सीएनजी का उपयोग करती हैं। तिपहिया और एलसीवी पूरी तरह से सीएनजी में परिवर्तित हो चुके हैं। वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन को बढ़ाने और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाने की आवश्यकता है।  -शिवानी शर्मा, एसोसिएट फेलो, टेरी

बीते सात दिनों में वाहन प्रदूषण की हवा में हिस्सेदारी
23 नवंबर    16.423%
24 नवंबर    18.155%
25 नवंबर    16.591%
26 नवंबर    21.363%
27 नवंबर    24.617%
28 नवंबर    21.61%
29 नवंबर    21.408%
(नोट : यह आंकड़ें डिसिजन स्पोर्ट सिस्टम के हैं)

अलग-अलग क्षेत्र का दिल्ली के प्रदूषण में हिस्सा
वाहन  हिस्सा (प्रतिशत)
परिवहन      39.09
उद्योग      22.31
बिजली संयंत्र     3.09
रिहायशी     5.73
तेज हवाएं   18.05
अन्य  11.73
कुल   100
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