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Ganesh Chaturthi: यमुना और जलाशयों में मूर्ति विसर्जन पर रोक, 50 हजार रुपये जुर्माना या छह साल तक की होगी सजा
Wed, 31 Aug 2022 12:18 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 31 Aug 2022 12:18 PM IST
सार
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने स्थानीय निकायों से भी आवासीय क्षेत्रों के समीप कृत्रिम तालाब बनाने के लिए कहा है। साथ ही दिल्ली पुलिस को जांच के निर्देश दिए गए हैं कि वह प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियों को ले जाने वाले वाहनों पर नजर रखे।
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यमुना नदी
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
इस साल गणेशोत्सव और दुर्गा पूजा पर यमुना या अन्य जलाशयों में मूर्ति विसर्जन करना महंगा पड़ सकता है। ऐसा करने पर 50 हजार रुपये जुर्माना या फिर छह साल तक की सजा हो सकती है। इस संबंध में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति(डीपीसीसी) ने सभी जिलाधिकारियों को आदेश कर नियमों का पालन सुनिश्चित करवाने के लिए कहा है।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने स्थानीय निकायों से भी आवासीय क्षेत्रों के समीप कृत्रिम तालाब बनाने के लिए कहा है। साथ ही दिल्ली पुलिस को जांच के निर्देश दिए गए हैं कि वह प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियों को ले जाने वाले वाहनों पर नजर रखे।
नगर निकायों को सभी जोन को निर्देश जारी करते हुए अवैध मूर्ति निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है। डीपीसीसी ने कहा है कि मूर्ति विसर्जन गंभीर समस्याएं पैदा करता है। क्योंकि, मूर्ति में इस्तेमाल किए जाने वाले जहरीले रसायन पानी में रहने वाले जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचाते हैं।
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मूर्तियों पर लगाए जाने वाले रंगों में खतरनाक केमिकल पारा, जिंक ऑक्साइड, क्रोमियम, सीसा व कैडमियम जैसे रसायन होते हैं। यह जीव जंतुओं को नुकसान पहुंचाता है। साथ ही बाद में मनुष्यों के सेवन करने के बाद कैंसर व श्वसन संबंधी बीमारियों और त्वचा संक्रमण सहित अन्य बीमारियों का कारण बन सकता है।
डीपीसीसी ने कहा है कि 31 अगस्त को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी और नौ सितंबर को विसर्जन होगा। बता दें कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण(एनजीटी) द्वारा यमुना में मूर्ति विसर्जन पर रोक है। वहीं, दिल्ली सरकार ने साल 2019 में इस संबंध में पहली बार निर्देश जारी करते हुए रोक लगाई थी।
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दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने स्थानीय निकायों से भी आवासीय क्षेत्रों के समीप कृत्रिम तालाब बनाने के लिए कहा है। साथ ही दिल्ली पुलिस को जांच के निर्देश दिए गए हैं कि वह प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियों को ले जाने वाले वाहनों पर नजर रखे।
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नगर निकायों को सभी जोन को निर्देश जारी करते हुए अवैध मूर्ति निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है। डीपीसीसी ने कहा है कि मूर्ति विसर्जन गंभीर समस्याएं पैदा करता है। क्योंकि, मूर्ति में इस्तेमाल किए जाने वाले जहरीले रसायन पानी में रहने वाले जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचाते हैं।
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मूर्तियों पर लगाए जाने वाले रंगों में खतरनाक केमिकल पारा, जिंक ऑक्साइड, क्रोमियम, सीसा व कैडमियम जैसे रसायन होते हैं। यह जीव जंतुओं को नुकसान पहुंचाता है। साथ ही बाद में मनुष्यों के सेवन करने के बाद कैंसर व श्वसन संबंधी बीमारियों और त्वचा संक्रमण सहित अन्य बीमारियों का कारण बन सकता है।
डीपीसीसी ने कहा है कि 31 अगस्त को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी और नौ सितंबर को विसर्जन होगा। बता दें कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण(एनजीटी) द्वारा यमुना में मूर्ति विसर्जन पर रोक है। वहीं, दिल्ली सरकार ने साल 2019 में इस संबंध में पहली बार निर्देश जारी करते हुए रोक लगाई थी।