Delhi Diwali: पटाखे बेचने का लाइसेंस बांट रही है पुलिस... लेने वाले कम, इस कारण कम बिक रही है हरित आतिशबाजी
जानकारों का कहना है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट का ग्रीन पटाखों पर निर्णय देर से आया है। ऐसे में जहां इसे सीमित मात्रा में बनाया गया है, वहीं अब इन्हें बेचने का वक्त भी कम बचा है।
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पुलिस दिल्ली में पटाखे बेचने वालों को बुलाकर लाइसेंस दे रही है लेकिन कम ही लोग ग्रीन पटाखे बेचने में रुचि दिखा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट का ग्रीन पटाखों पर निर्णय देर से आया है। ऐसे में जहां इसे सीमित मात्रा में बनाया गया है, वहीं अब इन्हें बेचने का वक्त भी कम बचा है। दिल्ली पुलिस ने प्रतिबंधित पटाखे चलाने वालों को पकड़ने के लिए हर थाने में पुलिस टीम बनाई है।
दिल्ली पुलिस के रोहिणी जिले में शनिवार शाम तक 12 लोगों ने लाइसेंस लिया था। सूत्रों की माने तो इन्हें भी पुलिस ने संदेश देकर बुलाया और कहा कि ग्रीन पटाखे बेचने का लाइसेंस ले लो। इनमें से दो लोगों को शनिवार शाम तक ग्रीन पटाखे तक नहीं मिले थे। रोहिणी जिला पुलिस उपायुक्त राजीव रंजन ने बताया कि इस बार पटाखे बेचने का लाइसेंस लेने वाले लोगों की संख्या बहुत ही कम है। शाहदरा जिले में शनिवार शाम तक 30 लोगों ने आवेदन किया, जिनमें से 26 को लाइसेंस दिया गया। चार लोगों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया चल रही है।
दिल्ली पुलिस की लाइसेंसिंग यूनिट के संयुक्त पुलिस आयुक्त एबी देशपांडेय ने बताया कि दिल्ली पुलिस 600 किलो तक पटाखे बेचने वालों को लाइसेंस देती है। इससे ज्यादा के लिए केंद्र सरकार से अनुमति लेने होती है। संयुक्त पुलिस आयुक्त ने बताया कि लाइसेंसिंग यूनिट के पास पटाखों के लाइसेंस लेने वाले 13 लोग थे। इन लोगों को लाइसेंस दे दिया है। इन्हीं लोगों ने वर्ष 2022 में सुप्रीम कोर्ट के पटाखों पर प्रतिबंध लगाने से पहले आवेदन किया था। प्रतिबंध लगाने के कारण उनको लाइसेंस नहीं दिया गया था, अब दे दिया गया है।
शनिवार शाम तक लाइसेंस का लेखा-जोखा
- पटाखे बचने के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन आए- 156
- इन लोगों को दिया गया लाइसेंस - 103
- इन लोगों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया चल रही है - 56
- लाइसेंसिंग यूनिट ने स्थायी लाइसेंस दिया - 13
प्रतिबंधित पटाखे बेचने वालों को पकड़ने के लिए हर थाने में पुलिस टीम
दिल्ली पुलिस ने प्रतिबंधित पटाखे बेचने वालों को पकड़ने के लिए हर थाने में एक-एक पुलिस टीम बनाई है। बीट स्टाफ को भी इलाके में रहने के लिए कहा गया है। सभी जिला प्रमुख डीसीपी समेत अफसरों को गश्त करने और पटाखों पर सुप्रीम आदेश का पालन करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। संयुक्त पुलिस आयुक्त एबी देशपांडेय ने बताया कि प्रतिबंधित पटाखे बेचने व चलाने वालों के खिलाफ सर्वोच्च अदालत के निर्देशों के तहत विस्फोटक अधिनियम व बीएनएस की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
दीपावली पर दिल्ली-एनसीआर में 40 फीसदी बढ़ेगा पटाखों का इस्तेमाल
सुप्रीम कोर्ट के हरित (ग्रीन) पटाखों की अनुमति दिए जाने के बाद दिल्ली-एनसीआर में इस दिवाली पटाखों का इस्तेमाल 40 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसका अंदेशा लोकल सर्कल्स की ओर से एक हालिया अध्ययन के बाद जताया गया है। अध्ययन में बताया गया कि दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद के 38 हजार से ज्यादा लोगों से बातचीत में यह निष्कर्ष निकाला गया है। इनमें से आधे केवल हरित जबकि शेष हरित के साथ सामान्य (परंपरागत) पटाखे जलाने की बात कर रहे हैं।
अध्ययन में यह आशंका भी जताई जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बावजूद परंपरागत पटाखों की अवैध बिक्री और इस्तेमाल बढ़ेगा। पिछले साल जब पूरी तरह से पटाखों पर प्रतिबंध था, तब भी लोगों ने नियम तोड़ते हुए पटाखे जलाए थे। इससे दिवाली के बाद वायु प्रदूषण में भारी वृद्धि हुई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल हरित पटाखों की अनुमति के चलते उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान जैसे आसपास के राज्यों से परंपरागत पटाखों की तस्करी दिल्ली-एनसीआर में हो सकती है, जिससे वायु प्रदूषण की स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।
सीएसआईआर-नीरी से प्रमाणित क्यूआर कोड पटाखों को ही अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्तूबर को एक आदेश में दिल्ली-एनसीआर में 18 से 20 अक्तूबर तक हरित पटाखों की बिक्री और उपयोग की इजाजत दी थी। उन्हीं पटाखों को जलाने की अनुमति दी गई, जिन पर सीएसआईआर-नीरी की ओर से प्रमाणित क्यूआर कोड हो। इन पटाखों को सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे के बीच ही फोड़ा जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि कोर्ट ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना त्योहार मनाने का संतुलन बनाने की कोशिश की है। न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ निर्देश दिए कि नियमों का उल्लंघन करने पर लाइसेंस रद्द किया जा सकता है और सख्त कार्रवाई की जाएगी।