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Delhi: एयरफोर्स अफसर बनकर व्यापारियों को बनाते शिकार, पुलिस ने साइबर ठग गिरोह का किया पर्दाफाश, चार दबोचे
Fri, 08 May 2026 12:53 PM IST
Vijay Singh Pundir
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vijay Singh Pundir
Updated Fri, 08 May 2026 12:53 PM IST
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Delhi police
- फोटो : फाइल फोटो
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दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने वायुसेना के अधिकारी बनकर ठगी करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश कर चार आरोपियों को दबोचा है। इनमें मनीष (22) बुलंदशहर, कौशल (22) अलीगढ़, आमिर उर्फ बुरहान (24) और रिजवान अहमद (30) दोनों नूंह के रहने वाले हैं। आरोपियों ने पीड़ित एल्युमिनस लैटेराइट की सप्लाई के बहाने 5,06,415 रुपये ठगे थे। गिरोह का नेटवर्क दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैला था।
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अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम ने बताया कि शाखा की आईएससी को शिकायत मिली थी कि कुछ अज्ञात लोगों ने भारतीय वायु सेना के अधिकारी बनकर उसके साथ ठगी की है। आरोपियों ने शिकायतकर्ता को एक जाली परचेज ऑर्डर (खरीद आदेश) के आधार पर एल्युमिनस लैटेराइट (इंडस्ट्रियल ग्रेड 40–45 प्रतिशत) की सप्लाई करने के लिए उकसाया। यह परचेज ऑर्डर कथित तौर पर वायु सेना की ओर से जारी किया गया था। सामान को वायु सेना स्टेशन भेजने के बाद शिकायतकर्ता से वेंडर रजिस्ट्रेशन (विक्रेता पंजीकरण) के बहाने पैसे जमा करने के लिए कहा गया। ठगों ने झूठा दावा किया कि शिकायतकर्ता एक स्वीकृत वेंडर के तौर पर लिस्टेड नहीं है। कुछ गड़बड़ होने का शक होने पर, शिकायतकर्ता ने पुलिस से संपर्क किया। सामान की धोखाधड़ी वाली सप्लाई के कारण शिकायतकर्ता को 5,06,415 रुपये का नुकसान हुआ। मामला दर्जकर पुलिस टीम ने जांच शुरू की।
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बुलंदशहर, यूपी से खरीदे थे
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि इंस्पेक्टर कमल कुमार यादव व एसआई आशीष शर्मा को तकनीकी विश्लेषण से पता लगा कि ठगी को अंजाम देने में इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश से लिए गए थे लेकिन उन्हें हरियाणा के नूंह जिले में स्थित कुछ तय/स्थिर जगहों से ऑपरेट किया जा रहा था। इससे यह संकेत मिला कि इस रैकेट को नूंह में बैठे साइबर ठग चला रहे थे।
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ऐसे गिरफ्तार किया गया
पुलिस टीम को जांच में सिम कार्डों के मालिक मनीष और कौशल का पता लगाया। दोनों को उनके शहर से दबोचा गया। बुरहान उर्फ आमिर और रिजवान अहमद को नूंह से उठाया गया। आरोपियों ने खुलासा किया कि कई सिम कार्ड मनीष व कौशल समेत अलग-अलग लोगों के नाम लिए गए थे। इनके बाद उन्हें बुरहान उर्फ आमिर और रिजवान को दे दिया गया था। बाद में इन्हें जालसाजों को दे दिया गया।
कई मामलों में शामिल रहा है
बुरहान और रिज़वान ने खुलासा किया कि नूंह के दूरदराज के इलाकों में बड़ी संख्या में युवा साइबर अपराध की गतिविधियों में शामिल हैं। आरोपियों ने आगे बताया कि उन्होंने साथियों को करीब 30 सिम कार्ड (1,500 प्रति सिम कार्ड की दर से) और छह बैंक खाते (6,000 रुपये प्रति खाते की दर से) उपलब्ध कराए थे। बाकी बचे आरोपियों को पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी और तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं। आरोपी रिजवान 2016 में पलवल, हरियाणा में दर्ज हत्या की कोशिश के एक मामले में शामिल पाया गया है।