इंस्पेक्टर ने किया दिल्ली पुलिस को शर्मसार
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दिल्ली पुलिस के एक इंस्पेक्टर के काम-काज के तरीके से पूरे महकमे को शर्मसार किया है। हत्या जैसे संगीन मामले की जांच कर रहे इंस्पेक्टर पर साक्ष्य नष्ट करने के आरोप लगे हैं।
अदालत ने जांच अधिकारी इंस्पेक्टर के खिलाफ संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करने व आईपीएस स्तर के अधिकारी से जांच करवाने का निर्देश दिल्ली पुलिस आयुक्त को दिया है। मामला 30-31 मार्च की देर रात पूर्वी दिल्ली के जगतपुरी इलाके में हुई एक हत्या से जुड़ा है।
कड़कड़डूमा जिला अदालत के एसीएमएम सुनील बेनीवाल ने शाहदरा जिले की अन्वेषण यूनिट (डीआईयू) के इंस्पेक्टर एके सिंह के खिलाफ साक्ष्य मिटाने के आरोप में संबंधित धारा 201 आईपीसी में मुकदमा दर्ज करने व आईपीएस अधिकारी को जांच सौंपने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस मामले में पुलिस आयुक्त को 22 सितंबर तक अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
जानबूझकर की थी छेड़छाड़
अदालत ने 12 सितंबर के अपने आदेश में कहा कि कोर्ट का मानना है हैंड वॉश सैंपल जैसे अहम सबूत के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई या छेड़छाड़ होने दी गई जिससे हत्या के मामले में एक अहम सबूत नष्ट हो गया।
इसलिए साक्ष्य नष्ट करने संबंधी धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच की जाए कि हैंड वॉश सैंपल में कैसे छेड़छाड़ की गई और इसके लिये कौन जिम्मेदार था। इस दौरान इंस्पेक्टर एके सिंह की भूमिका की जांच विशेष तौर पर की जाए।
अदालत ने उक्त निर्देश हत्या के मामले में इंस्पेक्टर सिंह द्वारा पूरक आरोप पत्र पेश करने के दौरान दिया। पूरक आरोप पत्र के साथ इंस्पेक्टर ने हैंड वॉश सैंपल की सीएफएसएल और पॉलीग्राफ टेस्ट की रिपोर्ट भी पेश की थी।
अदालत ने इस बात पर गौर किया कि हैंड वॉश सैंपल एकमात्र ऐसा सबूत था जिससे यह पता चलता कि मृतक ने खुदकुशी की थी या उस पर आरोपी ने गोली चलाई थी। पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान भी एके सिंह ने गवाह से केवल पांच सवाल पूछे जबकि आम तौर पर ऐसा नहीं होता।
अदालत ने एके सिंह के तौर-तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच अधिकारी ने इस मामले में 90वें दिन चार्जशीट पेश की और वह भी ड्यूटी एमएम के समक्ष और वह उस दिन जब यह कोर्ट अवकाश पर थीं।
क्या था मामला
कांस्टेबल संजीव ने दर्ज कराई एफआईआर में बताया कि उसकी ड्यूटी जगतपुरी थाने में थी। एफआईआर के मुताबिक, कांस्टेबल संजीव ने देखा कि 30 मार्च 2014 की देर रात 1 बजे जगतपुरी के अर्जुन नगर स्थित पंजाब नेशनल बैंक के पास राजीव चौधरी और अनूप सहगल स्कॉर्पियो कार से उतरकर सर्विस रोड पर बात करने लगे।
इसी दौरान दोनों के बीच गरमा गर्मी हुई और अचानक राजीव ने अपनी रिवाल्वर से अनूप की कनपटी पर गोली चला दी। अनूप गिर गया और मैं उसे संभालने लगा तो राजीव रिवाल्वर व स्कॉर्पियो लेकर फरार हो गया। अनूप को जीटीबी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस मामले में जांच अधिकारी रहे डीआईयू के इंस्पेक्टर एके सिंह ने आरोपी को हत्या के आरोप से क्लीन चिट देते हुए उसे केवल आर्म्स एक्ट में आरोपी बनाते हुए चार्जशीट दी थी। जांच अधिकारी ने अपनी राय जाहिर करते हुए इस मामले को हत्या के बजाय खुदकुशी का बताया, जबकि कांस्टेबल ने खुद आरोपी राजीव चौधरी को गोली चलाते हुए देखा था।