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ऑयल खरीदवाकर बिकवाने के नाम पर नाइजीरियाई गिरफ्तार, लोगों से ठग चुका था डेढ़ करोड़
Fri, 14 Jun 2019 05:57 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Fri, 14 Jun 2019 05:57 AM IST
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आरोपी नाइजीरियन गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट ने बहुत ही अनोखे तरीके से ठगी करने वाले नाइजीरियाई गिल्बर्ट ओकोय पेड्रो (39) को गिरफ्तार किया है। आरोपी ऑयल को सस्ते में खरीदवा कर महंगे दामों में बिकवाने के नाम पर ठगी करता था। यूनिट के पास दो पीड़ित सामने आ चुके हैं। आरोपी इन पीड़ितों से डेढ़ करोड़ रुपये ठग चुका है। एक पीड़ित से 1.25 करोड़ व दूसरे से 25 लाख रुपये ठगे हैं। यूनिट के पुलिस अधिकारियों को आशंका है कि आरोपी वर्ष 2010 से ठगी कर रहा है। आरोपी गिल्बर्ट को ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार किया गया।
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साइबर क्राइम यूनिट के डीसीपी अन्येष राय ने बताया कि तमिलनाडु निवासी तिरूमल एस. प्रशांत ने यूनिट में शिकायत दर्ज कराई थी कि एक व्यक्ति गिल्बर्ट ने उससे संपर्क साधकर कहा कि वह घाना स्थित एनिमल वेलफेयर जूलॉजिकल लि. का प्रवक्ता है। आरोपी ने शिकायतकर्ता को भारत से घाना के लिए हर्बल टीकाकरण उत्पाद (फोलिनिक बी-12 ऑयल) भिजवाने के व्यवसाय का प्रस्ताव दिया। ये ऑयल घाना में जानवरों को टीका लगाने के काम आता है। यह ऑयल भारत में ही होता है और महावीर हर्बल प्राइवेट लि., असम ही बेचती है।
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भारत में ये ऑयल बहुत ही सस्ते दामों पर मिलता है। गिल्बर्ट ने पीड़ित से कहा कि यदि वह संबंधित कंपनी से ऑयल खरीदकर उसे बेचता है तो उसे काफी मुनाफा होगा। इसके बाद शिकायतकर्ता ने गिल्बर्ट व महावीर हर्बल से मोबाइल व ई-मेल के जरिये संपर्क साधना शुरू दिया। गिल्बर्ट प्रशांत से 45 लाख रुपये में एक लीटर ऑयल खरीदने को तैयार हो गया। ये ऑयल उसे महावीर हर्बल से 25 लाख रुपये में मिलता। शिकायतकर्ता से आरोपी गिल्बर्ट कनॉट प्लेस में मिला। इसके बाद आरोपी पांच मिलीलीटर ऑयल टेस्टिंग के लिए खरीदने को तैयार हो गया। आरोपी ने 86 हजार देकर प्रशांत से टेस्टिंग के लिए ऑयल खरीद लिया। इससे प्रशांत को विश्वास हो गया आरोपी सही व्यक्ति है।
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इसके बाद आरोपी ने प्रशांत से एक लीटर ऑयल खरीदने की बात कही। प्रशांत ने महावीर हर्बल से 25 लाख रुपये देकर एक लीटर ऑयल खरीद लिया। इसके बाद आरोपी ने एस. प्रशांत का फोन उठाना बंद कर दिया। शिकायतकर्ता को कुछ संदेह हुआ और उसने ऑयल का डिब्बा खोलकर देखा तो उसमें सिर्फ शहद था। ठगी का एहसास होने पर शिकायतकर्ता ने इसकी शिकायत साइबर क्राइम यूनिट में की। एसीपी आदित्य गौतम की देखरेख में एसआई विजेन्द्र, एसआई अवधेश व प्रभात की टीम ने जांच शुरू की। इस टीम ने जांच के बाद आरोपी गिल्बर्ट को ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार कर लिया। इसके कब्जे से पांच मोबाइल फोन, एक लैपटॉप पासपोर्ट बरामद किया गया।
भारत से कभी वापस नहीं गया
आरोपी गिल्बर्ट वर्ष 2010 में बिजनेस वीजा पर भारत आया था। इसके बाद से ही ये भारत में ही रह रहा था। इसने भारत में कपड़ों का व्यवसाय शुरू किया, मगर इस व्यवसाय में घाटा हो गया। इसे कंप्यूटर व इंटरनेट की अच्छी जानकारी थी। सोशल मीडिया के जरिए ये कुछ जालसाजी करने वालों के संपर्क में आया और पूरे भारत में ठगी करने लगा।
ठगी का ये तरीका मकाऊ में सबसे पहले शुरू हुआ
आरोपी ने बताया कि ठगी का ये तरीका से सबसे पहले मकाऊ में शुरू हुआ था। गिल्बर्ट मकाऊ में ठगी करने वालों में से एक था। इसके बाद इसने भारत में इस तरीके से ठगना शुरू किया।
ठगी का ये तरीका मकाऊ में सबसे पहले शुरू हुआ
आरोपी ने बताया कि ठगी का ये तरीका से सबसे पहले मकाऊ में शुरू हुआ था। गिल्बर्ट मकाऊ में ठगी करने वालों में से एक था। इसके बाद इसने भारत में इस तरीके से ठगना शुरू किया।
बेचने व खरीदने वाली कोई कंपनी नहीं थी
आरोपी ने पूछताछ में बताया कि ऑयल बेचने व खरीदने वाली कोई कंपनी नहीं है। आरोपी ने खुद ही कंपनी बनाई थी। वह शुरू में पीड़ित से थोड़ा ऑयल खरीदवाता था और पीड़ित को कुछ पैसे देकर ऑयल खरीद लेता था। ऐसा कर वह पीड़ित का विश्वास जीत लेता था। इसके बाद ये एक लीटर ऑयल खरीदवा लेता था और पीड़ित से मोटी रकम ले लेता था। इसके बाद ये गायब हो जाता था। आरोपी पीड़ित को बताता था कि फला कंपनी ऑयल बेचती है, जबकि इस तरह की कोई कंपनी नहीं होती थी। उसी के लोग ऑयल के नाम पर शहद बेचते थे। ऑयल खरीदने वाली भी कोई कंपनी नहीं होती थी। आरोपी खुद खरीदने का बात कहता था। इस तरह आरोपी कई लोगों के साथ ठगी कर चुका है।
ठगी के पैसों से व्यवसाय करते थे
आरोपी पीड़ितों से विभिन्न बैंक खातों में पैसा जमा करवाता था। पैसा जमा होते ही मुंबई व बंगलूरू से एटीएम के जरिये निकाल लिए जाते थे। इन पैसों से आरोपी भारत में कपड़े खरीदते थे और फिर नाइजीरिया भेज देते थे। नाइजीरिया भेजने से उन्हें मुनाफा होता था।
ठगी के पैसों से व्यवसाय करते थे
आरोपी पीड़ितों से विभिन्न बैंक खातों में पैसा जमा करवाता था। पैसा जमा होते ही मुंबई व बंगलूरू से एटीएम के जरिये निकाल लिए जाते थे। इन पैसों से आरोपी भारत में कपड़े खरीदते थे और फिर नाइजीरिया भेज देते थे। नाइजीरिया भेजने से उन्हें मुनाफा होता था।