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बेपरवाह पुलिस को नहीं है किसी की जान की फिक्र
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 23 Jan 2014 08:52 PM IST
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पुलिस की कार्यशैली हमेशा से ही सवालों के घेरे में रही है। लेकिन हद तो तब हो गई जब सीमा विवाद के नाम पर दिल्ली पुलिस और जीआपी के जवान भिड़ गए।
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दिल्ली के मोती नगर इलाके में एक अधेड़ की संदिग्ध हालत में मौत पर स्थानीय थाने की पुलिस इसे ट्रेन हादसा बताती रही, वहीं रेलवे पुलिस (जीआरपी) इसे हत्या बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
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सीमा विवाद में शव तीन घंटे तक घटनास्थल पर पड़ा रहा। परिवार वालों के हंगामा करने के बाद आला अधिकारियों ने मामले में हस्तक्षेप किया और मोती नगर थाने की पुलिस को मामले की जांच सौंप दी।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक गांव बसईया जिला अंबेडकर नगर निवासी धीरेंद्र प्रताप सिंह (46) प्रेमनगर गली संख्या 20 में रहता था। वह रामा रोड स्थित एक ऑटो मोबाइल कंपनी में बतौर सुपरवाइजर काम करता था।
बुधवार रात ड्यूटी खत्म करने के बाद वह करीब साढ़े आठ बजे घर आ रहा था। उसके चचेरे भाई परमात्मा सिंह के मुताबिक प्रेमनगर फाटक के पास कुछ बदमाशों ने उसे घेर लिया और उसके पेट और जांघ पर चाकू से हमला कर लूटपाट की।
राहगीरों ने उसे जख्मी हालत में देखा। सूचना पर घटनास्थल पर परिवार समेत सैकड़ों लोग जमा हो गए। धीरेंद्र की मौत हो चुकी थी। स्थानीय निवासी एस के चौबे ने बताया कि पुलिस को घटना की जानकारी दी गई।
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सूचना मिलने पर पटेल नगर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने इसे रेल हादसा बताया और मामला रेलवे पुलिस के होने की बात कही। वहीं जीआरपी ने इसे हत्या बताया और मामला मोतीनगर थाने क्षेत्र की होने की बात कही।
सीमा विवाद होने के बाद वहां आम आदमी पार्टी की विधायक वीना आनंद अपने कार्यकर्ता के साथ पहुंची। उसके बाद लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया।
हंगामा होने पर पुलिस के आला अधिकारी वहां पहुंचे और मोतीनगर थाना प्रभारी को मामले की जांच करने का आदेश दिया। जिला पुलिस उपायुक्त रणवीर सिंह ने सीमा विवाद की बातों से इंकार किया है। उनका कहना है कि प्रथम दृष्टया में रेल हादसा का मामला लग रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मामले पर कार्रवाई की जाएगी।