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दिल्लीवाले कूड़े से परेशान, नेता कर रहे घमासान

Wed, 11 Jan 2017 11:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 11 Jan 2017 11:53 AM IST
सार

वेतन के नाम पर राजनीति कर रहे हैं मुख्यमंत्री : महापौर
आम आदमी पार्टी के नगर निगम से सवाल-
-क्या भाजपा शासित एमसीडी अपने कर्मचारियों को वेतन न देकर उच्च न्यायालय के फैसले का अपमान नहीं कर रही?
-पिछली सरकारों की तुलना में आप सरकार से ढाई गुना ज्यादा पैसा मिलने के बाद भी वेतन क्यों नहीं दिया गया?
-दिल्ली सरकार से मिला अतिरिक्त पैसा किसकी जेब में गया?
-दिल्ली को स्वच्छ रखने वाले सफाई कर्मियों का वेतन रोककर भाजपा उनकी रोजी-रोटी से क्यों खिलवाड़ कर रही है?
ईस्ट एमसीडी क्षेत्र में फैले कूड़े को तुरंत उठाने का निर्देश
- दिल्ली सरकार ने कहा- हमने वेतन के पैसे दे दिए
- एमसीडी ने कहा हड़ताल खत्म तो याची ने कहा हड़ताल जारी, छोटे से ग्रुप ने खत्म की है हड़ताल

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delhi people struggling after garbage thrown on road and political leaders are fighting
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्वी दिल्ली नगर निगम की महापौर सत्या शर्मा ने सफाईकर्मियों के वेतन को पार्षदों की जेब में जाने के मुख्यमंत्री के आरोप की कड़ी भर्त्सना की। उन्होंने कहा कि वह इस मामले की किसी भी स्वतंत्र जांच के लिए तैयार हैं और वह मुख्यमंत्री से खुली बहस को भी तैयार है।
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नगर निगम मुख्यालय में मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में सत्या शर्मा ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार की कार्यप्रणाली के कारण नगर निगम के कर्मचारियों को अपने वेतन के लिए हड़ताल पर जाने के लिए विवश होना पड़ा। सरकार लगातार वेतन के लिए राशि जारी कर देने की बात कहकर गुमराह कर रही है।
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सरकार ने जारी की राशि नियमित रूप से गैर योजना मद में मिलने वाली अनुदान राशि है। महापौर ने बताया कि सोमवार की शाम अन्य नगर निगम के उच्चपदाधिकारियों के साथ वह भी उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से मिली थी, लेकिन उनसे भी कोई संतोषजनक आश्वासन नहीं मिला।
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इस मौके पर उनके साथ स्थायी समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र चौधरी, सदन के नेता संजय जैन आदि भी उपस्थित थे।

हड़ताल पर आप का भाजपा पर वार

delhi people struggling after garbage thrown on road and political leaders are fighting

सफाई कर्मचारियों के हड़ताल के मामले में आम आदमी पार्टी (आप) ने एक बार फिर एमसीडी व भाजपा पर हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि भाजपा ने निगम को आर्थिक व व्यवहारिक तौर पर पंगु बना दिया है। साथ ही भाजपा नेता दिल्ली की जनता की सेहत ने खिलवाड़ करते हुये सफाईकर्मियों के पेट पर लात मार रहे हैं।

पार्टी कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए आप प्रदेश संयोजक दिलीप पांडे ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि आज भाजपा नेता न सिर्फ दिल्लीवासियों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। बल्कि सफाई कर्मियों की रोजी-रोटी पर सियासत कर रहे हैं। उन्होंने आप की तरफ एमसीडी को 119 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि जारी करने की बात भी दोहराई।

delhi people struggling after garbage thrown on road and political leaders are fighting
हाईकोर्ट ने सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण ईस्ट एमसीडी क्षेत्र में सड़कों पर बिखरे कूड़े को लेकर नाराजगी जताई है। अदालत ने एमसीडी को सड़कों के किनारे फैले कचरे को उठाने का निर्देश देते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा है सड़क पर कूड़ा न रहे।

न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति अनिल कुमार चावला की खंडपीठ ने यह निर्देश हड़ताली कर्मचारियों के कारण फैली सफाई अव्यवस्था को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया है। याची ने आरोप लगाया कि हड़ताली कर्मचारियों ने सड़कों पर कूड़ा फेंक दिया गया है।

ऐसे में लोगों को पैदल चलना और वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। अदालत ने ईस्ट एमसीडी व दिल्ली सरकार को इस मुद्दे पर नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। याची ने कहा कर्मचारी वेतन न मिलने के विरोध में हड़ताल पर है। अदालत ने दोनों पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई एक मार्च तय की है।

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सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि उसने कर्मचारियों के वेतन के लिए 119 करोड़ रुपये एमसीडी को दे दिए हैं। सरकार ने मार्च 2017 के वेतन के रूप मे अब तक 605 करोड़ रुपये दे दिए है। उन्हें एमसीडी को यह बताना चाहिए कि जब उसे वेतन के रूप में राशि दे दी गई है तो आम लोगों को परेशानी क्यों हो रही है।

वहीं एमसीडी के अधिवक्ता ने कहा कर्मचारी पांच जनवरी से हड़ताल पर हैं और उन्हें दो माह का वेतन दे दिया गया है और कर्मचारियों ने हड़ताल खत्म कर दी है। वहीं याची के अधिवक्ता सुग्रीव दुबे ने इस तर्क को गलत बताते हुए कहा कर्मचारियों के एक छोटे से ग्रुप ने हड़ताल खत्म की है जबकि बढ़ी तादाद में कर्मचारी गैरहाजिर हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि एमसीडी ने सभी कर्मचारियों को वेतन प्रदान नहीं किया है। उन्होंने कर्मचारियों को समय पर वेतन प्रदान करने संबंधी अदालत के आदेश का उल्लंघन करने पर अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना कार्रवाई की जानी चाहिए।
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