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Delhi : जमानत के बावजूद आरोपी को नहीं किया रिहा, सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार पर लगाया 5 लाख का जुर्माना

Thu, 26 Jun 2025 03:21 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 26 Jun 2025 03:21 AM IST
सार

यह राशि याचिकाकर्ता आफताब को अंतरिम मुआवजे के रूप में दी जाएगी, जिसे महज तकनीकी आधार पर जमानत बांड भरने के 28 दिन बाद गाजियाबाद जेल से रिहा किया गया। 

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Delhi: No release despite bail, 5 lakh fine imposed on UP government
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने उसके जमानत देने के बावजूद आरोपी व्यक्ति को रिहा नहीं करने पर यूपी सरकार पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह राशि याचिकाकर्ता आफताब को अंतरिम मुआवजे के रूप में दी जाएगी, जिसे महज तकनीकी आधार पर जमानत बांड भरने के 28 दिन बाद गाजियाबाद जेल से रिहा किया गया। 

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कोर्ट ने इस पर जोर दिया कि स्वतंत्रता एक कीमती अधिकार है। अदालत ने यूपी सरकार को जुर्माने वाले आदेश पर 27 जून को अनुपालन रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा, भगवान जाने कि ऐसे कितने लोग जेलों में सड़ रहे हैं।
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कोर्ट ने जेल प्रशासन के तकनीकी आधार पर जोर देने के आचरण की निंदा की कि यह स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। शीर्ष अदालत ने गाजियाबाद के मुख्य जिला एवं सत्र न्यायाधीश को मामले की जांच करने तथा आरोपी की रिहाई में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने का आदेश दिया।
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गाजियाबाद जिला कारागार के जेल अधीक्षक पीठ के समक्ष उपस्थित थे, जबकि उत्तर प्रदेश की अतिरिक्त महाधिवक्ता गरिमा प्रसाद तथा जेल महानिदेशक पीसी मीणा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अदालती कार्यवाही में शामिल हुए।

यूपी सरकार के वकील की दलील खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि जब अपराधों का विवरण जमानत आदेश से स्पष्ट है तो बेकार तकनीकी व अप्रासंगिक त्रुटियों के आधार पर रिहाई से इन्कार नहीं किया जा सकता। 


पूछा-क्या गारंटी है, इस तरह अन्य लोग जेल में नहीं हैं?
पीठ ने मीणा से पूछा, इसकी क्या गारंटी है कि इस कारण से अन्य लोग जेल में नहीं हैं? आदेश इस कोर्ट ने दिया है। आदेश में सही धारा का उल्लेख है।

धारा में कई उपधाराएं होंगी, क्या आपके अनुभव में यह कोई वैध आपत्ति है? प्रशासन को संवेदनशील बनाने के लिए क्या प्रस्ताव रखते हैं? जेल अधिकारी ने पीठ को बताया कि ऐसी घटनाओं से बचने के लिए जेल अधिकारियों को संवेदनशील बनाने के उपाय करेंगे।
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