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दिल्ली: निजामुद्दीन मरकज के रिहायशी क्षेत्र की चाबियां दो दिनों में संबंधित लोगों को सौंपने का निर्देश
Mon, 23 Aug 2021 05:39 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Mon, 23 Aug 2021 05:39 PM IST
सार
न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने यह निर्देश जमात नेता मौलाना साद की मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि चाबियां उन्हें दो दिन के भीतर सौंप दी जाएं।
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निजामुद्दीन मरकज
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निजामुद्दीन मरकज के रिहायशी क्षेत्र की चाबियां दो दिनों में संबंधित लोगों को सौंपने का निर्देश दिया है। पुलिस ने पिछले वर्ष कोरोना महामारी के दौरान तब्लीगी जमात समारोह कर नियमों का उल्लंघन मामले में दर्ज प्राथमिकी के बाद पूरे परिसर में ताला लगा दिया था।
न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने यह निर्देश जमात नेता मौलाना साद की मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि चाबियां उन्हें दो दिन के भीतर सौंप दी जाएं। अदालत ने साथ ही स्पष्ट किया कि यहां रहने वाले संपत्ति के किसी भी गैर-आवासीय हिस्से में प्रवेश नहीं कर सकते।
वहीं अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है जिसमें याचिकाकर्ता, एक वरिष्ठ नागरिक को उसके निवास तक पहुंचने से इनकार किया गया था। अदालत ने रिहायशी परिसर में ताला लगाने पर किसी भी आदेश के अस्तित्व पर पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई थी।
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अदालत ने पुलिस को रिहायशी परिसर की चाबियां उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुए कहा कि परिसर को सील करने या जब्त करने का कोई आदेश नहीं है और एक अप्रैल 2020 के बाद से रिहायशी परिसर बंद पड़ा हुआ है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता परिवार के ग्यारह सदस्यों के साथ परिसर में रह रहे थे और उन्हें गेस्टहाउसों में ही रहने के लिए नहीं कहा जा सकता।
अदालत ने पुलिस के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि क्या आपने परिसर को ताला लगाने में दंड प्रक्रिया संहिता का पालन किया। आपने क्या धाराएं लगाई हैं? परिसर को संरक्षित करने का मतलब यह नहीं है कि आप उसे लॉक कर दे। आपने वहां से क्या बरामद किया, मामला सिर्फ इतना था कि लोग वहां रह रहे थे।
याची की और से पेश अधिवक्ता रिबेका जॉन ने कहा उनके मुवक्किलों पर कोई धारा नहीं लगती और उनसे उनका आवास छीना नहीं जा सकता। पुलिस की और से पेश अधिवक्ता अमित अहलावत ने कहा कि घटना के समय रहने वाले लोग कोविड नियमों का उल्लंघन कर रहे थे।
याची खदीजा ने कहा कि 31 मार्च, 2020 को पूरी निजामुद्दीन मस्जिद को खाली कर दिया गया था और अधिकारियों द्वारा स्वच्छता और कीटाणुशोधन के कथित उद्देश्य के लिए बंद कर दिया गया था। उन्होंने अधिकारियों को अत्यंत सहयोग देने के लिए आवासीय हिस्से सहित मरकज की चाबियां एक अप्रैल 2020 को दिल्ली पुलिस को सौंप दी गई थीं। उन्होंने कहा इसके बाद पुलिस ने चाबियां देने से इंकार कर दिया और वे परिवार सहित अपने ही आवास में रहने से वंचित है।
उन्होंने पुलिस ने कभी भी उन्हें सीलिंग का आर्डर तक नहीं दिया बल्कि मौखिक तौर पर परिसर की सफाई के नाम पर चाबियां ली थी। याची ने कहा संबंधित प्राथमिकी में जांच धीमी गति से चल रही है और कोई भी अपराध हुआ है तो मरकज परिसर में किया गया जो चार मंजिला आवासीय परिसर से अलग था। मामले की अगली सुनवाई नौ दिसंबर को होगी।
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न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने यह निर्देश जमात नेता मौलाना साद की मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि चाबियां उन्हें दो दिन के भीतर सौंप दी जाएं। अदालत ने साथ ही स्पष्ट किया कि यहां रहने वाले संपत्ति के किसी भी गैर-आवासीय हिस्से में प्रवेश नहीं कर सकते।
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वहीं अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है जिसमें याचिकाकर्ता, एक वरिष्ठ नागरिक को उसके निवास तक पहुंचने से इनकार किया गया था। अदालत ने रिहायशी परिसर में ताला लगाने पर किसी भी आदेश के अस्तित्व पर पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई थी।
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अदालत ने पुलिस को रिहायशी परिसर की चाबियां उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुए कहा कि परिसर को सील करने या जब्त करने का कोई आदेश नहीं है और एक अप्रैल 2020 के बाद से रिहायशी परिसर बंद पड़ा हुआ है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता परिवार के ग्यारह सदस्यों के साथ परिसर में रह रहे थे और उन्हें गेस्टहाउसों में ही रहने के लिए नहीं कहा जा सकता।
अदालत ने पुलिस के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि क्या आपने परिसर को ताला लगाने में दंड प्रक्रिया संहिता का पालन किया। आपने क्या धाराएं लगाई हैं? परिसर को संरक्षित करने का मतलब यह नहीं है कि आप उसे लॉक कर दे। आपने वहां से क्या बरामद किया, मामला सिर्फ इतना था कि लोग वहां रह रहे थे।
याची की और से पेश अधिवक्ता रिबेका जॉन ने कहा उनके मुवक्किलों पर कोई धारा नहीं लगती और उनसे उनका आवास छीना नहीं जा सकता। पुलिस की और से पेश अधिवक्ता अमित अहलावत ने कहा कि घटना के समय रहने वाले लोग कोविड नियमों का उल्लंघन कर रहे थे।
याची खदीजा ने कहा कि 31 मार्च, 2020 को पूरी निजामुद्दीन मस्जिद को खाली कर दिया गया था और अधिकारियों द्वारा स्वच्छता और कीटाणुशोधन के कथित उद्देश्य के लिए बंद कर दिया गया था। उन्होंने अधिकारियों को अत्यंत सहयोग देने के लिए आवासीय हिस्से सहित मरकज की चाबियां एक अप्रैल 2020 को दिल्ली पुलिस को सौंप दी गई थीं। उन्होंने कहा इसके बाद पुलिस ने चाबियां देने से इंकार कर दिया और वे परिवार सहित अपने ही आवास में रहने से वंचित है।
उन्होंने पुलिस ने कभी भी उन्हें सीलिंग का आर्डर तक नहीं दिया बल्कि मौखिक तौर पर परिसर की सफाई के नाम पर चाबियां ली थी। याची ने कहा संबंधित प्राथमिकी में जांच धीमी गति से चल रही है और कोई भी अपराध हुआ है तो मरकज परिसर में किया गया जो चार मंजिला आवासीय परिसर से अलग था। मामले की अगली सुनवाई नौ दिसंबर को होगी।