दिल्ली एनसीआर में क्यों होता है इतना घना कोहरा, सामने आई वजह
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राजधानी दिल्ली में बढ़ती ठंड, गिरता पारा औऱ घने कोहरे के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। दिन के किसी भी पहर में लोगों को कोहरे से राहत नहीं मिल रही है। प्रतिदिन कई ट्रेनें रद्द की जा रही हैं। कुछ ऐसी हैं कि 10-12 घंटे लेट से चल रही हैं। वहीं कोहरे के कारण विमान सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। इससे सबसे ज्यादा परेशानी सड़क पर वाहन चलाने वालों को हो रही है।
देश में कई ऐसी जगहें हैं जहां दिल्ली से भी ज्यादा ठंड पड़ती है, लेकिन वहां कोहरे की इतनी बड़ी समस्या नहीं है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि दिल्ली एनसीआर में ही कोहरा इतनी बड़ी परेशानी क्यों है, जबकि यह न तो पठारी और न समुद्री और न ही पहाड़ी क्षेत्र है?
मैदानी क्षेत्र होने के बावजूद दिल्ली में हर साल घना कोहरा होता है। कई दफा इससे लंबा जाम लग जाता है और कई बार तो भीषण दुर्घटनाएं हो जाती हैं। मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि कोहरे के पीछे मुख्यत: चार कारण हैं।
- हवा की धीमी गति
- कम तापमान
- वातावरण में नमी की मौजूदगी
- वातावरण में मौजूद प्रदूषण के कण
कोहरे को घना कर दृष्यता कम करने में इस चार कारणों की अलग अलग भूमिका होती है। खासकर प्रदूषण के कणों की। ये कण हवा में मौजूद नमी के संक्षेपण(Condensation) के लिए सतह के रूप में काम करते हैं। इस हिसाब से ठंड के मौसम में जिस दिन वायु गुणवत्ता जितनी ज्यादा होती है, उस दिन उतना ही घना कोहरा होता है।
सामान्य भाषा में यह समझिए कि कोहरे मूल रूप से जमीनी सतह के बहुत करीब हवा में पानी की खुली बूंदें या बर्फ के क्रिस्टल होते हैं।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2006 से 2016 के बीच, जब से दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण स्तर में वृद्धि हुई है, तब से कोहरे के कारण परेशानियां बढ़ी हैं।