अब भी 'खराब' बनी हुई है दिल्ली की हवा, दो हफ्तों से नहीं हुआ सुधार
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दिल्ली एनसीआर की हवा में शनिवार कुछ सुधार हुआ लेकिन अब भी हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में ही बनी हुई है। आज सुबह लोधी रोड पर मापी वायु गुणवत्ता में पीएम 2.5 250 पर और पीएम 10 259 पर दर्ज हुआ जो खराब श्रेणी में आता है।
गौरतलब है कि दिल्ली और एनसीआर की वायु गुणवत्ता बहुत खराब और गंभीर श्रेणी के बीच अटकी हुई थी। यह स्थिति पिछले 12 दिन से अधिक से बनी हुई थी, लेकिन कोई सुधार नहीं हो रहा था।
मौसम को इसका जिम्मेदार ठहराया जा रहा है और स्थानीय प्रदूषण पर रोकथाम के लिए सख्ती बरती जा रही है। मौजूदा समय में सबसे खराब हालत गाजियाबाद की है, जहां तीसरे दिन वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) लगातार गंभीर श्रेणी में ही दर्ज हुआ। यूपी के अन्य शहरों में हापुड़, बुलंदशहर, नोएडा, ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता बहुत खराब स्थिति में है। हरियाणा का फरीदाबाद भी ऐसे ही प्रदूषण की जद में है।
हेल्थ एडवाइजरी में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि सुबह बहुत जल्दी सैर के लिए न निकलें और शाम को भी सैर से बचें। खुले वातावरण में शारीरिक गतिविधियां तेज करने से सांस तेज चलती है और प्रदूषण कण शरीर के भीतर प्रवेश कर नुकसान पहुंचाते हैं। खासतौर से पर्टिकुलेट मैटर के कारण मधुमेह, हार्ट अटैक और फेफड़ों के संक्रमण व कैंसर जैसी बीमारियों का शिकार भी होना पड़ रहा है।
गंभीर प्रदूषण की जद में सात स्थान
शुक्रवार को दिल्ली में आनंद विहार, अशोक विहार, मुंडका, नेहरू नगर, रोहिणी, विवेक विहार और वजीरपुर की हवा को गंभीर श्रेणी में रिकॉर्ड किया गया, जबकि 21 स्थान बहुत खराब और 3 स्थान खराब श्रेणी में रहे।
गाजियाबाद सर्वाधिक प्रदूषित
सीपीसीबी की ओर से शुक्रवार को जारी वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के मुताबिक, दिल्ली का एक्यूआई 348, जबकि यूपी में बुलंदशहर का एक्यूआई 395, गाजियाबाद का एक्यूआई 409 रिकॉर्ड किया गया। 401 से 500 का एक्यूआई स्तर गंभीर वायु प्रदूषण को प्रदर्शित करता है। वहीं, ग्रेटर नोएडा का एक्यूआई 393, नोएडा का एक्यूआई स्तर 372 और हापुड़ का एक्यूआई स्तर 383 रहा, जबकि फरीदाबाद का एक्यूआई स्तर 339 रहा। 301 से 400 का एक्यूआई स्तर बहुत खराब वायु गुणवत्ता को प्रदर्शित करता है।
चार गुना अधिक पीएम कण
दिल्ली-एनसीआर की हवा में पर्टिकुलेट मैटर 2.5 और 10 की मौजूदगी आपात स्तर के करीब पहुंच रही है। शुक्रवार रात आठ बजे पीएम 2.5 का स्तर जहां 195 रहा, वहीं पीएम 10 का स्तर 355 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड किया गया। पीएम 10 हवा में मौजूद मोटे प्रदूषण कण हैं, जबकि पीएम 2.5 बेहद महीन और आंखों से न दिखने वाले प्रदूषण कण हैं। पीएम 10 का सामान्य स्तर 100 और पीएम 2.5 का सामान्य स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होता है। दोनों कण अपने सामान्य मानक से चार गुना तक ज्यादा हैं।