दिल्ली में G20 समिट की तैयारी तेज: डेंगू खत्म करने के लिए राजधानी में ड्रोन से होगी फॉगिंग
मल्टीटास्किंग स्टाफ तय कार्यक्रम के मुताबिक मच्छरों की उत्पत्ति का पता लगाएंगे और रोकथाम के लिए आम जनता के बीच जाकर जागरूकता फैलाएंगे।
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डेंगू को खत्म करने के लिए अब पूरी दिल्ली में ड्रोन से फॉगिंग होगी। निगम के डेंगू, मलेरिया नियंत्रण विभाग ने इसके लिए व्यापक व सक्रिय कार्ययोजना तैयार की है। जी-20 शिखर सम्मेलन को ध्यान में रखते हुए निगम ने मच्छरों पर नियंत्रण के लिए तकनीकी उपाय करने का निर्णय लिया है। ड्रोन से तालाबों, नालों व झाड़ियों में एंटी लार्वा दवाई का छिड़काव आसानी से होगा।
जी-20 बैठक स्थलों, स्मारकों, होटलों, शॉपिंग मॉल, प्रसिद्ध बाजारों व अन्य स्थानों जहां प्रतिनिधियों के लिए बैठकें आयोजित की जाएगी, यहां पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस व्यापक योजना के अंतर्गत प्रमुख नालों में मच्छरों के लार्वा के प्रजनन को रोकने के लिए एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म यानी मानव रहित हवाई वाहन (ड्रोन) से मच्छरों की निगरानी की जाएगी और साथ ही एंटी लार्वा दवा का छिड़काव किया जाएगा। जैविक नियंत्रण पद्धति से मच्छरों के लार्वा के प्रजनन को रोकने के लिए लार्वा खाने वाली मछलियों को जलाशयों में छोड़ा जाएगा।
निगम आयुक्त ज्ञानेश भारती ने बताया कि डेंगू की रोकथाम के पूरे शहर को ध्यान में रखकर कार्ययोजना बनाई गई है। इसके लिए एनजीटी के आदेश के मुताबिक पर्यावरण के अनुकूल तरीके अपनाए जाएंगे और राष्ट्रीय वैक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनसीवीबीडीसीपी) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक समय-समय पर फॉगिंग की जाएगी।
मल्टीटास्किंग स्टाफ तय कार्यक्रम के मुताबिक मच्छरों की उत्पत्ति का पता लगाएंगे और रोकथाम के लिए आम जनता के बीच जाकर जागरूकता फैलाएंगे। उप स्वास्थ्य अधिकारी संवेदनशील कॉलोनियों व हॉट स्पॉट की पहचान करेंगे। डीबीसी के कार्य की निगरानी सीधे सर्किल-प्रभारी द्वारा की जाएगी। कीट विज्ञानी, एएमओ, एपिडेमियोलॉजिस्ट और डीएचओ कार्य रजिस्टर की जांच करेंगे।
लार्वा की उत्पत्ति को रोकने के लिए करेंगे कीटनाशकों का प्रयोग
विभाग मच्छरों के लार्वा की उत्पत्ति को रोकने के लिए कीटनाशकों का प्रयोग करेगा। डेंगू के रोकथाम के लिए एमसीडी बैठक स्थलों, होटलों, स्मारकों, पर्यटन स्थलों, शॉपिंग मॉल और प्रसिद्ध बाजारों पर विशेष ध्यान देगी। जनभागीदारी बढ़ाने के लिए अधिकारी नियमित रूप से रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, मार्केट एसोसिएशन से संवाद करेंगे और अंतर क्षेत्रीय विभागों में जागरूकता पैदा करने के लिए समन्वय बैठक आयोजित करेंगे।