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Delhi : पश्चिमी दिल्ली में होते हैं सबसे ज्यादा सड़क हादसे, लोगों की जान के दुश्मन हैं ढेर सारे ब्लैक स्पॉट

Fri, 01 Dec 2023 06:18 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 01 Dec 2023 06:18 AM IST
सार

यहां ऐसी सबसे ज्यादा जगहें हैं, जहां सड़क दुर्घटना में सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। दिल्ली यातायात पुलिस के जिलेवार रिकॉर्ड पर नजर डालें तो पश्चिमी जिले में पिछले वर्ष सबसे ज्यादा 15 मौतें हुईं हैं।

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Delhi : Most road accidents occur in West Delhi
demo pic... - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अगर आप पश्चिमी दिल्ली में यात्रा कर रहे हैं तो सावधान रहें। यहां ऐसी सबसे ज्यादा जगहें हैं, जहां सड़क दुर्घटना में सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। दिल्ली यातायात पुलिस के जिलेवार रिकॉर्ड पर नजर डालें तो पश्चिमी जिले में पिछले वर्ष सबसे ज्यादा 15 मौतें हुईं हैं। यानी यहां सबसे ज्यादा ब्लैक स्पॉट(दुर्घटना संभावित क्षेत्र) हैं। इसके बाद उत्तर-पश्चिम , बाहरी उत्तर और दक्षिण-पूर्व जिलों का नंबर आता है। यहां पर 14-14 ब्लैक स्पॉट हैं। 

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रोहिणी, नई दिल्ली और शाहदरा में सबसे कम क्रैश प्रोन जोन दर्ज किए गए। दिल्ली यातायात पुलिस ने दिल्ली में क्लस्टरिंग बिंदुओं या दुर्घटना-सम्भावी क्षेत्रों की पहचान करने के लिए वर्ष 2022 के लिए दुर्घटना स्थलों का विश्लेषण किया है। इस विश्लेषण से पता चला है कि वर्ष 2022 के लिए कुल 117 दुर्घटना संभावी क्षेत्रों की पहचान की गई।
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दिल्ली यातायात पुलिस अधिकारियों के अनुसार ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) 2016 के अनुसार सड़क दुर्घटनाएं भारत में मृत्यु का आठवां प्रमुख कारण हैं। यह संयुक्त मृत्यु और विकलांगता के शीर्ष दस कारणों में से एक है, जिसे विकलांगता समायोजित जीवन वर्ष (डीएएलवाईएस) द्वारा मापा जाता है। एक ब्लैकस्पॉट सुधार कार्यक्रम में सड़क यातायात दुर्घटनाओं का विश्लेषण एक निश्चित अवधि (तीन से पांच साल के बीच) के लिए स्थानिक रूप से किया जाता है।
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 इससे पता लगता है कि सड़क संरचना में क्या कमियां हैं। यदि दुर्घटना एक स्पष्ट भौतिक सड़क संरचना में कमियों के कारण हुई है तो यह आवश्यक है कि ऐसे कर्मियों की पहचान की जाती है। तत्पश्चात्, इन कमियों को दूर करने के लिए उपयुक्त उपचारात्मक प्रयास किये जाने चाहिए। दुर्घटनाओं में कमी आ सके।

क्या है ब्लाक स्पॉट
ब्लैकस्पॉट को 500 मीटर लंबाई के सड़क खंड या एक जंक्शन के रूप में परिभाषित किया गया है। इसमें सड़क अनुभाग / नेटवर्क के लिए गणना की गई औसत वार्षिक कुल दुर्घटनाओं (एएटीसी) की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या अधिक है। स्पष्ट रूप से देखे तो ब्लैकस्पॉट 300 - 500 मीटर लंबाई का एक सड़क खंड है जिसमें असामान्य रूप से काफी संख्या में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं।

मुकरबा चौक पर बढ़ी हैं दुर्घटनाएं
आंकड़ों से पता चलता है कि मुकरबा चौक पर पिछले तीन वर्षों से साधारण और घातक दोनों दुर्घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी गई है। इसके अतिरिक्त, गांधी विहार बस स्टैंड पर कुल दुर्घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। मुकरबा चौक काफी समय से ब्लैक स्पॉट बना हुआ है।

कैसे तय होता है दुर्घटना संभावित क्षेत्र
दिल्ली यातायात पुलिस जीआईएस (जीआईएस) मानचित्र पर जियो-टैगिंग के साथ सभी दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिह्नित करती है। यह क्रैश-सम्भावी क्षेत्रों (एपीजैड) के स्थानिक और क्लस्टर-आधारित विश्लेषण सहित अन्य विश्लेषण में मदद करता है। ऐसे दुर्घटना सम्भावी क्षेत्रों को परिभाषित करने के लिए अपनाए गए मानदंड (एमओआरटीएच 2015) के अनुसार, सड़क दुर्घटना ब्लैक स्पॉट लगभग 500 मीटर लंबाई का राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक सड़क खंड होता है। इसमें पिछले तीन वर्षों के दौरान या तो पांच सड़क दुर्घटनाएं हुई हो या पिछले तीन वर्षों के दौरान 10 मौतें हुई हो। यातायात प्रवाह के प्रत्यक्ष प्रभाव वाले चौराहे को जोड़ने वाली सभी प्रमुख और छोटी सड़कों पर दुर्घटनाओं को दुर्घटना सम्भावी क्षेत्रों की पहचान करने के लिए मानक माना जाता है।

29.90 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई
तय मानदंडों के अनुसार 2022 में कुल 117 क्लस्टर बिंदुओं की पहचान क्रैश-सम्भावी क्षेत्रों के रूप में की गई थी। कुल घातक दुर्घटनाओं में से लगभग 29.90% (1428 में से 427) दुर्घटना संभावी क्षेत्रों में सड़क-खंड में हुईं, जो लंबाई में लगभग 60 किमी है । शीर्ष 10 ऐसे दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में जहां घातक दुर्घटनाओं की अधिकतम संख्या होती है उन्हें क्रैश ब्लैकस्पॉट कहा जाता है।


उठाए जा रहे हैं कदम
दिल्ली यातायात पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त सुरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि ब्लैक स्पॉट को खत्म करने के लिए बड़े पैमाने पर कदम उठाए जा रहे हैं। इन ब्लैक स्पॉटस से निपटने के लिए दिल्ली यातायात पुलिस द्वारा ब्लैक स्पॉट के उपचारात्मक उपायों पर चार दिवसीय कार्यशाला का चालू वर्ष के दौरान आयोजन किया गया । कार्यशाला में संबंधित सिविक एजेंसियों के अधिकारियों, आईआईटी, डीटीयू, एसपीए, सीआरआरआई, डब्ल्यूआरआई, राहगीरी, सेव लाइफ फाउंडेशन के विशेषज्ञों, दिल्ली पुलिस के संबंधित सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और ब्लैक स्पॉट पर होने वाली दुर्घटना मृत्यु को कम करने के लिए अपने विचार/उपचारात्मक उपाय सुझाए।

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