ट्रैफिक रूल की उड़ी धज्जियां, भगवा रंग में रंगे फुटपाथ
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सरकार और नेता तो दूर अब दिल्ली में सड़कों के किनारे लगे पत्थर भी चर्चा में हैं। इसकी वजह है इनका रंग। अब तक सड़कों के किनारे लगी इन ईंटों काो सफेद, काले और पीले रंग में रंगा जाता था, लेकिन इस बार दिल्ली की सड़कों को केसरिया और हरे रंग में रंगा गया है। इसके चलते इन दिनो एनडीएमसी और दिल्ली पुलिस दोनों ही आलोचनाओं का शिकार हो रही हैं।
सड़कों के किनारे लगे ये पत्थर सुरक्षा के लिहाज से लगाये जाते हैं, इसी वजह से इन पत्थरों के रंग को पीले, सफेद या काले रंगों में रंगे जाते हैं। ट्रैफिक इंजीनियरिंग एन्ड सेफ्टी इन सेन्ट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट के हेड ऑफ डिपार्टमेन्ट डॉ एस मुरुगन के मुताबिक सफेद, पीले और काले रंग हाई विजिविलिटी के होते हैं जिससे दूर से आते व्यक्ति को भी सामने लगे पत्थर नजर आ सकें।
इनके रंग बदलने की वजह से सेन्ट्रल दिल्ली म्यूनिसपल कॉरपोरेशन आलोचनाओं से घिरी है। उस पर आरोप लग रहा है कि उसने दिल्ली की सड़कों पर लगे इन पत्थरों को बीजेपी के रंग में रंग दिया है।
'इससे नहीं है कोई खतरा'
इस मामले को बीजेपी की नेता मीनाक्षी लेखी खुद एनडीएमसी अधिकारियों और दिल्ली पुलिस के सामने रख चुकी हैं। उनके मुताबिक उन्होंने हफ्ते भर पहले इस मामले पर एनडीएमसी को एक पत्र लिखा था जिसका उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।
इंडियन रोड कांग्रेस के मुताबकि पीले, काले और सफेद रंगों का ही इस्तेमाल सड़क किनारे लगी ईंटों को रंगने के लिए किया जाता है, क्योंकि ये रंग ऐसे हैं जो कोहरे और खराब मौसम में नजर आ जाते हैं जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कम होती है।
वहीं, एनडीएमसी अपना बचाव करती हुई कह रही है कि उसकी बिल्डिंग का रंग लाल है और हरा है इसी वजह से सड़कों के कर्वी स्टोन्स का रंग केसरिया और हरा रखा गया है। यह किसी भी ट्रैफिक नियम का उल्लंघन नहीं करता। इसके लिए अक्टूबर में स्वीकृति ले ली गई थी। वहीं दिल्ली पुलिस ने कहा है कि ईंटों का रंग बदलना मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है और वे इस मसले को एलजी के सामने रखेंगे।