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जनकपुरी में आग लगने का मामला: नियमों को ताक पर रखकर बेसमेंट में चलाया जा रहा था हॉस्टल

Thu, 30 May 2019 06:25 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Thu, 30 May 2019 06:25 AM IST
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delhi janakpuri girls hostel fire: Hostel being run illegally in Basement
- फोटो : अमर उजाला

जनकपुरी स्थित कोचिंग सेंटर के जिस हॉस्टल में आग लगी वहां अवैध रूप से बेसमेंट में भी हॉस्टल चलाया जा रहा है। दमकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की इमारतों में बेसमेंट को स्टोर रूम या पार्किंग के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन जहां आग लगी वहां कमरे बनाकर छात्राओं के रहने का इंतजाम किया गया था। इसके अलावा बेसमेंट की सीढ़ियों के पास ही बिजली का मीटर और पैनल लगा हुआ था। आग लगते ही पूरे हॉस्टल में धुंआ भर गया।

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एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि हॉस्टल की दो इमारतों में करीब 150 लड़कियां रहती हैं। एक बिल्डिंग में 70 तो दूसरी में करीब 80 लड़कियां हैं। रात के समय बिल्डिंग के मेन गेट को अंदर से बंद कर वहां एक सिक्योरिटी गार्ड, दो मेड और हॉस्टल की एक वार्डन किरण धर्माधिकारी रहती हैं। बुधवार रात जिस बिल्डिंग में आग लगी वहां 51 लड़कियां थीं। सिक्योरिटी गार्ड ने आग बुझाने वाले सिलेंडर से आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन वह बुझने के बजाय बढ़ गई। चोरों ओर धुंआ फैल गया। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत कर लड़कियों को बाहर निकाला। कई लड़कियां तो डर की वजह से रोने लगी थीं। देर रात को ही उन्होंने अपने परिजनों को फोन कर सूचना दी। दिल्ली में रहने वाले परिजन रात में ही हॉस्टल पहुंचे, जबकि बाकी सुबह पहुंच पाए।
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दो दिन पहले पुलिस ने की थी बैठक
सूरत हादसे के बाद दिल्ली में दमकल विभाग ने जहां ऐसी इमारतों की जांच शुरू कर दी है, वहीं पुलिस ने भी कोचिंग सेंटर मालिकों, हॉस्टल, रेस्तरां व पीजी संचालकों के साथ बैठक शुरू कर दी है। मामले की छानबीन कर रहे पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दो दिन पूर्व ही जनकपुरी थाने में सुरक्षा के मद्देनजर बैठक कर इन लोगों को नियमों का पालन करने के लिए कहा गया था। बुधवार को कोचिंग सेंटर पर छात्रों को आपात स्थिति से निपटने की ट्रेनिंग दी जानी थी, लेकिन तड़के यह हादसा हो गया।

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हॉस्टल में आग की घटना पर एमसीडी ने साधी चुप्पी 

जनकपुरी के गर्ल्स हॉस्टल में लगी आग की घटना के बाद भी एमसीडी ने अभी तक सुध नहीं ली है। निगम के अधिकारियों के मुताबिक, ऐसे हॉस्टल को लाइसेंस जारी करने के लिए निगम से मंजूरी नहीं ली जाती है। हॉस्टल में किचन का प्रावधान किया गया है तो इसके लिए निगम से मंजूरी जरूरी है। हॉस्टल के बेसमेंट में किए गए निर्माण के लिए नक्शा भी पास करने के लिए अनुमति भी निगम से ली गई, जबकि इसमें किए परिवर्तन सहित भवन की ऊंचाई तय सीमा से कम होने पर इसकी जिम्मेदारी नगर निगम पर होती है। फिलहाल इस घटना से जुड़े तमाम पहलुओं की छानबीन की जा रही है और अधिकारियों का कहना है कि अगर निगम के प्रावधानों के तहत कहीं भी अनदेखी हुई है तो उचित कार्रवाई की जाएगी। 

चीख-पुकार से गूंज उठा था हॉस्टल
12वीं कक्षा पास करने के बाद मेडिकल की कोचिंग लेने दिल्ली आई छात्रा श्रेया ने बताया कि वह अपने कमरे में सो रही थी। 3.00 बजे के करीब उसकी आंख खुली तो उसने देखा कि कमरे में धुंआ आ रहा था। वह बाहर निकली और शोर मचा दिया। बाकी लड़कियां भी बाहर निकल गई और हॉस्टल चीख-पुकार से गूंज उठा। चारों ओर धुंआ होने के कारण लड़कियां ग्राउंड फ्लोर से होकर जीने के रास्ते ऊपर भागीं। लड़कियों ने बताया कि मेन गेट के अलावा ऊपर ममटी का दरवाजा भी बंद था। वह छत पर भी नहीं पहुंच पाईं। कुछ लड़कियों पहली मंजिल की खिड़की से नीचे गार्ड के रूम पर कूदी। बाकियों को हॉस्टल प्रशासन व दमकल कर्मियों ने सुरक्षित बाहर निकाला। श्रेया ने बताया कि जब कुछ लड़कियां धुंए से बेहोश हो गई तो वह बुरी तरह डर गई।

करीब 30 मिनट चला रेस्क्यू

करीब 2.50 बजे आग लगी और लगभग 3.05 बजे पुलिस व दमकल विभाग को सूचना दी गई। खबर मिलते ही पुलिस, दमकल और कैट्स एंबुलेंस के अलावा आसपास के लोग भी मौके पर पहुंचे। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी देर रात ही घटनास्थल पर पहुंच गए। करीब 30 मिनट चले रेस्क्यू के बाद तड़के ही क्राइम टीम को बुलाकर वहां से साक्ष्य जुटाए गए। दिन में एफएसएल की टीम ने घटना स्थल का दौरा किया। बाद में इमारत को सील कर दिया गया।

मोबाइल जमा करने का आरोप
छात्राओं ने आरोप लगाया है कि माता-पिता ने उन्हें परिवार से बातचीत करने के लिए मोबाइल दिया हुआ है, लेकिन हॉस्टल प्रशासन मोबाइल को अपने पास जमा करवा लेता है। दिन में एक बार फोन पर अपने परिवार से बातचीत करने की अनुमति होती है। वहीं, मामले पर कोचिंग सेंटर प्रशासन का कहना है कि मोबाइल जमा करवाने के पीछे पढ़ाई ही कारण है। यदि लड़कियों को मोबाइल दे दिया जाता है तो वह अपना ज्यादा से ज्यादा समय मोबाइल में लगा देती है। ऐसे में उनके बेहतर रिजल्ट के लिए ही मोबाइल जमा कराया जाता है।

अतुल गर्ग, चीफ फायर ऑफिसर ने कहा कि, जिस हॉस्टल में आग लगी उसे दमकल विभाग की एनओसी की जरूरत नहीं थी। नियमानुसार 12 मीटर या उससे अधिक की ऊंचाई वाले हॉस्टल की इमारत को दमकल विभाग से एनओसी लेने की जरूरत होती है। मौजूद इमारत की ऊंचाई 12 मीटर से कम है। ऐसे में इस इमारत को एनओसी की जरूरत नहीं थी। बेसमेंट में कमरे बनाकर उसके इस्तेमाल करने की बात है तो उसके लिए एमसीडी कार्रवाई करेगी।

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