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यमुना में घटते जल स्तर को लेकर दिल्ली जलबोर्ड ने चिंता जाहिर की, हरियाणा सरकार को ठहराया जिम्मेदार
Tue, 15 Dec 2020 12:48 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 15 Dec 2020 12:48 AM IST
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यमुना
- फोटो : अमर उजाला
एक बार फिर दिल्ली में पानी की समस्या शुरू हो गई है। यमुना में अमोनिया की मात्रा बढ़ने की वजह से पानी की समस्या आम है। सोमवार को भी इस समस्या से दिल्ली के लोगों की परेशानी बढ़ा कर रखी। दिल्ली में कई स्थानों पर पानी की समस्या रही। दिल्ली जलबोर्ड ने इसके लिए हरियाणा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। इसे लेकर हरियाणा सरकार को एक पत्र भी लिखा गया है।
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दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढ़ा ने कहा है कि यमुना में पानी के घटते स्तर के प्रति हरियाणा सरकार उदासीन है। चड्ढ़ा ने कहा कि यमुना का लगातार घटता जल-स्तर चिंता का विषय है। हरियाणा सरकार का ऐसा व्यवहार काफी निराश करने वाला है। पिछले हफ्ते से ही यमुना का जल-स्तर लगातार घट रहा है। यमुना के घटते जलस्तर को लेकर हरियाणा के सिंचाई विभाग के संबंधित इंजीनियर्स को लगातार सूचना दी गई है, लेकिन एक्शन लेने का भरोसा दिलाने के बाद भी उन्होंने स्थिति को सामान्य करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
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बंद हो जाता है जल शोधक प्लांट
चड्ढा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फरवरी 1996 के आदेश के मुताबिक वजीराबाद तालाब का जल-स्तर हमेशा पूरा रखना होता है। वजीराबाद तालाब के तेजी से घटते जल-स्तर की वजह से वजीराबाद और चंद्रावल प्लांट से पानी का उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है। इन प्लांट्स से सेंट्रल दिल्ली, उत्तरी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली में पीने का पानी सप्लाई होता है।
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जलस्तर व अमोनिया बढ़ने से बढ़ती है परेशानी
यमुना नदी का सामान्य जल स्तर 674.50 फीट होना चाहिए, लेकिन ये स्तर घटकर 672.20 पर आ गया है। घटते जल-स्तर का बड़ा असर दिल्ली जल बोर्ड के ट्रीटमेंट प्लांट्स पर भी पड़ता है। दिल्ली को हर दो हफ्ते में एक बार रॉ वॉटर की परेशानी से जूझना पड़ता है। यमुना में बिना ट्रीट किए गए गंदा पानी छोड़े जाने की वजह से यह परेशानी होती है। यमुना में अमोनिया का स्तर भी लगातार बढ़ रहा है।
यमुना में बिना ट्रीट किया गया काफी पानी छोड़ा जाता है जिसकी वजह से यमुना में अमोनिया का स्तर बढ़ता जाता है। अक्सर ही अमोनिया का स्तर 0.8 पीपीएम की अधिकतम सीमा के भी ऊपर चला जाता है। इस वजह से जल बोर्ड को अपने प्लांट बंद भी करने पड़ते हैं। कई बार तो अमोनिया का स्तर 12 पीपीएम तक अमोनिया का स्तर बढ़ जाता है जो काफी खतरनाक है।