टैंकर घोटाले में शीला दीक्षित के खिलाफ एफआईआर की तैयारी
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ जल्द ही एफआईआर दर्ज हो सकती है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल किसी भी वक्त एंटी करप्शन ब्यूरो को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश कर सकते हैं।
असल में दिल्ली में हुए टैंकर घोटाले की जांच के लिए 24 जून को बनाई गई समिति ने अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंप दी है। 400 करोड़ के घोटाले से संबंधिति इस रिपोर्ट को अपनी सिफारिशों के साथ आज कानून मंत्री ने मुख्यमंत्री को सौंप दिया।
इस रिपोर्ट में 2012-13 के दौरान दिल्ली में टैंकर से पानी सप्लाई के लिए दिए गए ठेके में की गई अनियमितता का खुलासा किया गया है। इस दौरान शीला दीक्षित न सिर्फ दिल्ली की मुख्यमंत्री थीं, बल्कि दिल्ली जल बोर्ड की अध्यक्ष भी थीं।
दिल्ली जल बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष और कानून मंत्री ने इस रिपोर्ट के आधार पर जल बोर्ड के तत्कालीन उपाध्यक्ष मतीन अहमद सहित कुछ सदस्यों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है।
क्या है टैंकर घोटाला
बता दें दिल्ली में जिन इलाकों में पाइप लाइन से पेय जल की आपूर्ति नहीं हो पाती उन इलाकों में पानी की सप्लाई टैंकरों से कराने का फैसला सरकार ने 2012-13 में लिया था।
उस समय जल बोर्ड ने तीन कंपनियों को 385 टैंकर का ठेका दिया था। इस मामले में दिल्ली सरकार का आरोप है कि जो काम 200 करोड़ में हो सकता था पूर्व सरकार ने उस पर 600 करोड़ खर्च किया।
जल बोर्ड के चेयरमैन व कानून मंत्री कपिल मिश्रा ने शीला सरकार के दौरान हुए टैंकरों के ठेके के विभागीय जांच के आदेश दिए थे। कहा जा रहा है कि इस टेंडर में लगभग 400 करोड़ की घपलेबाजी हुई है।
उस वक्त शीला दीक्षित दिल्ली जल बोर्ड की अध्यक्ष और मतीन अहमद उपाध्यक्ष थे। जल बोर्ड ने यह जांच सिटिजन फ्रंट फॉर वॉटर डेमोक्रेसी नामक एनजीओ की शिकायत पर बैठाई थी।
कानून मंत्री कपिल मिश्रा ने शीला दीक्षित सहित दिल्ली जल बोर्ड के तत्कालीन सदस्यों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है।