दिल्लीः राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीज ने पांचवीं मंजिल से कूदकर की खुदकुशी
दिल्ली के ताहिरपुर स्थित राजीव गांधी सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में कोरोना मरीज ने पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर खुदकुशी कर ली। 52 साल की सी पद्मजा अपने बेटे के साथ यहां कोविड वार्ड में भर्ती थीं। मां और बेटा एक ही कमरे में थे। सुबह बेटा सो रहा था। इसी दौरान कमरे में चाय पहुंची।
चाय पीने के बाद महिला ने खिड़की से नीचे छलांग लगा दी। पुलिस खुदकुशी के कारणों की पड़ताल कर रही है। सी पद्मजा परिवार के साथ दिलशाद कॉलोनी में रहती थीं। अस्पताल की मीडिया प्रवक्ता डॉ. छवि गुप्ता ने बताया कि मंगलवार को वह बेटे के साथ यहां भर्ती हुई थीं।
डॉक्टरों के मुताबिक दोनों की हालत सामान्य थी। आशंका है कि महिला अवसादग्रस्त होंगी। इससे पहले अप्रैल माह में इसी अस्पताल में एक मरीज ने छठी मंजिल से छलांग लगाने की कोशिश की थी। लेकिन समय रहते उसे बचा लिया गया था। राजधानी में कोरोना संक्रमण के दौर में सफदरजंग और एम्स अस्पताल में खुदकुशी के कई मामले सामने आ चुके हैं।
कुछ अच्छे रिकॉर्ड भी अस्पताल के नाम, अब तक यहां से 2500 से ज्यादा मरीज स्वस्थ होकर लौटे
ताहिरपुर के राजीव गांधी सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल से अब तक 2500 से ज्यादा मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। राजधानी में कोरोना महामारी की दस्तक देने के कुछ दिनों बाद इस अस्पताल को कोविड विशेष घोषित किया गया था। उसके बाद से यहां लगातार कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा।
अस्पताल के कोविड नोडल अधिकारी डॉ अजीत जैन बताते हैं कि 17 मार्च को उनके अस्पताल में कोरोना के पहले 10 मरीज भर्ती हुए थे। उसके बाद से नवंबर के पहले सप्ताह तक 2500 से ज्यादा रोगियों को छुट्टी दी गई है।
जैन ने बताया कि अगस्त के पहले सप्ताह तक अस्पताल में संक्रमण के महज 55 मरीज रह गए थे। अब पिछले 15 दिनों से रोजाना 10 से ज्यादा मरीज भर्ती हो रहे हैं। डॉ. अजीत के मुताबिक, इलाज कराकर लौटे सभी मरीजों का रिकॉर्ड रखा गया है। मरीजों को अगर किसी भी प्रकार की समस्या होती है तो अस्पताल के पोस्ट कोविड केयर क्लीनिक में उनका इलाज किया जाता है।
हृदय के रोगियों को भी दी जा रही सेवा
राजीव गांधी अस्पताल के कोविड विशेष होने के बाद भी यहां पहले से चल रहे दिल के मरीजों के सीसीयू को बंद नहीं किया गया। इसकी वजह से रोजाना इमरजेंसी में 10 से 15 मरीज आ रहे हैं। जिनकी एंजियोग्राफी और जरूरत पड़ने पर एंजियोप्लास्टी की जा रही है।