दिल्ली के सरकारी अस्पताल पर लगा बड़ा आरोप, इलाज के पैसे न देने पर मरीज को नहीं किया डिस्चार्ज
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दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल पर एक बच्चे के पिता ने गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने पिता के आरोपों का खंडन करते हुए बच्चे का उपचार सरकार की मदद से करने का भरोसा दिया है।
आरोप है कि बिल बनाने के चक्कर में अस्पताल वाले उसके बेटे को बंधक बनाए हुए हैं। नोएडा के बरौला सेक्टर-39 निवासी और पेशे से पेंटर प्रमोद का कहना है कि उसके छह साल के बेटे प्रियांश की दो वर्ष पहले ज्यादा डोज का इंजेक्शन देने की वजह से दोनों किडनी खराब हो गई थी। इसकी वजह से उसे 2016 में पहली बार गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया।
यूपी सरकार ने पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद भी बच्चे को दी। उसके बाद 2017 में एक बार दो दिन के लिए बच्चे को भर्ती कराना पड़ा। इस वर्ष 30 जून को जब बच्चे को फिर भर्ती कराया तो इलाज का बिल कई लाख रुपये हो जाने पर उन्होंने अस्पताल से और पैसे नहीं दे पाने की सूरत में छुट्टी की मांग की, लेकिन अस्पताल ने बचे पैसों का भुगतान होने तक की बात कह बच्चे को अस्पताल में रोक लिया।
अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सीय निदेशक डॉ. एस के कटोच का कहना है कि बच्चे के पिता के आरोप गलत हैं। उन्होंने न सिर्फ बच्चे के इलाज में लापरवाही बरती, बल्कि अस्पताल में भर्ती होते समय भी पेड वार्ड का चयन किया।
सीएम राहत कोष से मिले बजट में बची धनराशि सरकार को वापस चली गई थी। उसके बाद से लेकर अभी तक अस्पताल ने बच्चे की पूरी चिकित्सकीय जरूरतों को पूरा किया है।
लेकिन बीते आठ अक्तूबर को बिल के नौ लाख सत्तर हजार से भी ज्यादा हो जाने पर जब बच्चे के पिता ने असमर्थता जताई, तब से अस्पताल बच्चे को जनरल वार्ड में शिफ्ट कर निशुल्क इलाज कर रहा है और जब तक बच्चे को जरूरत रहेगी अस्पताल निशुल्क इलाज करता रहेगा।