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देश में ठीक हुए लोगों को दोबारा होने लगा कोरोना, राजस्थान के कोटा और दिल्ली के एक अस्पताल में मिले मरीज
Mon, 20 Jul 2020 10:10 PM IST
Mohit Mudgal
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Mohit Mudgal
Updated Mon, 20 Jul 2020 10:10 PM IST
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कोरोना वायरस (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
देश में अब दोबारा कोरोना वायरस होने के मामले सामने आने लगे हैं। राजस्थान के कोटा और दिल्ली के एक अस्पताल में कार्यरत नर्स को करीब डेढ़ महीने बाद दोबारा संक्रमण की पुष्टि हुई है। अभी तक देश में इस तरह के मामले सामने नहीं आए थे लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में गहन अध्ययन जरूरी है। ताकि कोरोना संक्रमण के बारे में और जानकारी मिल सके।
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जानकारी के अनुसार दिल्ली के हिंदूराव मेडिकल कॉलेज में कार्यरत नर्स कृष्णा पिछले माह 1 जून को कोरोना संक्रमित पाई गई थीं। हालांकि संक्रमण का असर कम होने के चलते उन्हें 21 दिन तक आइसोलेशन में रहना पड़ा था। उन्होंने बताया कि स्वस्थ्य होने के बाद वह जून के आखिरी सप्ताह में फिर से अस्पताल आने लगीं। 28 जून से उनकी ड्यूटी कोरोना वॉर्ड में लगी। चूंकि 14 दिन की ड्यूटी के बाद पांच दिन के लिए क्वारंटीन जरूरी है। इसलिए 16 जुलाई को उन्होंने अपना सैंपल दिया जिसकी पॉजीटिव रिपोर्ट 18 जुलाई को मिली है। कृष्णा को किसी भी प्रकार के लक्षण नहीं है।
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कृष्णा के मुताबिक 14 दिन काम करने के बाद कोरोना वॉर्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को पांच दिन तक क्वारंटीन किया जाता है और फिर उनकी जांच की जाती है। कृष्णा की 16 जुलाई को फिर से आरटी-पीसीआर जांच कराई तो 18 जुलाई को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। नर्स कृष्णा ने बताया कि उन्हें लक्षण नहीं हैं लेकिन आरटीपीसीआर जांच में दोबारा कोरोना संक्रमण की पुष्टि होने के बाद उनकी एंटीबॉडी जांच कराई गई। अस्पताल में उनकी एंटीबॉडी जांच भी की गई जिसमें कोरोना वायरस के खिलाफ पर्याप्त एंटीबॉडी उनके शरीर में मिले हैं।
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ठीक इसी तरह का एक मामला राजस्थान के कोटा शहर में भी मिला है। जानकारी के अनुसार कोटा निवासी एक मरीज को दोबारा कोरोना वायरस होने की पुष्टि हुई है। हालांकि इस मरीज में भी संक्रमण का बेहद हल्का असर बताया जा रहा है।
सफदरजंग अस्पताल के सामुदायिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. जुगल किशोर का कहना है कि दोबारा संक्रमित होने के पीछे एक वजह शरीर में मृत विषाणु भी हो सकते हैं लेकिन इस पर टिप्पणी करने से पहले अध्ययन जरूरी है।
वहीं दिल्ली एम्स के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के डॉ. संजय राय का कहना है कि दोबारा संक्रमण तभी हो सकता है जब उक्त व्यक्ति एक्सपोज हुआ हो। हालांकि इनका यह भी कहना है कि संक्रमित होने के बाद शरीर में बने एंटीबॉडी दोबारा संक्रमण होता है तो अंदर ही अंदर उससे फाइट करते हैं। ऐसे में यह ज्यादा संभावना है कि संक्रमण दोबारा होने पर उसका असर कम ही हो।