फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Delhi High Court upheld the decision to acquit the Misdeed accused

Delhi: दुष्कर्म के आरोपी को बरी करने का फैसला बरकरार, पीड़िता के बयान में विरोधाभास; पढ़ें क्या है मामला

Fri, 20 Jun 2025 05:08 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Fri, 20 Jun 2025 05:08 AM IST
सार

अपने आदेश में न्यायमूर्ति ने कहा कि यह एक स्थापित कानून है कि पीड़िता का बयान विश्वास उत्पन्न करता हो तो केवल उसी के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है। इसके लिए सहायक साक्ष्य की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, पीड़िता का बयान विरोधाभासों से भरा है और यह विश्वास उत्पन्न नहीं करता।

विज्ञापन
Delhi High Court upheld the decision to acquit the Misdeed accused
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी को बरी किए जाने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि पीड़िता के बयान में संदेह होने पर निचली अदालत का निर्णय सही है।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति अमित महाजन ने मामले में राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। अपने आदेश में न्यायमूर्ति ने कहा कि यह एक स्थापित कानून है कि पीड़िता का बयान विश्वास उत्पन्न करता हो तो केवल उसी के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है। इसके लिए सहायक साक्ष्य की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, पीड़िता का बयान विरोधाभासों से भरा है और यह विश्वास उत्पन्न नहीं करता।
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि प्राथमिकी (एफआईआर) घटना के 10 दिन बाद दर्ज की गई थी और अभियोजन पक्ष इस देरी के लिए कोई ठोस स्पष्टीकरण देने में विफल रहा। घटना 1 अप्रैल 2015 को हुई थी, लेकिन पीड़िता ने 10 अप्रैल तक पुलिस को सूचित नहीं किया और वह आरोपी की फैक्टरी में काम करती रही, जिससे उसके आचरण पर संदेह पैदा होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अदालत ने कहा कि आरोपी की पत्नी को पूरी घटना की जानकारी थी फिर भी उसने पीड़िता को फैक्टरी में दोबारा काम पर लौटने के लिए मजबूर किया। पीड़िता के बयान की विश्वसनीयता पर बड़ा संदेह पैदा करता है। पीड़िता के पति द्वारा दिए गए साक्ष्य भी पीड़िता के बयान से विरोधाभासी हैं।


ससुराल वालों से अलग रह रही महिला के लिए आवास का किराया देने के आदेश
उधर, द्वारका कोर्ट ने घरेलू हिंसा के एक मामले में अलग रह रही महिला के ससुराल वालों को उसके लिए आवास की व्यवस्था या उचित समय तक उसके मकान का किराया देने का आदेश दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शरद गुप्ता महिला अदालत के सितंबर, 2023 के आदेश के खिलाफ पीड़िता की ओर से दायर अपील पर सुनवाई कर रहे थे। महिला अदालत ने अपने पुराने फैसले में महिला के पति को निर्देश दिया था कि या तो वह उसे वैवाहिक घर में रहने दे या आवास के लिए 7 हजार रुपये किराया दे। ऐसे में मजिस्ट्रेट अदालत ने पति के खिलाफ दायर घरेलू हिंसा अधिनियम के मामले में महिला को राहत दी थी। महिला ने दावा किया कि मजिस्ट्रेट अदालत किराया देने के लिए वैकल्पिक आदेश पारित नहीं कर सकती थी। इसके बजाय उसे वैवाहिक घर में रहने का पूर्ण अधिकार था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed