{"_id":"69ae5f13fb7398aea90ccdb4","slug":"delhi-high-court-to-hear-cbi-s-plea-in-excise-policy-case-2026-03-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi Excise Case: दिल्ली हाईकोर्ट में CBI की अपील पर सुनवाई, केजरीवाल-सिसोदिया समेत 23 को नोटिस जारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi Excise Case: दिल्ली हाईकोर्ट में CBI की अपील पर सुनवाई, केजरीवाल-सिसोदिया समेत 23 को नोटिस जारी
Mon, 09 Mar 2026 11:38 AM IST
Vijay Singh Pundir
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Vijay Singh Pundir
Updated Mon, 09 Mar 2026 11:38 AM IST
सार
राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कुल 23 लोगों को शराब घोटाले में बरी कर दिया था। सीबीआई ने राउज एवेन्यू कोर्ट के इस फैसले को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने सभी 23 पक्षों को नोटिस जारी कर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है।
विज्ञापन
अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आबकारी नीति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने राउन एवेन्यू कोर्ट की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और इसके जांच अधिकारी के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों और जांच अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई के निर्देश पर सोमवार को रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने सीबीआई की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 23 लोगों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने इसी मामले से जुड़े इंडी के मनी लॉन्ड्रिंग केस में ट्रायल कोर्ट की सुनवाई भी स्थगित कर दी।
विज्ञापन
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की एकल पीठ ने कहा अदालत जांच एजेंसी व अधिकारी के खिलाफ टिप्पणियों पर रोक लगाने का आदेश दे रही है। हाईकोर्ट के फैसले तक पीएमएलए मामले की सुनवाई भी नहीं होगी। हालांकि, पीठ ने ट्रायल कोर्ट के आरोपियों को आरोप मुक्त करने के आदेश पर रोक से इनकार कर दिया। केजरीवाल और सिसोदिया सहित 23 आरोपियों को ट्रायल कोर्ट ने आरोपमुक्त कर दिया था। सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अदालत याचिका पर 16 मार्च को सुनवाई करेगी।
विज्ञापन
अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच का आदेश गलत और पक्षपातपूर्ण : सीबीआई
सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल सुधार मेहता ने कहा, ट्रायल कोर्ट ने सभी 23 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया। साथ ही अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच का भी निर्देश दिया। यह फैसला गलत, पक्षपाती और कानूनी त्रुटियों से भरा है। यह किसी को बिना ट्रायल के मुक्त करने जैसा आदेश है। उन्होंने कहा, मैं आरोपमुक्त किए जाने के आदेश पर रोक की मांग नहीं कर रहा, लेकिन ट्रायल कोर्ट की सीबीआई के खिलाफ टिप्पणियों व जांच अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई का निर्देश रोका जाए, ताकि इससे ईडी का मनी लॉन्डिंग मामला प्रभावित न हो।
विज्ञापन
नीति में जानबूझकर खामियां रखी गई
मेहता ने कोर्ट को बताया, आबकारी नीति में जानबूझकर खामियां डालकर शराब कारोबार को एकाधिकार व कार्टेलाइजेशन के लिए तैयार किया गया था। 20 जुलाई, 2022 को उपराज्यपाल वीके सक्सेना की शिकायत पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी। आरोप है, नीति बनाने के चरण में आप नेताओं व निजी संस्थाओं ने साजिश रची, जिसमें विजय नायर को रिश्वत दी गई।
साजिश को पूरे संदर्भ में देखा जाना चाहिए
मेहता ने कहा-ट्रायल कोर्ट ने सिर्फ अप्रूवर के बयानों पर मामले को खड़ा करने का आरोप लगाया और कहा कि यदि ऐसा करने दिया गया तो यह संविधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन होगा। जज ने चार महीने फाइल पढ़ने में लगाए और सबूतों की विस्तृत समीक्षा की। मेहता ने दलील दी कि साजिश को अलग-अलग टुकड़ों में नहीं, बल्कि पूरे परिप्रेक्ष्य में देखना चाहिए था।
निजी जेट से रिश्वत का लेनदेन
मेहता ने कहा, यह पूरी तरह भ्रष्टाचार का मामला है। आरोपी मनीष सिसोदिया और अन्य लोगों ने 170 से अधिक मोबाइल फोन तोड़े। जब पूरा देश लॉकडाउन में था, तब ये लोग निजी जेट से रिश्वत का लेनदेन कर रहे थे। यह देश की राजधानी का सबसे बड़ा घोटाला है। जांच वैज्ञानिक थी। 164 सीआरपीसी में बयान दर्ज किए गए। गवाहों ने साजिश कैसे रची, करोड़ों रुपये की घूस कैसे दी, इसका पूरा विवरण दिया। इनमें से 44.50 करोड़ रुपये हवाला के जरिये गोया चुनाव के लिए हस्तांतरित किए गए। ट्रायल कोर्ट ने अप्रूवरों को गवाह बॉक्स में नहीं रखा, न परीक्षा की। यह आपराधिक कानून उलटने जैसा है।
बता दें कि सीबीआई ने अपनी 974 पेज की लंबी याचिका में निचली अदालत के फैसले को चौंकाने वाला और गैरकानूनी करार दिया है। एजेंसी का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने महत्वपूर्ण सबूतों को नजरअंदाज किया और जांच में सामने आए तथ्यों पर सही से विचार नहीं किया। याचिका में दावा किया गया है कि आबकारी नीति में साजिश रचकर कुछ निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का मामला स्पष्ट था, लेकिन निचली अदालत ने इसे नजरअंदाज कर दिया।
मामला 2021-22 की दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति से जुड़ा है, जिसे आप सरकार ने लागू किया था, लेकिन भ्रष्टाचार, रिश्वत और कार्टेलाइजेशन के आरोपों के बीच जुलाई 2022 में ही रद्द कर दिया गया था। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि नीति को जानबूझकर इस तरह तैयार किया गया, ताकि शराब कारोबार में कुछ लोगों को एकाधिकार मिले और करोड़ों रुपये की रिश्वत का लेन-देन हुआ। 27 फरवरी 2026 को स्पेशल जज जितेंद्र सिंह की अदालत ने 598 पेज के आदेश में सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। अदालत ने कहा था कि सीबीआई का केस पूर्व नियोजित और बनावटी है। केवल बयानों पर केस बनाया गया। अदालत ने जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिए थे। सीबीआई की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में 9 मार्च यानी आज सुनवाई हुई। यह मामला हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की एकल पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है।