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Delhi NCR News: एनसीएम में रिक्तियों पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र से मांगी स्पष्ट समय सीमा
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- छह महीने और समय मांगने पर उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) में लंबित रिक्तियों पर गहरी चिंता जताई और कहा कि इन खाली पदों के कारण आयोग पूरी तरह निष्क्रिय है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पष्ट समय सीमा बताने को कहा कि कब तक सभी पदों को भरा जाएगा। मुजाहिद नफीस द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यह एक वैधानिक संस्था है, जो पिछले साल अप्रैल से अध्यक्ष और किसी सदस्य के बिना काम कर रही है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सभी सदस्यों के पद खाली पड़े होने से अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने वाली इस महत्वपूर्ण संस्था का कामकाज ठप है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील से पूछा कि क्या छह महीने और समय मांगना उचित है। बेंच ने आदेश में दर्ज किया, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के पदों पर रिक्ति के कारण आयोग वर्तमान में गैर-कार्यात्मक प्रतीत हो रहा है। यह चिंता का विषय है। कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह एक हलफनामा दाखिल करे, जिसमें सभी रिक्तियों को भरने के लिए उठाए गए कदमों का पूरा ब्यौरा हो। साथ ही, प्रक्रिया पूरी करने की समय सीमा भी स्पष्ट रूप से बताई जाए। याचिका में दावा किया कि केंद्र की लापरवाही से संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन हो रहा है, जो अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) में लंबित रिक्तियों पर गहरी चिंता जताई और कहा कि इन खाली पदों के कारण आयोग पूरी तरह निष्क्रिय है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पष्ट समय सीमा बताने को कहा कि कब तक सभी पदों को भरा जाएगा। मुजाहिद नफीस द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यह एक वैधानिक संस्था है, जो पिछले साल अप्रैल से अध्यक्ष और किसी सदस्य के बिना काम कर रही है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सभी सदस्यों के पद खाली पड़े होने से अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने वाली इस महत्वपूर्ण संस्था का कामकाज ठप है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील से पूछा कि क्या छह महीने और समय मांगना उचित है। बेंच ने आदेश में दर्ज किया, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के पदों पर रिक्ति के कारण आयोग वर्तमान में गैर-कार्यात्मक प्रतीत हो रहा है। यह चिंता का विषय है। कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह एक हलफनामा दाखिल करे, जिसमें सभी रिक्तियों को भरने के लिए उठाए गए कदमों का पूरा ब्यौरा हो। साथ ही, प्रक्रिया पूरी करने की समय सीमा भी स्पष्ट रूप से बताई जाए। याचिका में दावा किया कि केंद्र की लापरवाही से संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन हो रहा है, जो अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
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