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दिल्ली हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी: जेल में बंद विदेशी नागरिकों को रिहा कर अपने देश भेजने को लेकर थी जनहित याचिका
Thu, 28 Oct 2021 05:55 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Thu, 28 Oct 2021 05:55 PM IST
सार
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता दीपक प्रकाश ने जेल में बंद दो नाइजीरियाई नागरिकों की रिहाई का निर्देश देने की मांग की थी। याचिका में कहा गया था कि भारतीय संसाधनों का इस्तेमाल अपने नागरिकों के सुधार के लिए किया जाना चाहिए, न कि विदेशी नागरिकों के लिए।
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फाइल फोटो
- फोटो : istock
विस्तार
उच्च न्यायालय ने जेल में बंद विदेशी नागरिकों को रिहा करने और उनको अपने देश में वापस भेजे जाने के मुद्दे पर जनहित याचिका दायर करने के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने याचिकाकर्ता पर 25 हजार रुपये जुर्माना करते हुए स्पष्ट किया कि दर्ज मुकदमा और आपराधिक कार्यवाही को जनहित याचिका के जरिए रद्द नहीं किया जा सकता है।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि जब किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाता है तो तथ्यों पर विचार किए बगैर राहत नहीं दी जा सकती है। अदालत ने कहा मौजूदा याचिका जनहित याचिका के तौर पर दाखिल गई, इसलिए अदालत द्वारा उन विदेशी नागरिकों के लिए राहत नहीं दी जा सकती जिनके खिलाफ अपराध दर्ज हैं और जो अदालत के आदेश पर न्यायिक हिरासत में है।
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याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता दीपक प्रकाश ने जेल में बंद दो नाइजीरियाई नागरिकों की रिहाई का निर्देश देने की मांग की थी। याचिका में कहा गया था कि भारतीय संसाधनों का इस्तेमाल अपने नागरिकों के सुधार के लिए किया जाना चाहिए, न कि विदेशी नागरिकों के लिए। यह दलील देते हुए अधिवक्ता ने जेल में बंद विदेशी नागरिकों को वापस निर्वासित करने के लिए दिशा-निर्देश बनाने की भी मांग की थी।
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पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि जिनके लिए याचिका में राहत की मांग की गई है उनको उम्रकैद की सजा सुनाई गई है और मामले में अपील भी लंबित है। न्यायालय ने कहा कि जनहित याचिका के अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए एक प्राथमिकी या आपराधिक कार्यवाही को रद्द नहीं किया जा सकता है। पीठ ने कहा है कि यदि कोई विदेशी नागरिक भारतीय दंड संहिता या किसी अन्य भारतीय कानून के तहत किसी भी तरह का अपराध कर रहा है, तो भारतीय कानूनों के अनुसार ऐसे विदेशी नागरिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने या आपराधिक कार्यवाही होना तय है।
पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता गैर संगठन ‘वी आर साथ’ पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया। साथ ही 4 सप्ताह के भीतर जुर्माने की रकम दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराने का आदेश दिया है।