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Delhi HC: कक्षाओं में उपस्थित हुए बिना परीक्षा देने की सुविधा देना धोखाधड़ी, हाईकोर्ट की टिप्पणी

Tue, 28 Jan 2025 06:09 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेवटर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेवटर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Tue, 28 Jan 2025 06:09 AM IST
सार

पीठ ने कहा,  यह देखा गया है कि छात्र स्कूलों में कक्षाओं में उपस्थित नहीं होते हैं, बल्कि कोचिंग सेंटरों में समय बिताते हैं। हालांकि उन्हें शिक्षा बोर्डों द्वारा परीक्षा देने की अनुमति दी जाती है, जहां उन्हें अपेक्षित न्यूनतम उपस्थिति दर्ज करानी होती है।

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Delhi High Court said that providing facility to take exams without attending classes is fraud
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

उच्च न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली सरकार और सीबीएसई को ऐसे डमी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है जो कथित तौर पर छात्रों को कक्षाओं में उपस्थित हुए बिना परीक्षा देने की सुविधा देते हैं।

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मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने इसे धोखाधड़ी बताया और कहा कि ऐसे स्कूल छात्रों को केवल कोचिंग कक्षाओं में उपस्थित होने और बिल्कुल गलत सूचना के आधार पर परीक्षा देने की अनुमति नहीं दे सकते।
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पीठ ने कहा,  यह देखा गया है कि छात्र स्कूलों में कक्षाओं में उपस्थित नहीं होते हैं, बल्कि कोचिंग सेंटरों में समय बिताते हैं। हालांकि उन्हें शिक्षा बोर्डों द्वारा परीक्षा देने की अनुमति दी जाती है, जहां उन्हें अपेक्षित न्यूनतम उपस्थिति दर्ज करानी होती है।

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पीठ ने सरकार और सीबीएसई को इस संबंध में निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। पीठ ने ऐसे स्कूलों का संज्ञान लिया, जिनका उपयोग अन्य राज्यों के छात्रों को दिल्ली के निवासी होने का लाभ देने के लिए किया जा रहा है और ऐसे स्कूलों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर दिल्ली सरकार और सीबीएसई से हलफनामा मांगा है।

न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर यह निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि डमी स्कूल की कोई अवधारणा नहीं है और दावा किया कि फर्जी दाखिले के मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्कूलों को अपने संबद्धता नियमों का पालन करना अनिवार्य है, ऐसा न करने पर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाती है और अधिकारियों के पास किसी भी डमी स्कूल के बारे में कोई   शिकायत नहीं है। सीबीएसई के वकील ने कहा कि देश भर में 300 से अधिक डमी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

स्वास्थ्य व योग विज्ञान 8वीं कक्षा तक अनिवार्य बनाने की मांग वाली याचिका पर मांगा जवाब
बच्चों के समग्र विकास के साथ-साथ शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अनुरूप उनकी शारीरिक और मानसिक क्षमताओं के विकास के लिए 8वीं कक्षा तक स्वास्थ्य एवं योग विज्ञान को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने कहा कि यह मुद्दा नीति निर्माण के दायरे में है और इसे विशेषज्ञों द्वारा निपटाया जाना चाहिए। फिलहाल अदालत ने मामले में दिल्ली सरकार व एनसीईआरटी को अपना पक्ष रखने का निर्देश देेते हुए सुनवाई 9 अप्रैल तय की है। अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका में यह घोषित करने की मांग की गई है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत गारंटीकृत शिक्षा का अधिकार समग्र एकीकृत समान गुणवत्ता वाली शिक्षा के अधिकार हो।

चार बेसमेंट मालिकों को नियमित जमानत
उच्च न्यायालय ने बेसमेंट के चार संयुक्त मालिकों को नियमित जमानत दे दी। राजेन्द्र नगर स्थित उक्त बेसमेंट में राव आईएएस स्टडी सर्किल कोचिंग सेंटर संचालित होता था। वर्षा का पानी बेसमेंट में भरने के कारण तीन सिविल सेवा की तैयार कर रहे छात्रों की मौत हो गई थी। इस मामले में बेसमेंट मालिकों के खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मामला   दर्ज किया गया था। न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने हालही में बेसमेंट के संयुक्त मालिकों परविंदर सिंह, सरबजीत सिंह, तजिंदर सिंह अजमानी और हरविंदर सिंह को जमानत दी है। वे सभी पहले से ही अंतरिम जमानत पर बाहर थे।

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