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हाईकोर्ट की टिप्पणी: आतंकी घटना में विस्फोट होता तो कितनी जाने जाती, आरोप गंभीर आप अपनी हरकतों के लिए जिम्मेदार
Thu, 24 Mar 2022 11:00 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Thu, 24 Mar 2022 11:00 PM IST
सार
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने कहा कि दोषी मोहम्मद नफीस खान के खिलाफ गंभीर आरोप हैं। पीठ ने दोषी के वकील से कहा कि ये आपका मामला नहीं है कि आप मजे के लिए विस्फोटक संयंत्र (आईईडी) बना रहे थे। आपने माना है कि आप भारत में आंतक फैलाने के लिए आईईडी बना रहे थे। जरा कल्पना कीजिए कि अगर उन आईईडी में विस्फोट हो जाता, तो क्या हुआ होता। कितनी लोगों की जानें चली गई होती।
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हाईकोर्ट ने आईएसआईएस के आतंकवादी को मिली 10 वर्ष की सजा को चुनौती देने के मामले में सुनवाई करते हुए टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर उसके विस्फोटक फट गए होते तो कितनी जानें चली गई होती।
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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने कहा कि दोषी मोहम्मद नफीस खान के खिलाफ गंभीर आरोप हैं। पीठ ने दोषी के वकील से कहा कि ये आपका मामला नहीं है कि आप मजे के लिए विस्फोटक संयंत्र (आईईडी) बना रहे थे। आपने माना है कि आप भारत में आंतक फैलाने के लिए आईईडी बना रहे थे। जरा कल्पना कीजिए कि अगर उन आईईडी में विस्फोट हो जाता, तो क्या हुआ होता। कितनी लोगों की जानें चली गई होती। आपके खिलाफ गंभीर आरोप है। आप बालिग हैं और अपनी हरकतों के लिए जिम्मेदार हैं।
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दोषी खान को आपराधिक साजिश रचने के आरोप में निचली अदालत ने 16 अक्टूबर 2020 को 10 वर्ष की कैद की सजा सुनाई थी। साथ ही उसपर 1.03 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया था। अदालत ने उसके अलावा आतंकी संगठन आईएसआईएस के 13 सदस्यों को भी अलग-अलग सजाएं दी गई थी।
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सभी भारत में अपना आधार बनाने एवं आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए सोशल मीडिया के जरिए मुस्लिम युवाओं की भर्ती करने की आपराधिक साजिश रचने के दोषी पाए गए थे। कोर्ट के राहत नहीं देने पर उसके वकील ने अपने अनुरोध को सीमित करते हुए दोषी की सजा को कम करने की अपील की है। इसपर कोर्ट ने जुर्माने की रकम को घटा कर आधा कर दिया।
अभियोजन के विरोध पर कोर्ट ने कहा कि कोई अप्रिय घटना हो पाती, इससे पहले ही जांच एजेंसी ने उसे पकड़ लिया था। इसलिए किसी को भी कोई नुकसान नहीं हुआ। इस वजह से जुर्माने की राशि को घटाया जा सकता है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सभी आरोपियों के खिलाफ वर्ष 2016-2017 में आरोप पत्र दाखिल किया था।