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Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, निर्णय लेने में एआई मानवीय सोच का स्थान नहीं ले सकता
Sun, 27 Aug 2023 06:39 PM IST
श्याम जी.
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: श्याम जी.
Updated Sun, 27 Aug 2023 06:39 PM IST
सार
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) न्यायिक प्रक्रिया में ह्यूमन इंटेलिजेंस और ह्यूमन इलेमेंट का स्थान नहीं ले सकती है।
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) न्यायिक प्रक्रिया में ह्यूमन इंटेलिजेंस और ह्यूमन इलेमेंट का स्थान नहीं ले सकती है। किसी अदालत में कानूनी या तथ्यात्मक मुद्दों का निर्णय चैटजीपीटी के आधार पर नहीं हो सकता है। न्यायमूर्ति प्रथिबा एम सिंह ने कहा कि एआई से उत्पन्न डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता अभी भी अस्पष्ट है। ऐसे उपकरण का उपयोग प्रारंभिक समझ या प्रारंभिक शोध के लिए किया जा सकता है। कोर्ट ने ये बातें c द्वारा एक साझेदारी फर्म के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई के दौरान कहीं।
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शिकायतकर्ता के वकील ने कहा कि रेड सोल शू का भारत में पंजीकृत ट्रेडमार्क था। इसकी रिपोटेशन बनाए रखने के लिए चैटजीपीट द्वारा कोर्ट में प्रतिक्रिया पेश की गई।
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वहीं, अदालत ने कहा कि चैटजीपीट किसी अदालत में कानूनी या तथ्यात्मक मुद्दों के निर्णय का आधार नहीं हो सकता। चैटजीपीटी जैसे बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) पर आधारित चैटबॉट्स की प्रतिक्रिया, उपयोगकर्ता द्वारा पूछे गए प्रश्न की प्रकृति और संरचना, प्रशिक्षण सहित कई कारकों पर निर्भर करता है। इसके अलावा, एआई चैटबॉट्स द्वारा उत्पन्न गलत प्रतिक्रियाएं, काल्पनिक केस कानून, कल्पनाशील डेटा आदि की भी संभावनाएं हैं।
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एआई जनित डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता अभी भी अस्पष्ट है। न्यायिक प्रक्रिया में ह्यूमन इंटेलिजेंस और ह्यूमन इलेमेंट्स का स्थान नहीं ले सकती है। अधिक से अधिक इस उपकरण का उपयोग प्रारंभिक समझ या प्रारंभिक अनुसंधान के लिए किया जा सकता है और इससे अधिक कुछ नहीं है। दोनों पक्षों के उत्पादों के तुलनात्मक विश्लेषण के आधार पर अदालत ने फैसला सुनाया कि प्रतिवादी का वादी की रिपोटेशन और सद्भावना के बल पर नकल करने और लाभ हासिल करने का इरादा था।
कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्रतिवादी के उत्पाद वादी के विशिष्ट जूतों और जूतों के समान है। प्रतिवादी ने वादी के जूते की सभी आवश्यक विशेषताओं जैसे रेड सोल, स्पाइक्ड शू की नकल की है। शैली साथ ही प्रिंट भी नकल किया गया है। नकल एक या दो डिजाइनों की नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में डिजाइनों की है। प्रतिवादी इस बात पर सहमत हुआ कि वह वादी के जूते के किसी भी डिज़ाइन की नकल या नकल नहीं करेगा। इसके बाद अदालत ने निर्देश दिया कि इस वचन के किसी भी उल्लंघन के मामले में प्रतिवादी वादी को हर्जाने के रूप में 25 लाख रुपये का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा।
यह ध्यान में रखते हुए कि प्रतिवादी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर प्रसिद्ध बॉलीवुड हस्तियों की तस्वीरों का भी उपयोग कर रहा था और हाई-एंड मॉल में जूते भी बेच रहा था। यह निर्देश दिया गया कि प्रतिवादी को लागत के रूप में दो लाख रुपये का भुगतान करना होगा।