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Delhi : हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को लगाई फटकार, पूछा- तीन करोड़ की आबादी के लिए महज छह सीटी स्कैन मशीनें

Wed, 07 Feb 2024 06:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 07 Feb 2024 06:38 AM IST
सार

उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और बिस्तर क्षमता में सुधार करने का निर्देश दिया है। 
 

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Delhi: High Court reprimanded Delhi government
Delhi high court - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

उच्च न्यायालय ने राजधानी की लगभग तीन करोड़ आबादी के लिए छह सीटी स्कैन मशीनों पर दिल्ली सरकार की खिंचाई करते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और बिस्तर क्षमता में सुधार करने का निर्देश दिया है। अदालत एक आवेदन पर विचार कर रही है, जिसमें उस व्यक्ति की मौत की जांच की मांग की गई थी जो पिछले महीने चलती पुलिस नियंत्रण कक्ष वैन से कूद गया था और सरकारी अस्पतालों ने उसका इलाज करने से इन्कार कर दिया था।

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन व न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने अदालत में उपस्थित प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य सचिव से कहा, हमने जो पढ़ा और देखा,  उससे पता चलता है कि सुविधाओं की कमी देखभाल के अभाव में लोगों की जान जा रही है। आपको बुनियादी ढांचा बढ़ाना होगा। तीन करोड़ की आबादी के लिए आपके पास छह सीटी स्कैन मशीनें कैसे हो सकती हैं? आप कह रहे हैं कि पांच मशीनें पूरी तरह कार्यात्मक हैं। एमिकस क्यूरी अशोक अग्रवाल द्वारा दायर आवेदन में कहा गया है कि आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण उस व्यक्ति को चार अस्पतालों ने प्रवेश देने से इन्कार कर दिया था।
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गलत तथ्य देने वाले अधिकारियों पर हो कार्रवाई
सुनवाई के दौरान पीठ ने दिल्ली सरकार से उस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा जिसने सरकार की 30 जनवरी की स्थिति रिपोर्ट में अपने अस्पतालों में सीटी स्कैन मशीनों और वेंटिलेटर के कामकाज के बारे में गलत तथ्यों का उल्लेख किया था। 

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  • पीठ ने दिल्ली सरकार के वकील से कहा, आपको कार्रवाई करनी चाहिए, अधिकारी गलत तस्वीर देकर सेवा नहीं कर रहे। उच्च न्यायालय ने पहले मशीनों के कामकाज के संबंध में गलत डेटा के लिए दिल्ली प्रशासन को फटकार लगाई थी, और कहा था कि चिकित्सा सुविधाओं की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को प्रवेश से वंचित किया जा रहा है।

समिति गठन के लिए 12 को आदेश पारित करेगी अदालत
अदालत ने संकेत दिया कि वह अस्पतालों की स्थिति का आकलन करने और बुनियादी ढांचे में सुधार के उपाय सुझाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति के गठन के संबंध में 12 फरवरी को आदेश पारित करेगी। स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने वकील संतोष कुमार त्रिपाठी के माध्यम से कहा कि मौजूदा उपकरणों के रखरखाव में कठिनाई, लंबे समय से रेडियोलॉजिस्ट की अनुपलब्धता के कारण अस्पताल डॉक्टरों, पैरामेडिक्स, दवाओं और गैर-कार्यात्मक रेडियोलॉजिकल उपकरणों की कमी से जूझ रहे हैं। स्थिति रिपोर्ट में मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि हालांकि सरकार अस्पतालों में नए बिस्तर बनाने की प्रक्रिया में है लेकिन 2,400 बिस्तरों की क्षमता वाले तीन प्रमुख अस्पताल कर्मियों की कमी के कारण केवल 20 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रहे है।



नौ साल में दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य सेवाएं बदतर : सचदेवा
नई दिल्ली। प्रदेश भाजपा ने दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य सेवाएं बद से बदतर होने का आरोप लगाया है। प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेेवा ने आरोप लगाया कि के नौ साल में केजरीवाल सरकार ने न कोई नया अस्पताल खोला और न ही चालू अस्पतालों में बिस्तरोें की संख्या बढ़ाई गई। सचदेवा ने कहा कि कोविड काल में दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाएं फ्लॉप हो गई थी। मोहल्ला क्लीनिक सेवा ठप हो गई थी और आज मोहल्ला क्लीनिक घोटाले के केंद्र बन गए हैं। दिल्ली सरकार के अस्पतालों एवं क्लीनिकों में पैथोलॉजी टेस्ट एवं एक्स-रे की सुविधा नहीं है और निजी पैथ लैब एवं एक्स रे, अल्ट्रासाउंड एवं सीटी स्कैन में घोटाला होे रहा है। 

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