{"_id":"616494038ebc3e6291040c84","slug":"delhi-high-court-informed-in-human-trafficking-and-sexual-assault-case-two-point-five-lakh-compensation-fix-for-survivor","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली: मानव तस्करी एवं दुष्कर्म मामले में पीड़िता को अंतरिम रूप से ढाई लाख रुपये मुआवजा प्रदान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली: मानव तस्करी एवं दुष्कर्म मामले में पीड़िता को अंतरिम रूप से ढाई लाख रुपये मुआवजा प्रदान
Tue, 12 Oct 2021 01:14 AM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Tue, 12 Oct 2021 01:14 AM IST
सार
पीड़िता की ओर से पेश अधिवक्ता जोसी मिलुन्जो ने तर्क रखा कि डीवीसी योजना के तहत अंतिम मुआवजा निचली अदालत के फैसले के बिना दिया जा सकता है और इसे रिकॉर्ड पर रखने के लिए समय मांगा।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मानव तस्करी एवं दुष्कर्म मामले में पीड़िता को अंतरिम रूप से ढाई लाख रुपये मुआवजा प्रदान कर दिया गया है। दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण ने यह जानकारी दिल्ली हाईकोर्ट को दी है। अदालत ने कहा इस तर्क पर मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। पीड़िता ने दायर याचिका में दिल्ली पीड़ित मुआवजा योजना 2018 के तहत 19 लाख रुपये का भुगतान करने की मांग की गई है।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली के समक्ष प्राधिकरण ने बताया कि पीड़िता को सात अक्तूबर को अंतरिमम मुआवजा प्रदान कर दिया गया है और अंतिम मुआवजा अदालत द्वारा दिए आदेश के बाद ही प्रदान किया जा सकता है। अदालत ने उनके तर्क को स्वीकार करते हुए सुनवाई 9 फरवरी 2022 तक के लिए स्थगित कर दी।
वहीं पीड़िता की ओर से पेश अधिवक्ता जोसी मिलुन्जो ने तर्क रखा कि डीवीसी योजना के तहत अंतिम मुआवजा निचली अदालत के फैसले के बिना दिया जा सकता है और इसे रिकॉर्ड पर रखने के लिए समय मांगा।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता महिला ने कहा है कि वह मेघालय के एक गांव के दूरदराज के इलाके में रहने वाले एक गरीब और कमजोर परिवार से संबंध रखती है और उसे उनका चचेरा भाई नौकरी के बहाने दिल्ली बहला-फुसलाकर तस्करी कर ले आया। दिल्ली में लाकर उसने अन्य लोगों के साथ मिलकर उससे यहां देह व्यापार करवाया यह लोग देह व्यापार का रैकेट चला रहे है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नाबालिगों समेत सैकड़ों लड़कियों की तस्करी कर उन्हें जबरन यौन शोषण किया गया।
खाना बनाने की नौकरी कर रही थी पीड़िता
महिला ने कहा कि उसे पिछले साल जनवरी में 20 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पर यहां खाना बनाने की नौकरी दिलाने के बहाने लाया गया था। यहां पहुंचने पर उसे एक फ्लैट में ले जाया गया जहां एक शख्स ने उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया। इसके बाद उसे कई अन्य लोगों को बेच दिया और उनके द्वारा यौन शोषण किया गया। याचिका में कहा गया था कि पिछले साल फरवरी में वह भागने में कामयाब रही और दोस्त और अन्य लोगों की मदद से मालवीय नगर थाने में संपर्क किया और एफआईआर दर्ज कराई गई।
याची ने आरोप लगाया कि उसकी स्पष्ट शिकायत के बावजूद पुलिस ने दुष्कर्म का मामला दर्ज नहीं किया और न ही उसे दुष्कर्म पीड़िता मुआवजा स्कीम से मुआवजा प्रदान किया गया।अदालत ने मामले की सुनवाई नौ दिसंबर तय की है।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली के समक्ष प्राधिकरण ने बताया कि पीड़िता को सात अक्तूबर को अंतरिमम मुआवजा प्रदान कर दिया गया है और अंतिम मुआवजा अदालत द्वारा दिए आदेश के बाद ही प्रदान किया जा सकता है। अदालत ने उनके तर्क को स्वीकार करते हुए सुनवाई 9 फरवरी 2022 तक के लिए स्थगित कर दी।
विज्ञापन
वहीं पीड़िता की ओर से पेश अधिवक्ता जोसी मिलुन्जो ने तर्क रखा कि डीवीसी योजना के तहत अंतिम मुआवजा निचली अदालत के फैसले के बिना दिया जा सकता है और इसे रिकॉर्ड पर रखने के लिए समय मांगा।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता महिला ने कहा है कि वह मेघालय के एक गांव के दूरदराज के इलाके में रहने वाले एक गरीब और कमजोर परिवार से संबंध रखती है और उसे उनका चचेरा भाई नौकरी के बहाने दिल्ली बहला-फुसलाकर तस्करी कर ले आया। दिल्ली में लाकर उसने अन्य लोगों के साथ मिलकर उससे यहां देह व्यापार करवाया यह लोग देह व्यापार का रैकेट चला रहे है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नाबालिगों समेत सैकड़ों लड़कियों की तस्करी कर उन्हें जबरन यौन शोषण किया गया।
खाना बनाने की नौकरी कर रही थी पीड़िता
महिला ने कहा कि उसे पिछले साल जनवरी में 20 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पर यहां खाना बनाने की नौकरी दिलाने के बहाने लाया गया था। यहां पहुंचने पर उसे एक फ्लैट में ले जाया गया जहां एक शख्स ने उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया। इसके बाद उसे कई अन्य लोगों को बेच दिया और उनके द्वारा यौन शोषण किया गया। याचिका में कहा गया था कि पिछले साल फरवरी में वह भागने में कामयाब रही और दोस्त और अन्य लोगों की मदद से मालवीय नगर थाने में संपर्क किया और एफआईआर दर्ज कराई गई।
याची ने आरोप लगाया कि उसकी स्पष्ट शिकायत के बावजूद पुलिस ने दुष्कर्म का मामला दर्ज नहीं किया और न ही उसे दुष्कर्म पीड़िता मुआवजा स्कीम से मुआवजा प्रदान किया गया।अदालत ने मामले की सुनवाई नौ दिसंबर तय की है।