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कोई धमकी ना दे: 'वो अपनी इच्छानुसार जीवन जीने के लिए आजाद', दिल्ली हाईकोर्ट ने समलैंगिक जोड़े को फिर मिलाया
Sat, 02 Sep 2023 09:36 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 02 Sep 2023 09:36 AM IST
सार
दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक साथी के परिवार की ओर से उठाई गई आपत्तियों को खारिज करते हुए एक समलैंगिक जोड़े को साथ रहने की अनुमति प्रदान कर दी। कोर्ट ने कहा कि महिला बालिग है और उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी भी स्थान पर जाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
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सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने 22 वर्षीय समलैंगिक महिला के परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों को निर्देश दिया कि वे उसे या उसके साथी को धमकी न दें या उस पर दबाव न डालें। कोर्ट ने कहा कि वे अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जीने के लिए स्वतंत्र हैं। अदालत का आदेश तब आया जब महिला ने कहा कि वह अपने परिवार के पास वापस नहीं जाना चाहती और अपने साथी के साथ रहना चाहेगी।
इसमें कहा गया है कि महिला वयस्क है और उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी भी स्थान पर जाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है और स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी पक्ष ने उसके आदेश का उल्लंघन किया, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कोर्ट ने कहा कि माता-पिता, रिश्तेदार और उनके सहयोगी याचिकाकर्ता और उत्तरजीवी पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी तरह से कोई धमकी नहीं देंगे या अनुचित दबाव नहीं डालेंगे। याचिकाकर्ता और उत्तरजीवी अपना जीवन जीने के लिए स्वतंत्र हैं।
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हाईकोर्ट ने समलैंगिक जोड़े साथ रहने की दी अनुमति
दरअसल, दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक साथी के परिवार की ओर से उठाई गई आपत्तियों को खारिज करते हुए एक समलैंगिक जोड़े को साथ रहने की अनुमति प्रदान कर दी। कोर्ट ने कहा कि महिला बालिग है और उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी भी स्थान पर जाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
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इसमें कहा गया है कि महिला वयस्क है और उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी भी स्थान पर जाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है और स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी पक्ष ने उसके आदेश का उल्लंघन किया, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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कोर्ट ने कहा कि माता-पिता, रिश्तेदार और उनके सहयोगी याचिकाकर्ता और उत्तरजीवी पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी तरह से कोई धमकी नहीं देंगे या अनुचित दबाव नहीं डालेंगे। याचिकाकर्ता और उत्तरजीवी अपना जीवन जीने के लिए स्वतंत्र हैं।
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हाईकोर्ट ने समलैंगिक जोड़े साथ रहने की दी अनुमति
दरअसल, दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक साथी के परिवार की ओर से उठाई गई आपत्तियों को खारिज करते हुए एक समलैंगिक जोड़े को साथ रहने की अनुमति प्रदान कर दी। कोर्ट ने कहा कि महिला बालिग है और उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी भी स्थान पर जाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने कहा कि 22 वर्ष की युवती वयस्क है। ऐसे में उसके माता-पिता की आपत्ति को स्वीकार नहीं किया जा सकता। पीठ ने पहले उसके माता-पिता के लिए काउंसलिंग का आदेश दिया था, लेकिन कोर्ट को बताया गया कि माता-पिता द्वारा समलैंगिकता के बारे में पढ़ने के बावजूद उन्हें इसे स्वीकार करने में कठिनाई हो रही है।
उसे मजबूर नहीं किया जा सकता- कोर्ट
पीठ ने इसके ध्यानार्थ माता-पिता द्वारा उठाई गई आपत्तियों को खारिज कर दिया और आदेश दिया कि महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी भी स्थान पर जाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है और वह अपनी इच्छानुसार किसी भी व्यक्ति के साथ और जहां चाहे रह सकती है।