हाईकोर्ट ने अय्याश बाबा के आश्रम को दिया सख्त निर्देश, तुरंत अपने नाम से हटाएं 'विश्वविद्यालय'
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हाईकोर्ट ने रोहिणी के आध्यात्मिक विश्वविद्यालय को अपने नाम से विश्वविद्यालय शब्द फौरन हटाने का निर्देश दिया है क्योंकि यह संस्थान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के तहत यह विश्वविद्यालय नहीं है।
दूसरी ओर कोर्ट ने सीबीआई को बाबा वीरेंद्र दीक्षित की तलाश हर हाल मे करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 15 मार्च को होगी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुये कहा बाबा ने आश्रम में महिलाओं व लड़कियों को अध्यात्मिक शिक्षा के नाम पर बंधक बनाया।
इस विश्वविद्यालय की स्थापना यूजीसी के नियमों के तहत नहीं हुई है और न ही उन नियमों का पालन करता है, यह कोई विश्वविद्यालय नहीं है। यह संस्थान विश्वविद्यालय शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकता। इसलिये इसका प्रयोग बंद किया जाना चाहिये।
...इसलिये उस पर यूजीसी के नियम लागू नहीं होते
दूसरी ओर अध्यात्मिक विश्वविद्याल के वकील आलोक पोपने ने कहा आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में केवल अध्यात्म की शिक्षा दी जाती है। इसलिये किसी से भी कोई फीस नहीं ली जाती, इसलिये उस पर यूजीसी के नियम लागू नहीं होते।
कोर्ट ने पांच फरवरी को पूछा था कि बाबा किस आधार पर विश्वविद्यालय शब्द का प्रयोग कर रहा है। सीबीआई ने पिछली तारीख पर कोर्ट को बताया था कि बाबा वीरेंद्र दीक्षित के खिलाफ लुक आउट कॉर्नर (एलओसी) नोटिस जारी कर दिया गया है क्योंकि उसका कोई सुराग नहीं है।
कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुये कहा बाबा को तलाश करने के लिये सीबीआई कानूनी दायरे में हर संभव कोशिश करे। इस मामले की गंभीरता के मद्देनजर केस की जांच कोर्ट ने सीबीआई को सौंप दी थी। एक एनजीओ ने जनहित याचिका दायर कर विजय विहार स्थित आश्रम में युवती व महिलाओं को बंधक रखने का मुद्दा उठाया था।