'ससुराल से ज्यादा सड़क पर सुरक्षित हैं महिलाएं'
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दिल्ली हाईकोर्ट ने 2011 में पत्नी की हत्या के मामले मेंप्रदीप को मिली उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजयोग व न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की खंडपीठ ने प्रदीप की अपील को खारिज करते हुए कहा कि ससुराल में पति की मौजूदगी में महिला की हत्या कर दी जाती है।
इस तथ्य की पुष्टि के बाद उसे मिली सजा के फैसले में हस्तक्षेप उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि पति को स्पष्ट करना होगा कि हत्या आखिर कैसे हुई। ऐसे में हमें कहना पड़ रहा है कि विवाहित महिलाएं ससुराल की अपेक्षा सड़क पर ज्यादा सुरक्षित हैं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 15 मई 2011 को नजफगढ़ रोड़ स्थित एक बिल्डिंग में कुदाल से पत्नी की हत्या करने के बाद प्रदीप फरार हो गया था।
पति कहता है कि वह पत्नी से प्रताड़ित
पुलिस ने उसे अगले दिन गिरफ्तार किया था। ट्रायल कोर्ट में प्रदीप के भाई व भाभी ने माना था कि हत्या के समय प्रदीप घर पर ही था। निचली अदालत ने प्रदीप को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
उसने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। खंडपीठ ने प्रदीप के उस आग्रह को खारिज कर दिया कि वारदात के समय वह घर पर नहीं था और पत्नी को अस्पताल ले गया था। अदालत ने कहा कि इसके स्पष्ट साक्ष्य हैं कि हत्या के बाद वह घटनास्थल से फरार हो गया था।
खंडपीठ ने कहा हमारे समक्ष आने वाली हर दस अपील में से एक में सजा पाने वाला पति कहता है कि वह पत्नी से प्रताड़ित है। ऐसे मामले ससुराल के ही होते हैं। अन्य नौ अपील में घर से बाहर होने वाले अपराध में पुरुष पीड़ित होते हैं।