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हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा, नगर निगम महापौरों को मुख्यमंत्री आवास से हटाएं, कहीं और ले जाने का प्रयास करें

Fri, 18 Dec 2020 03:47 PM IST
Mohit Mudgal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Mohit Mudgal Updated Fri, 18 Dec 2020 03:47 PM IST
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Delhi High Court asks Police to make efforts to shift the mayors of three municipal corporations protesting outside Chief Minister residence
दिल्ली उच्च न्यायालय (फाइल फोटो)

दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे तीनों निगमों के महापौरों को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए प्रयास करने के लिए कहा है। 

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इस पर दिल्ली पुलिस की ओर से कहा गया कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों को दूसरे स्थान पर ले जाने का प्रयास किया है। प्रदर्शनकारियों को डीडीएमए के आदेश के बारे में भी सूचित किया है कि 31 दिसंबर तक राजधानी में राजनीतिक कार्यक्रम प्रतिबंधित हैं और इस तरह विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।  
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उच्च न्यायालय ने गुरुवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के समक्ष जारी धरने पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने गुरुवार को कहा विरोध प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है, लेकिन रिहायशी इलाके में धरने पर बैठने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

न्यायमूर्ति संजीव सचदेव ने तीनों महापौर द्वारा धरना स्थल से ही कामकाज करने पर संज्ञान लेते हुए कहा था कि रिहायशी इलाके में इस तरह से धरना गलत परंपरा को जन्म दे सकती है। निगम फंड की मांग को लेकर तीनों नगर निगमों के महापौर पिछले 12 दिन से मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे है।

अदालत ने धरने से परेशान सिविल लाइंस रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि विरोध,धरना शांतिपूर्ण हो सकता है, लेकिन यदि एक बार परंपरा कायम हो जाती है तो कोई भी वहां आकर बैठ जाएगा जैसा कि वे रामलीला मैदान या जंतर मंतर जैसे जगहों पर करते हैं, जो विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्दिष्ट स्थान हैं। 

अदालत ने कहा था कि इसमें कोई समस्या नहीं है, जब आप आते हैं, विरोध करते हैं और फिर चले जाते हैं। मौजूदा धरना 11 दिनों तक लगातार चल रहा है और एक बार जब आप एक मिसाल कायम करते हैं, तो कोई भी आ जाएगा और वहां बैठ जाएगा। अदालत ने रामलीला मैदान व जंतर मंतर का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि ऐसा करने की अनुमति हमेशा दिया गया तो आप जानते हैं कि रामलीला मैदान और जंतर मंतर जैसे जगहों पर जहां धरना और विरोध प्रदर्शन की अनुमति है, कि क्या स्थिति होती है।


धरना स्थल पर के कार्यालय पर उठाया सवाल
अदालत ने धरना स्थल पर तीनों महापौर के कार्यालय चलाने पर भी सवाल उठाया था। अदालत ने पुलिस से पूछा कि मुख्यमंत्री आवास के बाहर  टेंट कैसे लगा दिए गए हैं और मीडिया खबरों के अनुसार महापौर अपना दफ्तर वहीं से चला रहे हैं। अदालत ने दिल्ली पुलिस से यह बताने के लिए कहा है कि वहां से दफ्तर कैसे चलाया जा सकता है और धरना पर बैठे लोग अपना नित्यक्रिया या मल-मूत्र त्यागने कहां जा रहे हैं। 
 

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