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दिल्ली: लेडी हार्डिंग अस्पताल से 23 सप्ताह की गर्भवती महिला के भ्रूण की असामान्यताओं के साथ जांच करने का निर्देश

Thu, 30 Sep 2021 06:11 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 30 Sep 2021 06:11 PM IST
सार

महिला ने दायर याचिका में अपने 23 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति प्रदान करने का आग्रह करते हुए बताया कि उसकी नवीनतम अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के अनुसार, भ्रूण गंभीर शारीरिक विकृति से पीड़ित है। ऐसा लगता है कि इसमें अन्य समस्याओं के अलावा खोपड़ी की हड्डी नहीं है।

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Delhi high court asks Lady Hardinge Hospital to examine 23 week pregnant woman foetus with abnormalities
डेमो - फोटो : डेमो

विस्तार

उच्च न्यायालय ने गुरुवार को लेडी हार्डिंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को निर्देश दिया कि वह एक महिला की जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन करे, जो 23 सप्ताह की गर्भवती है और गंभीर शारीरिक विकृति से पीड़ित भ्रूण को समाप्त करने की इच्छा रखती है।

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न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा कि अस्पताल के अधिकारी तुरंत मेडिकल बोर्ड बनाएंगे जो महिला की जांच करे और तीन दिन के भीतर रिपोर्ट दे। अदालत ने मामले की सुनवाई 5 अक्तूबर तय की है।
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महिला ने दायर याचिका में अपने 23 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति प्रदान करने का आग्रह करते हुए बताया कि उसकी नवीनतम अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के अनुसार, भ्रूण गंभीर शारीरिक विकृति से पीड़ित है। ऐसा लगता है कि इसमें अन्य समस्याओं के अलावा खोपड़ी की हड्डी नहीं है।
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महिला लेडी हार्डिंग अस्पताल से ही करा रही है इलाज
याची की ओर से पेश अधिवक्ता स्नेहा मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट में संशोधन के रूप में अदालत के समक्ष याचिका दायर की है। इस संशोधन में ऐसे मामलों में 24 सप्ताह तक गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति देना है, अभी अधिसूचित नहीं किया गया है।

सुनवाई के दौरान एम्स के वकील ने कहा कि चूंकि महिला पहले से ही लेडी हार्डिंग अस्पताल से इलाज करा रही है, जो केंद्र सरकार की संस्था भी है, इसलिए अस्पताल को बोर्ड बनाने और महिला की जांच करने का निर्देश दिया जा सकता है।


पिछले साल जनवरी में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (संशोधन) विधेयक, 2020 को मंजूरी दी थी, जिसमें दुष्कर्म से गर्भवती महिलाओं, अनाचार की शिकार और अन्य कमजोर महिलाओं जैसे दिव्यांग और नाबालिगों सहित महिलाओं की विशेष श्रेणियों के लिए ऊपरी गर्भ सीमा को 20 से बढ़ाकर 24 सप्ताह करने का प्रावधान है।

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