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नई आबकारी नीति: शराब की होम डिलीवरी को चुनौती याचिका पर सरकार से जवाब-तलब

Tue, 21 Sep 2021 12:44 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 21 Sep 2021 12:44 AM IST
सार

याची ने कहा कि होम डिलीवरी को सक्षम करने वाला यह नियम शराब के खिलाफ राष्ट्रीय नीति के विपरीत है और संविधान के अनुच्छेद 47 की पूर्ण अवहेलना करता है जो सरकारों पर शराब की खपत को कम करके सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करने की जिम्मेदारी को दर्शाता है।

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Delhi high court asks Delhi government to respond to plea by MP parvesh verma
दिल्ली उच्च न्यायालय (फाइल फोटो)

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर आबकारी नियम, 2010 में संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगा है। याचिका में मोबाइल एप्लिकेशन और वेबसाइटों के माध्यम से शराब की होम डिलीवरी की अनुमति को रद्द करने की मांग की गई है।

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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति अमित बंसल की पीठ ने दिल्ली सरकार को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न आबकारी नीति में संशोधित इस नियम को रद्द किया जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई 24 सितंबर तय की है। यह जनहित याचिका सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने दायर की है और उन्होंने आबकारी नीति 2010 के नियमों के संशोधित नियम 66 (6) को चुनौती दी है।
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दिल्ली सरकार ने दिल्ली उत्पाद शुल्क (संशोधन) नियम 2021 के माध्यम से दिल्ली उत्पाद शुल्क नियम, 2010 में बदलाव किए है। संशोधित नियम 66(6) में प्रावधान है कि लाइसेंसधारी शराब की डिलीवरी तभी करेगा जब आदेश मोबाइल ऐप या वेबसाइट के माध्यम से प्राप्त होगा और किसी छात्रावास में डिलीवरी नहीं की जाएगी।
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याची ने कहा कि होम डिलीवरी को सक्षम करने वाला यह नियम शराब के खिलाफ राष्ट्रीय नीति के विपरीत है और संविधान के अनुच्छेद 47 की पूर्ण अवहेलना करता है जो सरकारों पर शराब की खपत को कम करके सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करने की जिम्मेदारी को दर्शाता है।

अधिवक्ता बालाजी श्रीनिवासन के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया 2021 का संशोधन कोविड-19 महामारी के दौरान स्वास्थ्य के महत्व की सार्वजनिक नीति को कमजोर करता है। सार्वजनिक स्वास्थ्य से ऊपर शराब के व्यापार को रखकर दिल्ली सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 47 के विपरीत काम किया है।


याचिका में कहा गया है कि यह संशोधन सार्वजनिक स्थानों पर शराब की आपूर्ति को संभव बनाकर सार्वजनिक स्थानों पर शराब के सेवन पर प्रतिबंध को कमजोर किया गया है। याचिका में कहा गया है हॉस्टल, कार्यालयों और संस्थानों में रहने वालों के लिए नियम में प्रतिबंधों में दूट नहीं मिली बल्कि यह नियम अस्पतालों और स्कूलों में शराब की डिलीवरी को सक्षम बनाता है।

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