{"_id":"5c7db72fbdec22144a2715ad","slug":"delhi-high-court-angry-on-child-commission-in-case-of-missing-kids-scolded","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुमशुदा बच्चों के मामले में बाल आयोग को फटकार, हाईकोर्ट ने प्रयासों की जानकारी मांगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुमशुदा बच्चों के मामले में बाल आयोग को फटकार, हाईकोर्ट ने प्रयासों की जानकारी मांगी
Tue, 05 Mar 2019 05:09 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Tue, 05 Mar 2019 05:09 AM IST
विज्ञापन
delhi high court
- फोटो : PTI
हाईकोर्ट ने गुमशुदा बच्चों के मुद्दे को गंभीरता से न लेने पर दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए प्रयासों की जानकारी मांगते हुये शपथ पत्र पेश करने का निर्देश दिया है। केस की अगली सुनवाई के लिए तीन अप्रैल की तारीख तय की गई है।
न्यायमूर्ति हीमा कोहली व न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी की खंडपीठ के समक्ष डीसीपीसीआर ने कहा कि पिछले तीन साल में संबंधित विभागों की बैठकों में उसने 782 मामलों में दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इस सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि राजधानी में हर साल पांच हजार बच्चे लापता होते हैं ओर उनका कोई सुराग नहीं मिलता। इसके मद्देनजर यह आंकड़ा बेहद कम है। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस के स्थायी अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिहाज से डीसीपीसीआर को बेहद खराब पाया गया है।
दिल्ली पुलिस अपराध शाखा ने कोर्ट को बताया था कि तीन साल में राजधानी से 19916 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 14756 बच्चे मिल गए, लेकिन पांच हजार बच्चों का सुराग नहीं मिल पाया। पेश मामले में पक्षकार एनजीओ बचपन बचाओ आंदोलन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका व अधिवक्ता प्रभसहाय कौर ने कहा कि गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए मानक प्रक्रिया का पालन डीसीपीसीआर नहीं करता।
विज्ञापन
विज्ञापन
न्यायमूर्ति हीमा कोहली व न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी की खंडपीठ के समक्ष डीसीपीसीआर ने कहा कि पिछले तीन साल में संबंधित विभागों की बैठकों में उसने 782 मामलों में दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इस सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि राजधानी में हर साल पांच हजार बच्चे लापता होते हैं ओर उनका कोई सुराग नहीं मिलता। इसके मद्देनजर यह आंकड़ा बेहद कम है। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस के स्थायी अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिहाज से डीसीपीसीआर को बेहद खराब पाया गया है।
विज्ञापन
दिल्ली पुलिस अपराध शाखा ने कोर्ट को बताया था कि तीन साल में राजधानी से 19916 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 14756 बच्चे मिल गए, लेकिन पांच हजार बच्चों का सुराग नहीं मिल पाया। पेश मामले में पक्षकार एनजीओ बचपन बचाओ आंदोलन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका व अधिवक्ता प्रभसहाय कौर ने कहा कि गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए मानक प्रक्रिया का पालन डीसीपीसीआर नहीं करता।
विज्ञापन