दिल्ली का बॉस कौन- आज हाईकोर्ट करेगा तय, 6 महीने बाद आएगा फैसला
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दिल्ली का बॉस कौन, सर्वोच्च न्यायालय बुधवार को यह तय कर देगा। करीब छह माह से दिल्ली सरकार की निगाह सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर लगी हुई है। यदि आज आने वाला फैसला दिल्ली सरकार के हक में आया तो सरकार आक्रामक रूप अख्तियार कर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलवाने के अभियान को तेज कर देगी। वरना यह तय है कि दिल्ली सरकार को वर्तमान परिस्थितियों में ही अपना कार्यकाल पूरा करना पड़ेगा। वहीं, यदि फैसला हाईकोर्ट के फैसले के अनुरूप आया तो तय है कि आने वाले दिन दिल्ली सरकार के लिए अधिक अग्निपरीक्षा भरे होंगे।
दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल के बीच विवाद जगजाहिर है। हर मामले में दिल्ली सरकार उपराज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार पर हमला करती रही है। हाईकोर्ट ने अगस्त 2016 में दिए अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया था कि दिल्ली देश की राजधानी है ओर केंद्र शासित होने के चलते उपराज्यपाल ही दिल्ली का बॉस है और उनकी अनुमति मामलों में जरूरी है। इस फैसले के बाद अधिकांश मामले में दिल्ली सरकार के पर कट गए और उपराज्यपाल व दिल्ली सरकार के बीच विवाद बढ़ता गया।
दिल्ली सरकार ने फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी। सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने विस्तृत सुनवाई के बाद 6 दिसंबर 2017 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब करीब छह माह बाद बुधवार को फैसला आएगा।
फैसला कुछ भी हो, लेकिन उससे दिल्ली सरकार का भविष्य तय होगा। सर्वोच्च न्यायालय ने यदि हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी तो तय है कि उपराज्यपाल और ज्यादा शक्तिशाली हो जाएंगे व दिल्ली सरकार को अधिकांश मामलों में उनकी अनुमति लेनी होगी। सरकार के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाएगा। वहीं, यदि फैसला दिल्ली सरकार के हक में आया तो दिल्ली सरकार आक्रामक रूप लेकर केंद्र के अलावा उपराज्यपाल को भी कटघरे में खड़ा करेगी।
इतना ही नहीं दिल्ली सरकार दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलवाने के अलावा अन्य मामलों में भी अपने अभियान तेज कर सकती है। कानून विशेषज्ञों के अनुसार, संभवत: सर्वोच्च न्यायालय कुछ मुद्दों पर हाईकोर्ट के फैसले को बदल भी सकती है। ऐसे में उपराज्यपाल व दिल्ली सरकार दोनों के लिए कुछ राहत भरा निर्णय हो सकता है।