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केंद्र से लड़ाई में केजरीवाल के साथ है हाईकोर्ट

Tue, 26 May 2015 08:42 PM IST
विजय सिंघल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विजय सिंघल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 26 May 2015 08:42 PM IST
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Delhi has won the first battle in the fight for rights.

केंद्र से अधिकारों की लड़ाई के बीच दिल्ली सरकार ने पहली जंग जीत ली है। हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले में केंद्र सरकार की उस अधिसूचना को गलत ठहराते हुए स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में दिल्ली पुलिस व उसके सभी अधिकारी दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निवारण शाखा (एसीबी) के दायरे में आते हैं।

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इतना ही नही वह उनके खिलाफ कार्रवाई भी कर सकती है। अदालत ने केंद्र सरकार द्वारा 21 मई को जारी अधिसूचना को भी संदिग्ध करार दिया। अदालत ने कहा कि समवर्ती सूची के तहत राज्य सरकार को कानून बनाने का अधिकार है और उपराज्यपाल भी मंत्री समूह की सलाह को मानने के लिए बाध्य हैं।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी ने यह फैसला एसीबी द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल अनिल कुमार की जमानत अर्जी खारिज करते हुए दिया है।

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जानिए कैसे पलटी बाजी ?

Delhi has won the first battle in the fight for rights.

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता दिल्ली पुलिस में है और वह नागरिकों की सेवा कर रहा था। ऐसे में एक तरह से वह दिल्ली सरकार का ही कामकाज देख रहा था।

अदालत ने कहा कि याची पर गंभीर आरोप है ऐसे में वह जमानत का हकदार नहीं है। कांस्टेबल ने आवेदन में केंद्र सरकार की अधिसूचना का हवाला देते हुए तर्क रखा था कि पुलिस केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं और एसीबी को उसे गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है।

अदालत ने हेड कांस्टेबल के अधिवक्ता के तर्कों को खारिज करते हुए उपराज्यपाल द्वारा 8 नवंबर 1993 को जारी अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एसीबी एक पुलिस स्टेशन है और उसका कार्यालय पुराना सचिवालय होगा।

इतना ही नहीं एसीबी का अधिकार क्षेत्र पूरी दिल्ली होगा। न्यायमूर्ति ने कहा कि उनका मानना है एसीबी के अधिकार क्षेत्र पर अंकुश लगाने के संबंध में गृह मंत्रालय द्वारा 23 जुलाई 2014 को जारी अधिसूचना का सवाल है उस पर विचार जरूरी है।

दिल्ली सरकार के पास भी हैं अधिकार

Delhi has won the first battle in the fight for rights.

अदालत ने कहा कि दिल्ली सरकार के पास भी अन्य राज्यों के समान कार्यकारी शक्तियां और अधिकार है, हालांकि उपराज्यपाल अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं।

उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 239 एए 2 (ए) में विधानसभा को अधिकार दिया गया है कि समवर्ती सूची के तहत कानूनी बना सकती है। इस समवर्ती सूची में उपराज्यपाल हस्तक्षेप नहीं कर सकते व मंत्री समूह की सलाह मानने के लिए बाध्य है।

अदालत ने कहा कि उनका मानना है कि ऐसे में केंद्र सरकार को 23 जुलाई 2014 को ऐसी अधिसूचना जारी नहीं करनी चाहिए थी, जिसमें दिल्ली सरकार की कार्यकारी शक्तियां संबंधी (यानी एसीबी पर भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई पर रोक) अधिकारों पर प्रतिबंध करने की बात की गई है।

..तो क्या अधिसूचना गलत है

Delhi has won the first battle in the fight for rights.

न्यायमूर्ति ने कहा कि अधिसूचना के जरिये मात्र दिल्ली सरकार के कर्मचारियों पर एसीबी का दायरा सीमित करना गलत है। केंद्र सरकार को अपने कार्यकारी शक्तियों का इस प्रकार से इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जहां मामला दिल्ली विधानसभा के दायरे में आता हो।

अदालत ने कहा कि विधानसभा को कानून संसद ने जीएनसीटीडी एक्ट के तहत बनाया था। न्यायमूर्ति ने केंद्र सरकार द्वारा 21 मई 2015 को जारी अधिसूचना को संदिग्ध ही करार दिया।

अदालत ने कहा कि इस मामले में फैसला सुरक्षित रखने के बाद केंद्र सरकार ने जिस प्रकार 8 नवंबर 1993 की अधिसूचना में संशोधन कर कहा कि एसीबी (पुलिस स्टेशन) केंद्र सरकार के कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती, उससे अधिसूचना संदिग्ध बन गई है।

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