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Delhi: 28 करोड़ के जीएसटी-वैट फर्जीवाड़े का पर्दाफाश, कंपनी मालिक और सीए गिरफ्तार; पांच साल पुराना मामला
Sun, 17 May 2026 02:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 17 May 2026 02:26 AM IST
सार
दोनों पर जीएसटी और वैट क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग कर फर्जी फर्मों का नेटवर्क खड़ा करने और कई बैंक खातों के जरिए संदिग्ध धनराशि को इधर-उधर करने का आरोप है।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने करोड़ों रुपये के जीएसटी-वैट फर्जीवाड़े के मामले में कंपनी मालिक राजीव कुमार पराशर और चार्टर्ड अकाउंटेंट अतुल गुप्ता को गिरफ्तार किया है। दोनों पर जीएसटी और वैट क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग कर फर्जी फर्मों का नेटवर्क खड़ा करने और कई बैंक खातों के जरिए संदिग्ध धनराशि को इधर-उधर करने का आरोप है।
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पुलिस उपायुक्त सुबोध कुमार गोस्वामी ने बताया कि वर्ष 2020 में स्वास्तिक एंटरप्राइजेज के मालिक यशस्वी शर्मा ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनकी फर्म के जीएसटी और वैट क्रेडेंशियल्स का बिना अनुमति इस्तेमाल कर करीब 28.4 करोड़ रुपये के संदिग्ध व्यावसायिक लेन-देन किए गए। शिकायत के आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
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जांच के दौरान सामने आया कि स्वास्तिक एंटरप्राइजेज के बैंक खातों का इस्तेमाल करोड़ों रुपये के फंड को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया गया। बैंक खातों के विश्लेषण में पाया गया कि कई संस्थाओं और फर्मों से जमा रकम को नकद निकाला गया या आरटीजीएस, एनईएफटी और अन्य माध्यमों से लाभार्थी खातों में भेज दिया गया। जांच में इन लेन-देन के पीछे किसी वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि का पता नहीं चला।
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पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि संदिग्ध फर्मों का संचालन आरोपी सीए अतुल गुप्ता और स्वर्गीय प्रकाश गुप्ता की मदद से किया जा रहा था। इन फर्मों के जीएसटी रिटर्न ‘अशोक अतुल एंड कंपनी’ नाम की सीए फर्म के जरिए दाखिल किए जा रहे थे। आरोप है कि फर्जी मालिकों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर बड़ी रकम को विभिन्न खातों के जरिए घुमाया गया और उसकी परतें बनाई गईं ताकि धन के स्रोत को छिपाया जा सके। जांच के दौरान बैंकिंग रिकॉर्ड, दस्तावेज और जीएसटी संबंधी साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने 12 मई को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।
...और शुरू हो गया फर्जीवाड़े का सफर
पुलिस के अनुसार, मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ निवासी राजीव कुमार पराशर ने दिल्ली से बीकॉम और मेरठ से एमकॉम की पढ़ाई की। बाद में उन्होंने एमएम इंडस्ट्रीज और स्वास्तिक एंटरप्राइजेज के नाम से कारोबार शुरू किया। वहीं, अतुल गुप्ता वर्ष 2002 में चार्टर्ड अकाउंटेंट बने और पारिवारिक फर्म ‘अशोक अतुल एंड कंपनी’ से जुड़े। जांच में फर्जी फर्मों और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन में उनकी भूमिका सामने आई है।