दिल्ली: औद्योगिक क्षेत्रों में कामकाज पर 27 अप्रैल को फैसला ले सकती है सरकार, हालात देखने के बाद होगा फैसला
- नरेला-बवाना में होता है कृषि के आवश्यक उपकरणों का निर्माण
- यहां काम की अनुमति मिले बिना किसानों को नुकसान संभव
- नियमों के साथ कामकाज की छूट मांग रहे व्यापारी
विस्तार
देश के अनेक हिस्सों में सोमवार से आवश्यक वस्तुओं के व्यापार की छूट मिल गई है, लेकिन दिल्ली में कोरोना संक्रमण का खतरा देखते हुए सरकार ने नियमों में ढील देने से इंकार कर दिया है। लेकिन यहां भी व्यापारी लगातार मांग कर रहे हैं कि कोरोना संक्रमण के खतरे से मुक्त कुछ क्षेत्रों में सशर्त व्यापार की अनुमति दी जाए।
इससे संक्रमण का खतरा भी नहीं बढ़ेगा और व्यापार चलने से आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई और उत्पादन में भी कोई कमी नहीं आएगी।
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली सरकार आगामी 27 अप्रैल को राजधानी की स्थितियों पर समीक्षा बैठक कर सकती है। इस बैठक में सरकार के उच्च अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और बाजार से जुड़े शीर्ष प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं।
अगर उस समय कोरोना संक्रमण की स्थिति कंट्रोल में पाई जाती है और सामुदायिक संक्रमण की स्थिति बनते नहीं दिखती है तो सरकार सीमित क्षेत्रों में कुछ उद्योगों को चलाने की इजाजत दे सकती है।
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महामंत्री वीके बंसल ने कहा कि पूरी दिल्ली के हॉट स्पॉट बन जाने के बाद भी अनेक क्षेत्र ऐसे हैं जहां अभी कोई केस सामने नहीं आए हैं।
इन क्षेत्रों में कम मानव क्षमता वाले व्यापार को इजाजत मिलती है, तो इससे व्यापार को चलाते रहने की सुविधा मिल जाएगी। इससे आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आएगी और उत्पादन भी शुरू हो सकेगा।
केंद्र सरकार ने देश के दूसरे हिस्सों में कृषि संबंधी गतिविधियों को चलाने की अनुमति दे दी है। इसमें कृषि से जुड़े उपकरणों और पुर्जों की दुकानें भी शामिल हैं। लेकिन इन उपकरणों का निर्माण देश के अनेक हिस्सों के साथ-साथ नरेला और बवाना औद्योगिक क्षेत्र में होता है।
पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया में अनेक व्यापारी इन सामानों की खरीद-बिक्री से जुड़े हुए हैं। औद्योगिक संगठनों की राय है कि इनको अनुमति देने के बिना किसानों को अनुमति मिलने के बाद भी आवश्यक चीजों को मिलने में परेशानी हो सकती है। इसलिए सभी बिंदुओं पर विचार करके सरकार को उचित फैसला करना चाहिए।
सामानों के दाम बढ़ेंगे
दिल्ली गुड्स ट्रांसपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के चेयरमैन राजेंद्र कपूर ने बताया कि इस समय बहुत सीमित क्षेत्रों में कामकाज की अनुमति है। इस कारण से ज्यादातर मामलों में उनके ट्रक एक तरफ से सामान लेकर जाते हैं लेकिन वापसी के समय उनके पास कोई काम नहीं रहता और उन्हें खाली ही वापस आना पड़ता है।
इससे उनके ऊपर बोझ पड़ रहा है जो अंततः व्यापारी वर्ग वस्तुओं की कीमत बढ़ाकर पाने की कोशिश करेगा। उनकी मांग है कि सरकार दिल्ली के क्षेत्रों में भी कामकाज की अनुमति दे जिससे उनके ऊपर इस तरह के बोझ न बढ़ें।
सरकार लेगी फैसला
पूर्वी दिल्ली नगर निगम के नेता संदीप कपूर ने बताया कि पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र में अनेक आवश्यक वस्तुओं के निर्माण और खरीद-बिक्री का व्यापार होता है। इससे उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और अन्य हिस्सों के लिए आवश्यक सामानों की सप्लाई होती है।
लेकिन इस पर अंतिम फैसला दिल्ली सरकार ही लेगी और वे सरकार के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं।