दिल्लीः फिर चढ़ा सरकार गठन का बुखार!
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दिल्ली में राष्ट्रपति शासन यूं ही चलता रहेगा या किसी की सरकार बनेगी? अरविंदर केजरीवाल के 14 फरवरी को इस्तीफा देने और 17 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के साथ ही शुरू हुए सवाल का जवाब अभी कोई सीधे तौर पर देने को तैयार नहीं है।
मामला सुप्रीम कोर्ट में है, जहां 10 अक्तूबर को सुनवाई होनी है। हालांकि हरियाणा व महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में चुनाव के बीच किसी बड़े फैसले की उम्मीद केंद्र में सत्तासीन भाजपा से नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट में इससे पूर्व की तारीख में केंद्र सरकार ने एक महीने का समय ले लिया था। वजह बताई गई थी उपराज्यपाल ने राष्ट्रपति को हालात की रिपोर्ट भेजी है।
एलजी ने राष्ट्रपति को भेजी थी हालात पर चिट्ठी
अब छुट्टी के बीच रिपोर्ट फाइल वापस भेजने की सूचना फैली है, लेकिन कहीं से पुष्टि नहीं हुई। ऐसे में बृहस्पतिवार का दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्योंकि छुट्टी खत्म हो गई, अब राज्य सरकार और केंद्र सरकार में काम होगा।
उल्लेखनीय है कि उपराज्यपाल नजीब जंग ने केन्द्र सरकार को एक चिट्ठी लिखी थी जिसमें कहा था कि राजधानी में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है।
ऐसे में अगर राष्ट्रपति अनुमति दें तो सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है। इस मामले में बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट किया है।
ट्वीट में केजरीवाल ने पूछा है कि क्या राष्ट्रपति की तरफ से गृहमंत्रालय को फाइल वापस भेज दी गई है? राजधानी में विधानसभा निलंबित करके इस समय राष्ट्रपति शासन लगा है।