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पीएम की मंशा को साकार करेगी दिल्ली सरकार
अखिलेश कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 14 Jul 2014 12:56 PM IST
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सरकारी कामकाज में आईटी तकनीक इस्तेमाल करने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा को दिल्ली सरकार गति देने में लग गई है।
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सरकारी कामकाज कागजी फाईलों से हटकर अब कॉरपोरेट हाउस की तरह इलेक्ट्रॉनिक फाइल में होंगे। इसके लिए ई-ऑफिस की शुरुआत को सैद्घांतिक मंजूरी दे दी गई है। ई-ऑफिस का प्रयोग सबसे पहले सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग शुरू करेगा। इसमें सफलता मिलने पर बाकी विभागों में शुरू होगा।
सूचना एवं प्रौद्योगिकी के प्रधान सचिव आरके वर्मा ने बताया कि नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) को ई-ऑफिस के संबंध में चिट्ठी लिखी गई है।
‘ई-ऑफिस डॉट जीओवी डॉट इन’ वेबसाइट केन्द्रीय स्तर पर बनाया गया है, जिसमें कोई भी स्पेस ले सकता है। एनआईसी से जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। शुरुआत में इंटर-डिपार्टमेंट ई-ऑफिस शुरू करेंगे, जिसे भविष्य में अन्य विभागों के साथ भी जोड़ा जाएगा। अधिकारियों को इलेक्ट्रॉनिक साइन का इस्तेमाल करना होगा।
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दिल्ली सरकार के अधिकारी बताते हैं कि ई-ऑफिस शुरू होने से सरकारी कामकाज को गति मिलेगी। शुरुआत में विभाग से जुड़े काम डिजिटल किए जाएंगे। उसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा।
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फाइल मैनेजमेंट, लीव मैनेजमेंट के अलावा भविष्य में दिल्ली सरकार के सभी विभागों को ई-ऑफिस के प्लेटफार्म में लाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग, शहरी विकास विभाग समेत कुछ अन्य विभागों के प्रमुख केसाथ बैठक भी हुई है।
कहां-कहां है ई-ऑफिस
केन्द्रीय मंत्रिमंडल सचिवालय, मुख्यमंत्री कार्यालय महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु व त्रिपुरा के सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अलावा दिल्ली के एम्स।
ई ऑफिस के क्या हैं फायदे
- खर्च में कमी और सूचनाएं आसानी से ढूंढी जा सकती हैं।
- शहर में कम होती जगह के बीच पेपरलेस ऑफिस में फाइलों को रखने केलिए अलग से जगह की जरूरत नहीं होती। कंप्यूटर में कैद रहती हैं।
- फाइल चोरी या आग लगने जैसी घटानाओं में भी सुरक्षित रहती हैं और सूचनाएं आसानी से बांटी जा सकती हैं।
- सर्वर से कनेक्ट होकर कहीं भी काम किया जा सकता है और कागज की बजाय पर्यावरण की रक्षा भी की जा सकती है।
- सरकारी दफ्तर में इधर-उधर घूमती हुई संबंधित कुर्सी तक देर से पहुंचने वाली फाइलें एक क्लिक से सेकेंड में पहुंच सकती हैं।